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अमृतसर में कचरा ढोने वाली ट्रॉलियों से बढ़ा हादसों का खतरा, सड़कों पर खुले में फैल रहा कूड़ा
वैज्ञानिक वेस्ट मैनेजमेंट के दावों पर सवाल, बिना ढके कचरा ले जा रहे ट्रैक्टर-ट्रेलर; राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए बढ़ी परेशानी
अमृतसर की व्यस्त सड़कों पर खुले में कचरा ले जाने वाली ट्रॉलियां लोगों के लिए परेशानी और हादसे का खतरा बन रही हैं। स्थानीय लोगों ने नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
व्यस्त सड़कों पर खुले में ढोया जा रहा कचरा
अमृतसर की सड़कों पर पीक ऑवर के दौरान ट्रैफिक जाम के बीच कचरे से भरी ट्रॉलियों का दिखना आम हो गया है। कचरा ढोने वाले कई ट्रैक्टर-ट्रेलर बिना किसी कवर के सड़कों से गुजरते हैं, जिससे न केवल दुर्गंध फैलती है बल्कि सड़क पर कूड़ा गिरने की समस्या भी बढ़ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम की ओर से वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन किए जाने के दावों के बावजूद जमीनी स्थिति अलग नजर आती है। उनका आरोप है कि कचरा ढोने वाले वाहनों पर कूड़ा ढकने की सामान्य व्यवस्था तक ठीक से लागू नहीं हो रही।
चलते वाहनों से सड़क पर गिरता है कचरा
निवासियों के मुताबिक, कचरा लेकर निकलने वाली ट्रॉलियों के पीछे सड़कों पर कूड़े की एक लकीर नजर आती है। वाहनों के चलते प्लास्टिक, कागज और सूखे पत्ते सड़क पर गिरते रहते हैं।इससे शहर की सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। खासकर व्यस्त मार्गों पर कचरा बिखरने से वाहन चालकों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ता है।
दोपहिया और छोटे वाहनों के लिए बढ़ा जोखिम
कचरे से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में कई बार कचरा और पेड़ की निकली हुई शाखाएं बाहर तक निकली होती हैं। ये वाहन सड़क पर काफी जगह घेरते हैं, जिससे दोपहिया और छोटे वाहनों के लिए इनसे निकलना या इन्हें ओवरटेक करना मुश्किल हो जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पीक ऑवर के दौरान स्थिति और ज्यादा गंभीर हो जाती है। व्यस्त सड़कों पर बिना उचित कवर के ऐसे वाहनों को चलने की अनुमति देने पर हादसे की आशंका बनी रहती है।
पहले भी शिकायत कर चुके हैं स्थानीय लोग
निवासियों के अनुसार, खुले में कचरा ले जाने वाली ट्रॉलियों को लेकर पहले भी शिकायतें की जा चुकी हैं। लोगों ने नगर निगम से कम से कम कचरे को ढककर ले जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की थी, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
एक स्थानीय निवासी ने कहा कि वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन की बात तो दूर, संबंधित निकाय इन वाहनों में भरे कचरे को ढकने की व्यवस्था भी ठीक से नहीं कर पाया है।
लोगों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
राजबीर सिंह ने कहा कि पीक ऑवर में ऐसी ट्रॉलियों को ओवरटेक करना बेहद मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को उचित कवर के बिना ऐसे वाहनों को व्यस्त सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।
वरिष्ठ नागरिक जोगिंदर सिंह ने कहा कि एक तरफ लोगों से अपने आसपास सफाई रखने की अपील की जाती है, जबकि दूसरी तरफ शहर के बीच से खुले में कचरा ले जाया जा रहा है। उनके मुताबिक, ट्रॉली के अपने गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही काफी कचरा सड़क पर फैल जाता है।
Key Highlights:
- अमृतसर की व्यस्त सड़कों पर खुले में कचरा ले जाने वाली ट्रॉलियां परेशानी का कारण बनीं।
- कचरा ढोने वाले वाहनों से प्लास्टिक, कागज और सूखे पत्ते सड़क पर गिरने की शिकायत।
- बिना कवर वाली ट्रॉलियों से दुर्गंध और गंदगी बढ़ने का आरोप।
- बाहर निकली शाखाओं और कचरे के कारण दोपहिया व छोटे वाहनों के लिए खतरा।
- पीक ऑवर में इन वाहनों को ओवरटेक करना मुश्किल।
- स्थानीय लोगों ने नगर निगम से कचरा ढककर ले जाने की व्यवस्था लागू करने की मांग की।
- लोगों ने वैज्ञानिक वेस्ट मैनेजमेंट के दावों पर भी सवाल उठाए।
FAQ Section:
अमृतसर में कचरा ढोने वाली ट्रॉलियों को लेकर क्या समस्या है?
स्थानीय लोगों के अनुसार, कई ट्रैक्टर-ट्रेलर बिना कवर के कचरा लेकर व्यस्त सड़कों से गुजरते हैं, जिससे कचरा सड़क पर गिरता है और गंदगी फैलती है।
खुले में कचरा ले जाने से क्या खतरा है?
कचरे और बाहर निकली शाखाओं से वाहन सड़क पर अधिक जगह घेरते हैं, जिससे खासकर दोपहिया और छोटे वाहनों के लिए ओवरटेक करना मुश्किल और जोखिम भरा हो सकता है।
क्या लोगों ने पहले भी इसकी शिकायत की है?
हां, स्थानीय निवासियों के अनुसार उन्होंने पहले भी नगर निगम से कचरे को ढककर ले जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की थी।
स्थानीय लोगों की मुख्य मांग क्या है?
लोगों की मांग है कि कचरा ढोने वाले वाहनों को उचित तरीके से ढककर चलाया जाए और व्यस्त सड़कों पर खुले में कचरा ले जाने पर रोक लगाई जाए।
Conclusion:
अमृतसर में खुले में कचरा ढोने वाली ट्रॉलियों को लेकर स्थानीय लोगों की शिकायतें शहर की सफाई व्यवस्था के साथ-साथ सड़क सुरक्षा से भी जुड़ा मुद्दा सामने लाती हैं। लोगों का कहना है कि कचरा ढककर ले जाने की व्यवस्था लागू होने से न केवल सड़कों पर गंदगी कम होगी, बल्कि व्यस्त मार्गों पर वाहन चालकों के लिए जोखिम भी घटेगा।
