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बठिंडा सेंट्रल जेल में रक्षाबंधन पर भावुक हुए भाई-बहन, बिना बैरियर बहनों ने बांधी राखी
तीन साल बाद विदेश से भाई से मिलने पहुंची बहन, कई महिलाओं ने भाइयों से अपराध की राह छोड़कर सामान्य जीवन जीने का लिया वादा
रक्षाबंधन पर बठिंडा सेंट्रल जेल में कैदियों और उनकी बहनों की भावुक मुलाकात हुई। राज्य सरकार की अनुमति के बाद बहनों को बिना कांच की दीवार और जाली के अपने भाइयों से मिलने और राखी बांधने का मौका मिला।
रक्षाबंधन के मौके पर बठिंडा सेंट्रल जेल में उस समय भावुक माहौल बन गया, जब बड़ी संख्या में बहनें अपने भाइयों से मिलने पहुंचीं। इस खास दिन उन्हें जेल में बंद भाइयों से बिना सामान्य मुलाकाती बैरियर के मिलने और उनकी कलाई पर राखी बांधने की अनुमति दी गई। कई भाई-बहनों के लिए यह मुलाकात लंबे समय बाद एक-दूसरे के करीब आने का भावुक अवसर बनी।
रक्षाबंधन पर जेल में खास मुलाकात
रक्षाबंधन को देखते हुए बठिंडा सेंट्रल जेल में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में महिलाएं अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए जेल पहुंचीं। कई परिवारों में यह मिलन वर्षों के अंतराल के बाद हुआ।
जेल में आम दिनों में कैदियों की अपने परिजनों से मुलाकात कांच की दीवार के जरिए टेलीफोन पर या तार की जाली के पीछे से होती है। हालांकि, रक्षाबंधन के अवसर पर राज्य सरकार की अनुमति के बाद बहनों को अपने भाइयों से बिना इन बाधाओं के मिलने की सुविधा दी गई।तीन साल बाद विदेश से भाई से मिलने पहुंची बहन
इस दौरान एक युवती अपने भाई से मिलने विदेश से पहुंची। उसने बताया कि वह करीब तीन साल बाद अपने भाई से मिल पाई है। भाई की कलाई पर राखी बांधने और उससे आमने-सामने मिलने का मौका मिलने पर उसने खुशी जताई।
बहन के लिए यह मुलाकात इसलिए भी खास रही क्योंकि लंबे समय से भाई से दूरी के बाद रक्षाबंधन के दिन उसे उसके साथ समय बिताने का अवसर मिला।
बहनों ने भाइयों से अपराध की राह छोड़ने की अपील की
जेल पहुंचीं दो अन्य महिलाओं ने अपने भाइयों से जीवन में सुधार लाने और अपराध की दुनिया से दूर रहने की अपील की। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले साल रक्षाबंधन पर उन्हें भाइयों से मिलने के लिए जेल नहीं आना पड़ेगा।
दोनों महिलाओं के अनुसार, उनके भाइयों ने उनसे वादा किया है कि वे सामान्य जीवन जीएंगे और दोबारा अपराध की दुनिया में नहीं लौटेंगे।
कई बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और भावुक होकर उन्हें गले लगाया। इस दौरान जेल परिसर में भाई-बहन के रिश्ते की भावनात्मक तस्वीर देखने को मिली।
जेल अधीक्षक ने बताया क्यों बदली मुलाकात की व्यवस्था
बठिंडा सेंट्रल जेल के अधीक्षक हेमंत शर्मा ने बताया कि रक्षाबंधन को लेकर जेल में विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन उन विशेष अवसरों में शामिल है, जब कैदियों को अपनी बहनों से मिलने और उनसे राखी बंधवाने की अनुमति दी जाती है।
उन्होंने बताया कि सामान्य दिनों में कैदियों और उनके परिजनों की मुलाकात कांच की पार्टिशन के जरिए टेलीफोन पर या तार की जाली के पीछे से होती है। लेकिन इस बार राज्य सरकार की अनुमति के बाद बहनों को अपने भाइयों से बिना इन बैरियर के मिलने की सुविधा दी गई।
Key Highlights:
- बठिंडा सेंट्रल जेल में रक्षाबंधन पर बहनों को भाइयों से मिलने की अनुमति मिली।
- विशेष सुरक्षा व्यवस्था के बीच बड़ी संख्या में महिलाएं जेल पहुंचीं।
- बहनों ने कैदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और उन्हें गले लगाया।
- एक युवती तीन साल बाद विदेश से अपने भाई से मिलने पहुंची।
- कुछ बहनों ने भाइयों से अपराध छोड़कर सामान्य जीवन जीने का आग्रह किया।
- राज्य सरकार की अनुमति के बाद इस दिन मुलाकात कांच और जाली के बैरियर के बिना हुई।
- जेल अधीक्षक हेमंत शर्मा ने विशेष व्यवस्था की जानकारी दी।
FAQ Section:
रक्षाबंधन पर बठिंडा जेल में क्या खास हुआ?
रक्षाबंधन के अवसर पर कैदियों को अपनी बहनों से बिना सामान्य कांच या जाली के बैरियर के मिलने और राखी बंधवाने की अनुमति दी गई।
बठिंडा सेंट्रल जेल में आम दिनों में मुलाकात कैसे होती है?
आम दिनों में कैदियों की मुलाकात कांच की पार्टिशन के जरिए टेलीफोन पर या तार की जाली के पीछे से होती है।
क्या बहनें जेल में भाइयों को राखी बांध सकीं?
हां, रक्षाबंधन पर बहनों को अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने की अनुमति दी गई।
क्या किसी बहन ने लंबे समय बाद अपने भाई से मुलाकात की?
हां, एक युवती विदेश से करीब तीन साल बाद अपने जेल में बंद भाई से मिलने पहुंची।
जेल प्रशासन ने सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की?
जेल प्रशासन ने रक्षाबंधन पर बड़ी संख्या में आने वाली महिलाओं को देखते हुए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की थी।
Conclusion:
बठिंडा सेंट्रल जेल में रक्षाबंधन का दिन भाई-बहन के रिश्ते की भावनाओं से भरा रहा। लंबे समय से अलग रह रहे कैदियों को अपनी बहनों से आमने-सामने मिलने और राखी बंधवाने का अवसर मिला। कुछ बहनों ने जहां अपने भाइयों के बेहतर भविष्य की कामना की, वहीं उनसे अपराध की राह छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने की अपील भी की। इस दौरान राखी के धागे ने जेल की दीवारों के बीच रिश्तों की भावनात्मक दूरी को कुछ समय के लिए जरूर कम कर दिया।
