सहकारी क्षेत्र में प्रस्तावित जीवन बीमा कंपनी से ग्रामीण भारत को मिले लाभ, पूर्व बैंक अधिकारियों ने केंद्र से की अपील

गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा के बाद एससीडी गवर्नमेंट कॉलेज के पूर्व छात्रों ने सहकारी बीमा मॉडल को किसानों और ग्रामीण समुदाय के हितों से जोड़ने की मांग उठाई।

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सहकारी क्षेत्र में जीवन बीमा कंपनी स्थापित करने की घोषणा के बाद पूर्व वरिष्ठ बैंकरों, शिक्षकों और आर्थिक अधिकारियों ने केंद्र सरकार से अपील की है कि इस पहल का सबसे अधिक लाभ ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों तक पहुंचे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सहकारी क्षेत्र में एक जीवन बीमा कंपनी स्थापित करने की घोषणा के बाद विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे ग्रामीण विकास से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

एससीडी गवर्नमेंट कॉलेज के पूर्व छात्रों में शामिल पूर्व वरिष्ठ बैंकरों, शिक्षकों और आर्थिक अधिकारियों के एक समूह ने केंद्र सरकार से अपील की है कि प्रस्तावित बीमा कंपनी की योजनाएं इस प्रकार तैयार की जाएं कि उनका अधिकतम लाभ ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों और सहकारी संस्थाओं तक पहुंचे।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता देने की मांग

पूर्व बैंकर बृज भूषण गोयल ने कहा कि सहकारी क्षेत्र की मूल भावना सामूहिक भागीदारी और ग्रामीण विकास से जुड़ी रही है।

उन्होंने कहा कि नई जीवन बीमा कंपनी का उद्देश्य केवल बीमा सेवाओं का विस्तार नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे ग्रामीण समुदायों की आर्थिक सुरक्षा और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने का माध्यम भी बनाया जाना चाहिए।

1904 के सहकारी कानून का किया उल्लेख

बृज भूषण गोयल ने कहा कि भारत में सहकारी आंदोलन की शुरुआत वर्ष 1904 में को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटीज़ अधिनियम (Co-operative Credit Societies Act, 1904) के माध्यम से हुई थी।

उन्होंने बताया कि इस कानून का उद्देश्य किसानों को आपसी सहयोग, सामूहिक स्वामित्व और सस्ती वित्तीय सुविधाओं के जरिए आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था।

सहकारी मॉडल को और मजबूत करने पर जोर

पूर्व अधिकारियों का मानना है कि यदि प्रस्तावित जीवन बीमा कंपनी सहकारी सिद्धांतों के अनुरूप कार्य करती है, तो इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी और किसानों व आम लोगों को बेहतर वित्तीय सुरक्षा मिल सकेगी।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि योजना तैयार करते समय ग्रामीण जरूरतों और सहकारी संस्थाओं की भूमिका को प्राथमिकता दी जाए।


Key Highlights

  • अमित शाह ने सहकारी क्षेत्र में जीवन बीमा कंपनी स्थापित करने की घोषणा की।
  • पूर्व बैंक अधिकारियों और शिक्षाविदों ने केंद्र सरकार से ग्रामीण हितों को प्राथमिकता देने की अपील की।
  • नई बीमा कंपनी का लाभ किसानों और ग्रामीण समुदाय तक पहुंचाने की मांग की गई।
  • 1904 के सहकारी आंदोलन और उसके मूल उद्देश्य का उल्लेख किया गया।
  • सहकारी मॉडल के जरिए वित्तीय समावेशन को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

FAQ Section

Q1. यह अपील किस घोषणा के बाद की गई है?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सहकारी क्षेत्र में जीवन बीमा कंपनी स्थापित करने की घोषणा के बाद।

Q2. अपील किसने की है?

एससीडी गवर्नमेंट कॉलेज के पूर्व छात्रों में शामिल पूर्व वरिष्ठ बैंकरों, शिक्षकों और आर्थिक अधिकारियों के समूह ने यह अपील की है।

Q3. उनकी मुख्य मांग क्या है?

प्रस्तावित जीवन बीमा कंपनी का अधिकतम लाभ ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों और सहकारी संस्थाओं तक पहुंचाया जाए।

Q4. 1904 के सहकारी कानून का क्या महत्व है?

को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटीज़ अधिनियम, 1904 ने भारत में सहकारी आंदोलन की नींव रखी थी, जिसका उद्देश्य किसानों को सामूहिक सहयोग के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था।


Conclusion

सहकारी क्षेत्र में जीवन बीमा कंपनी स्थापित करने की प्रस्तावित पहल को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसकी नीतियां किसानों और ग्रामीण समुदाय की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं, तो यह वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान कर सकती है।Screenshot_67

Edited By: Karan Singh

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