फरीदकोट में किसानों के आरोपों की जांच शुरू: 70 दिन के धरने के बाद बनी संयुक्त समिति, 113 शिकायतों पर होगी सुनवाई

PADB बैंक कर्मचारियों पर किसान शोषण के आरोपों की पड़ताल तेज, 10 दिनों में शिकायतों के निपटारे का लक्ष्य

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फरीदकोट में किसानों के 70 दिनों तक चले धरने के बाद सात सदस्यीय संयुक्त समिति ने बैंक कर्मचारियों पर लगे शोषण के आरोपों की जांच शुरू कर दी है। समिति 113 शिकायतों की सुनवाई कर समाधान निकालने का प्रयास करेगी।

70 दिन के आंदोलन के बाद जांच प्रक्रिया शुरू

पंजाब के फरीदकोट जिले में किसानों द्वारा प्राथमिक सहकारी कृषि विकास बैंक (PADB) के बाहर 70 दिनों तक किए गए धरने के बाद अब मामले की औपचारिक जांच शुरू हो गई है। किसानों द्वारा बैंक कर्मचारियों पर लगाए गए शोषण और अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए एक संयुक्त समिति का गठन किया गया है।

सात सदस्यीय समिति करेगी शिकायतों की सुनवाई

गठित समिति में कुल सात सदस्य शामिल हैं। इनमें किसान संगठन के दो प्रतिनिधि, PADB बैंक के तीन वरिष्ठ अधिकारी, जिला प्रशासन का एक प्रतिनिधि और पुलिस विभाग का एक सदस्य शामिल है।

समिति ने जांच के लिए सख्त समयसीमा तय की है। अगले 10 दिनों तक सुनवाई की जाएगी और प्रतिदिन लगभग 10 मामलों की समीक्षा कर शिकायतों का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। अब तक जिले में दर्ज 113 शिकायतों में से 26 किसानों की सीधे सुनवाई की जा चुकी है।

किसानों के आंदोलन की पृष्ठभूमि

दो किसान भाइयों की आत्महत्या के बाद भड़का आक्रोश

भारती किसान यूनियन (BKU) एकता सिद्धूपुर के नेतृत्व में यह आंदोलन शुरू हुआ था। आंदोलन की पृष्ठभूमि में 23 मार्च की एक दुखद घटना रही, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया।

हरि नौ गांव के दो किसान भाई, 38 वर्षीय जसकरण सिंह और 34 वर्षीय जसविंदर सिंह ने कथित तौर पर चलती ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली थी। दोनों भाई लगभग 25 लाख रुपये के कर्ज के बोझ तले दबे हुए थे।

किसान नेताओं का कहना है कि बैंक की इस घटना में प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी, लेकिन लगातार बढ़ते आर्थिक दबाव और कर्ज की चिंता ने दोनों भाइयों को यह कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया।

आंदोलन के दौरान सामने आईं 139 शिकायतें

30 मार्च से शुरू हुए आंदोलन के दौरान किसानों ने बड़ी संख्या में अपनी समस्याएं सामने रखीं। किसान यूनियन के ब्लॉक अध्यक्ष नायब सिंह के अनुसार, कुल 139 शिकायतें प्राप्त हुईं, लेकिन शुरुआती चरण में दर्ज 113 शिकायतों पर ही समिति विचार करेगी।

बैंक की कार्यप्रणाली पर किसानों के गंभीर आरोप

खाली हस्ताक्षरित चेक रखने का आरोप

प्रदर्शनकारी किसानों का आरोप है कि बैंक ऋण जारी करने से पहले किसानों से हस्ताक्षर किए हुए खाली चेक सुरक्षा के तौर पर अपने पास रखता है।

किसानों का कहना है कि बाद में इन चेकों का उपयोग कर उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करवाए जाते हैं और भूमि नीलामी जैसी कार्रवाई शुरू कर दी जाती है। किसान संगठनों की प्रमुख मांग है कि ऐसे सभी खाली चेक तुरंत किसानों को वापस किए जाएं।

समाधान की उम्मीद में किसान

संयुक्त समिति के गठन के बाद किसानों को उम्मीद है कि लंबे समय से लंबित शिकायतों का निष्पक्ष समाधान होगा और बैंकिंग प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।


Key Highlights:

  • फरीदकोट में 70 दिन के किसान धरने के बाद जांच शुरू।
  • PADB बैंक कर्मचारियों पर शोषण के आरोपों की पड़ताल होगी।
  • सात सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन।
  • 10 दिनों में 113 शिकायतों की सुनवाई का लक्ष्य।
  • अब तक 26 किसानों की सीधे सुनवाई की जा चुकी।
  • किसानों ने बैंक पर खाली हस्ताक्षरित चेक रखने का आरोप लगाया।
  • दो किसान भाइयों की आत्महत्या के बाद आंदोलन ने जोर पकड़ा।

FAQ Section:

Q1: फरीदकोट में किसानों का आंदोलन क्यों शुरू हुआ था?

किसानों ने PADB बैंक कर्मचारियों पर शोषण और अनुचित बैंकिंग प्रथाओं के आरोप लगाते हुए आंदोलन शुरू किया था।

Q2: जांच के लिए कितने सदस्यों की समिति बनाई गई है?

मामले की जांच के लिए सात सदस्यीय संयुक्त समिति गठित की गई है।

Q3: समिति कितनी शिकायतों की जांच करेगी?

समिति शुरुआती चरण में दर्ज 113 शिकायतों की सुनवाई करेगी।

Q4: किसानों की मुख्य मांग क्या है?

किसानों की प्रमुख मांग बैंक द्वारा रखे गए हस्ताक्षरित खाली चेकों की वापसी और कथित शोषण की निष्पक्ष जांच है।

Q5: आंदोलन की शुरुआत किस घटना के बाद हुई?

मार्च में कर्ज के बोझ से परेशान दो किसान भाइयों की आत्महत्या के बाद आंदोलन ने व्यापक रूप ले लिया था।


Conclusion:

फरीदकोट में किसानों और बैंक के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद के समाधान की दिशा में संयुक्त समिति का गठन एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में शिकायतों की सुनवाई और जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि किसानों के आरोपों में कितनी सच्चाई है और उनके हितों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।Screenshot_2316

Edited By: Karan Singh

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