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जालंधर के 100 वर्षीय कुंदन सिंह मदान का प्रेरणादायक जीवन: बंटवारे से लेकर रेलवे सेवा तक का सफर
1 जुलाई 1926 को जन्मे पूर्व रेलकर्मी ने बताया लंबी उम्र का राज—सादा जीवन, शाकाहार और सकारात्मक सोच
जालंधर के रहने वाले 100 वर्षीय पूर्व रेलवे कर्मचारी कुंदन सिंह मदान 1 जुलाई को अपना शताब्दी जन्मदिन मना रहे हैं। उनका जीवन विभाजन की त्रासदी से लेकर सफल सेवा तक प्रेरणादायक रहा है।
बंटवारे की त्रासदी से शुरू हुआ जीवन का सफर
जालंधर निवासी और पूर्व रेलवे कर्मचारी कुंदन सिंह मदान बुधवार को अपना 100वां जन्मदिन मनाने जा रहे हैं। उनका जीवन संघर्ष, धैर्य और आत्मनिर्भरता की एक मिसाल माना जाता है। जन्म 1 जुलाई 1926 को लाहौर जिले के कासूर तहसील में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है।
विभाजन के दौरान उजड़ गया था घर
1947 के विभाजन के दौरान वे लाखों लोगों की तरह विस्थापित हुए और उन्हें अपना घर-बार छोड़कर भारत आना पड़ा। खाली हाथ आए मदान ने नए सिरे से जीवन की शुरुआत की और कठिन परिस्थितियों में खुद को स्थापित किया।
रेलवे में लंबी सेवा
31 अक्टूबर 1947 को उन्होंने रेलवे विभाग में नौकरी शुरू की और लगभग 37 वर्षों तक सेवा दी। 30 जून 1984 को वे सेवानिवृत्त हुए। वे मानते हैं कि रेलवे पेंशन ने उन्हें आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन दिया।सादगी ही लंबी उम्र का राज
100 वर्ष की उम्र में भी कुंदन सिंह मदान स्वस्थ जीवन का श्रेय सादा जीवन, शाकाहारी भोजन, नियमित सैर और सकारात्मक सोच को देते हैं। वे शराब और अन्य नशे से दूर रहने की सलाह भी देते हैं।
परिवार और जन्मदिन की तैयारी
मदान का विवाह 1948 में हुआ था और उनके दो बेटियां व तीन बेटे हैं, जो सभी अपने जीवन में स्थापित हैं। परिवार ने उनके 100वें जन्मदिन को खास बनाने की तैयारी की है, जिसमें करीबी रिश्तेदार और मित्र शामिल होंगे।
Key Highlights:
- जालंधर निवासी कुंदन सिंह मदान 100 वर्ष के हुए
- जन्म: 1 जुलाई 1926, कासूर (अब पाकिस्तान)
- 1947 विभाजन में विस्थापित
- 37 साल रेलवे सेवा, 1984 में रिटायर
- लंबी उम्र का राज: सादा जीवन और शाकाहार
- परिवार में 2 बेटियां और 3 बेटे
FAQ Section:
Q1: कुंदन सिंह मदान कौन हैं?
A: वे जालंधर के पूर्व रेलवे कर्मचारी हैं जो 100 वर्ष के हो रहे हैं।
Q2: उनका जन्म कब और कहां हुआ था?
A: 1 जुलाई 1926 को कासूर (लाहौर, अब पाकिस्तान) में।
Q3: उन्होंने कितने साल रेलवे में काम किया?
A: लगभग 37 वर्षों तक।
Q4: उनकी लंबी उम्र का राज क्या है?
A: सादा जीवन, शाकाहारी भोजन, नियमित सैर और सकारात्मक सोच।
Conclusion:
कुंदन सिंह मदान का जीवन संघर्ष और सफलता की एक प्रेरणादायक कहानी है। विभाजन की त्रासदी से लेकर रेलवे सेवा और आज के शतायु जीवन तक उनका सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत संदेश देता है कि सादगी और सकारात्मकता ही दीर्घ जीवन का आधार है।

