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लंगरोया में किसानों को जागरूक करने के लिए कैंप, पराली प्रबंधन और मिट्टी की सेहत पर जोर
PAU-KVK और कृषि विभाग का संयुक्त प्रयास, ‘विकसित भारत’ में किसानों की भूमिका पर चर्चा
पंजाब के गांव परागपुर में आयोजित जागरूकता शिविर में किसानों को पराली प्रबंधन, मिट्टी की उर्वरता और आधुनिक कृषि तकनीकों के बारे में जानकारी दी गई।
पीएयू-केवीके लंगरोया ने कृषि विभाग के सहयोग से आज गांव परागपुर में एक जागरूकता शिविर का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में 55 किसानों ने भाग लिया, जिसमें वैज्ञानिक तरीके से गेहूं की पराली प्रबंधन, मिट्टी की सेहत को बनाए रखने और “विकसित भारत” के लक्ष्य को हासिल करने में स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर जोर दिया गया।
कृषि विज्ञान के सहायक प्रोफेसर (एग्रोनॉमी) डॉ. जसविंदर कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए पराली जलाने की प्रथा को पूरी तरह छोड़ने की अपील की। उन्होंने इन-सीटू मशीनरी के उपयोग की सलाह दी, जिससे गेहूं की पराली को मिट्टी में मिलाया जा सके। उन्होंने बताया कि यह तरीका मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने और लंबे समय तक भूमि की उत्पादकता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।
विस्तार अधिकारी डॉ. राज कुमार ने किसानों को विभिन्न सरकारी कृषि योजनाओं के बारे में जानकारी दी, जिनका उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीकों अपनाने में सहायता प्रदान करना है।
इसके साथ ही कृषि अधिकारी जामनदीप कौर ने बेहतर फसल उत्पादन के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की अहमियत पर प्रकाश डाला।
गृह विज्ञान की सहायक प्रोफेसर डॉ. राजिंदर कौर ने बताया कि मिट्टी का स्वास्थ्य सीधे तौर पर मानव आहार की पोषण गुणवत्ता से जुड़ा होता है, इसलिए यह जरूरी है कि फसलें पोषक तत्वों से भरपूर हों।

