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स्वर्ण मंदिर में श्रद्धा के साथ मनाया गया भाई तारू सिंह का शहीदी दिवस, युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश
एसजीपीसी की ओर से गुरमत समागम आयोजित, श्री अखंड पाठ साहिब के भोग, गुरबाणी कीर्तन और अरदास के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने श्री हरमंदिर साहिब परिसर में भाई तारू सिंह का शहीदी दिवस श्रद्धा और धार्मिक आस्था के साथ मनाया। गुरमत समागम में संगत को भाई तारू सिंह के साहस, त्याग और सिख सिद्धांतों के प्रति उनकी अटूट निष्ठा से प्रेरणा लेने का संदेश दिया गया।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ओर से भाई तारू सिंह का शहीदी दिवस श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) परिसर स्थित गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में धार्मिक श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित गुरमत समागम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और महान सिख शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की।
श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के साथ कार्यक्रम की शुरुआत
समागम की शुरुआत श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के साथ हुई। इसके बाद श्री हरमंदिर साहिब के हजूरी रागी भाई तेजिंदरपाल सिंह के जत्थे ने गुरबाणी कीर्तन प्रस्तुत कर संगत को आध्यात्मिक वातावरण से जोड़ा।
कार्यक्रम के दौरान भाई बलविंदर सिंह ने अरदास की, जबकि ग्रंथी ज्ञानी राजदीप सिंह ने श्री हरमंदिर साहिब से संगत के नाम हुकमनामा पढ़कर सुनाया।भाई तारू सिंह के बलिदान को किया याद
संगत को संबोधित करते हुए ग्रंथी ज्ञानी राजदीप सिंह ने भाई तारू सिंह के जीवन, उनके अद्वितीय साहस और सर्वोच्च बलिदान पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि भाई तारू सिंह ने अत्याचार के सामने झुकने के बजाय शहादत को स्वीकार किया और सिख धर्म के सिद्धांतों की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस, आस्था और अडिग विश्वास का प्रेरणास्रोत बना हुआ है।
युवाओं को सिख इतिहास से जुड़ने का संदेश
ज्ञानी राजदीप सिंह ने युवाओं से अपील की कि वे भाई तारू सिंह के जीवन और उनके आदर्शों से प्रेरणा लें। उन्होंने कहा कि सिख इतिहास में शहीदों के बलिदान समाज को सत्य, साहस और धार्मिक मूल्यों पर अडिग रहने की सीख देते हैं।
उन्होंने युवाओं से अपनी विरासत और सिख परंपराओं को समझने तथा उन्हें जीवन में अपनाने का आह्वान भी किया।
Key Highlights
- एसजीपीसी ने स्वर्ण मंदिर परिसर में भाई तारू सिंह का शहीदी दिवस मनाया।
- गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में गुरमत समागम आयोजित किया गया।
- श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के साथ धार्मिक कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
- हजूरी रागी भाई तेजिंदरपाल सिंह के जत्थे ने गुरबाणी कीर्तन प्रस्तुत किया।
- ज्ञानी राजदीप सिंह ने भाई तारू सिंह के साहस और बलिदान पर प्रकाश डाला।
- युवाओं से सिख शहीदों के आदर्शों को अपनाने की अपील की गई।
FAQ Section
Q1. भाई तारू सिंह का शहीदी दिवस कहां मनाया गया?
शहीदी दिवस श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) परिसर स्थित गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में मनाया गया।
Q2. कार्यक्रम का आयोजन किस संस्था ने किया?
इस धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने किया।
Q3. कार्यक्रम में कौन-कौन से धार्मिक आयोजन हुए?
श्री अखंड पाठ साहिब का भोग, गुरबाणी कीर्तन, अरदास और हुकमनामा का पाठ कार्यक्रम का हिस्सा रहे।
Q4. संगत को क्या संदेश दिया गया?
संगत, विशेषकर युवाओं से भाई तारू सिंह के साहस, त्याग और सिख सिद्धांतों के प्रति समर्पण से प्रेरणा लेने का संदेश दिया गया।
Conclusion
भाई तारू सिंह का शहीदी दिवस केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सिख इतिहास के अमर बलिदानों को स्मरण करने का अवसर भी है। एसजीपीसी द्वारा आयोजित इस गुरमत समागम ने संगत को शहीदों के आदर्शों और सिख मूल्यों से जुड़ने का संदेश दिया। विशेष रूप से युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर सत्य, साहस और धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया गया।

