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अमृतसर में अंतरधार्मिक सेमिनार, जलवायु न्याय और शांति का संदेश
विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने मिलकर पर्यावरण संरक्षण और आपसी सौहार्द पर दिया जोर
अमृतसर में आयोजित एक अंतरधार्मिक सेमिनार में विभिन्न धर्मों के नेताओं ने जलवायु न्याय, शांति और आपसी समझ को बढ़ावा देने की अपील की।
पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और अन्य वैश्विक मुद्दों के बीच, जो विश्व शांति और जलवायु परिस्थितियों को प्रभावित कर रहे हैं, अमृतसर में लोगों ने एकजुट होकर अंतरधार्मिक सौहार्द, आपसी समझ, शांति बहाली और जलवायु न्याय की वकालत की।
जलवायु न्याय पर एक अंतरधार्मिक सेमिनार हाल ही में क्रिश्चियन इंस्टीट्यूट फॉर रिलिजियस स्टडीज (CIRS) और बैरिंग इंस्टीट्यूट ऑफ थियोलॉजी, बटाला द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (CNI) के अमृतसर डायसिस के बिशप द राइट रेवरेन्ड मनोज चरण के संरक्षण में आयोजित हुआ।
अपने मुख्य भाषण में मनोज चरण ने जलवायु न्याय के मुद्दे को तुरंत संबोधित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने लोगों से प्रकृति के प्रति संवेदनशील होने और “सृष्टि के संरक्षक” के रूप में अपनी भूमिका निभाने की अपील की, जिसका आधार उन्होंने बाइबिल की शिक्षाओं से लिया।
इस्लामिक विद्वान और अहमदिया मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि डॉ. तारिक अहमद ने जलवायु न्याय पर इस्लामी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कुरान की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी पर जोर दिया।
सुखवीर पंवान ने सिख धर्म से जुड़े विचार साझा किए, जबकि बैरिंग यूनियन क्रिश्चियन कॉलेज के नीरज शर्मा ने हिंदू दर्शन में पर्यावरणीय जिम्मेदारी की अवधारणा पर प्रकाश डाला।
CIRS के कार्यकारी निदेशक और बैरिंग इंस्टीट्यूट ऑफ थियोलॉजी के प्राचार्य डॉ. पुलक सामंतराय ने जलवायु न्याय को बढ़ावा देने में धार्मिक समुदायों की भूमिका को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में शामिल सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण की देखभाल करने, “सृष्टि के संरक्षक” के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाने और शांति व सामंजस्य की दिशा में मिलकर काम करने का संकल्प लिया।
