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अमेरिका-ईरान तनाव का असर: यूपी में 70% सड़क निर्माण कार्य ठप
बिटुमेन की कीमतों में 65% उछाल, परियोजनाओं पर बढ़ा आर्थिक दबाव
पश्चिम एशिया के तनाव के कारण बिटुमेन महंगा हो गया है, जिससे उत्तर प्रदेश में सड़क निर्माण कार्य बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर US-Iran war के चलते वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं का असर अब उत्तर प्रदेश की सड़कों पर भी दिखने लगा है। राज्य में चल रहे लगभग 70% सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य धीमे पड़ गए हैं।
इस संकट की मुख्य वजह बिटुमेन (सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख पदार्थ) की कीमतों में भारी वृद्धि है। फरवरी में बिटुमेन की कीमत ₹53,150 प्रति मीट्रिक टन (GST सहित) थी, जो अब बढ़कर लगभग ₹89,859 प्रति मीट्रिक टन हो गई है—यानी करीब 65% की वृद्धि।
कीमतों में इस तेज उछाल के कारण निर्माण एजेंसियां बेस तैयार करने के बाद डामर (asphalt) बिछाने का काम रोकने को मजबूर हैं, क्योंकि लागत अब असहनीय हो गई है।
इस समस्या को स्वीकार करते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रमुख सचिव Ajay Chauhan ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर कदम उठा रही है और भारत सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।
राज्य के सरकारी इंजीनियरों के संगठन, डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ (DES) ने भी इस मुद्दे को मुख्यमंत्री कार्यालय के समक्ष उठाया है। संगठन के अध्यक्ष ND Dwivedi ने चेतावनी दी कि बिटुमेन की कीमतों में वृद्धि के कारण ठेकेदार कम या घटिया गुणवत्ता का बिटुमेन इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे सड़कों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि Ministry of Road Transport and Highways द्वारा इस संकट से निपटने के लिए जो समाधान तैयार किए गए हैं, उन्हें उत्तर प्रदेश में भी लागू किया जा सकता है।
स्थिति को संभालने के लिए लोक निर्माण विभाग ने डामर की बढ़ी हुई कीमत (प्राइस डिफरेंस) की भरपाई करने का फैसला किया है, ताकि परियोजनाओं को फिर से गति मिल सके।
कुल मिलाकर, यह स्थिति दिखाती है कि वैश्विक घटनाओं का सीधा असर स्थानीय विकास कार्यों पर पड़ता है, और इससे निपटने के लिए त्वरित नीतिगत कदम जरूरी हैं।

