जालंधर के विराज शर्मा ने रचा इतिहास, अंडर-17 बैडमिंटन रैंकिंग में बने भारत के नंबर-1 खिलाड़ी

दस साल की मेहनत लाई रंग, छह साल की उम्र में शुरू किया था बैडमिंटन खेलना; अब बेंगलुरु की प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी में ले रहे प्रशिक्षण

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जालंधर के युवा बैडमिंटन खिलाड़ी विराज शर्मा ने अंडर-17 लड़कों की राष्ट्रीय रैंकिंग में पहला स्थान हासिल किया है। करीब एक दशक की मेहनत के बाद मिली इस उपलब्धि के पीछे उनके माता-पिता का सहयोग, कोच की मेहनत और लगातार अभ्यास की अहम भूमिका रही है।

पंजाब के जालंधर के युवा बैडमिंटन खिलाड़ी विराज शर्मा ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत की ताजा अंडर-17 लड़कों की बैडमिंटन रैंकिंग में विराज ने नंबर-1 स्थान हासिल किया है। करीब दस साल की मेहनत के बाद मिली इस सफलता से उनके परिवार और खेल जगत में खुशी का माहौल है।

विराज ने महज छह साल की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू किया था। शुरुआती दिनों से ही उन्होंने नियमित अभ्यास और अनुशासन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। आज उनकी यही मेहनत उन्हें देश के शीर्ष युवा खिलाड़ियों में शामिल कर रही है।

राष्ट्रीय चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर आए थे चर्चा में

विराज शर्मा ने पिछले साल दिसंबर में भुवनेश्वर में आयोजित 37वीं सब-जूनियर राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप के अंडर-17 सिंगल्स फाइनल में नाभा के जगशेर खंगूरा के खिलाफ मुकाबला खेलते हुए सिल्वर मेडल जीता था।

इस प्रदर्शन के बाद विराज को आगे बढ़ने का बड़ा अवसर मिला। उन्हें इन्फोसिस फाउंडेशन ने चुना, जिसके बाद वह बेंगलुरु स्थित प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे हैं। इससे पहले वह नोएडा के राइज स्पोर्ट्स स्कूल में कोचिंग हासिल कर रहे थे।

सुबह 4 बजे उठकर करते थे अभ्यास

विराज की सफलता के पीछे उनके माता-पिता राहुल शर्मा और संजीता शर्मा का भी बड़ा योगदान रहा है। बेटे की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए उन्होंने कहा कि यह उनके लिए बेहद खास दिन है।

माता-पिता के मुताबिक, विराज जब सिर्फ छह साल के थे, तभी उन्होंने बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था। वह रोज सुबह चार बजे उठकर अभ्यास के लिए जाते थे। परिवार को उनकी ट्रेनिंग, स्कूल और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों के बीच लगातार तालमेल बैठाना पड़ता था।

बेटे के सपने को पूरा करने के लिए माता-पिता ने उसके अभ्यास और पढ़ाई के कार्यक्रम के अनुसार अपनी दिनचर्या भी ढाली। उनका कहना है कि इस लंबे सफर में परिवार ने हर कदम पर विराज का साथ दिया।

कोच परवीन कुमार ने मजबूत की नींव

विराज के शुरुआती प्रशिक्षण में कोच परवीन कुमार की अहम भूमिका रही। उन्होंने डीएवी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी की अकादमी में विराज को शुरुआती वर्षों में प्रशिक्षण दिया।

जब विराज 11 साल के हुए, तो परिवार ने उन्हें अधिक पेशेवर प्रशिक्षण दिलाने के लिए नोएडा की अकादमी भेजने का फैसला किया। इसके बाद उनका सफर आगे बढ़ता गया और अब वह बेंगलुरु की प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी में ट्रेनिंग ले रहे हैं।

मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग की मिसाल

विराज शर्मा की उपलब्धि युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है। छोटी उम्र में खेल शुरू करने से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने और अब अंडर-17 रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल करने तक का उनका सफर निरंतर अभ्यास, सही मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग की अहमियत दिखाता है।

जालंधर के इस खिलाड़ी की सफलता से उम्मीद है कि वह आने वाले समय में भी अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाते हुए भारतीय बैडमिंटन में नई उपलब्धियां हासिल करेंगे।

Key Highlights

  • जालंधर के विराज शर्मा भारत की अंडर-17 लड़कों की बैडमिंटन रैंकिंग में नंबर-1 बने।

  • छह साल की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू किया।

  • 37वीं सब-जूनियर राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप में अंडर-17 सिंगल्स का सिल्वर मेडल जीता।

  • दिसंबर में भुवनेश्वर में आयोजित चैंपियनशिप के बाद इन्फोसिस फाउंडेशन ने चुना।

  • फिलहाल बेंगलुरु की प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे हैं।

  • शुरुआती वर्षों में कोच परवीन कुमार ने प्रशिक्षण दिया।

  • बेहतर प्रशिक्षण के लिए 11 साल की उम्र में नोएडा भेजे गए।

FAQ

1. विराज शर्मा ने कौन-सी उपलब्धि हासिल की है?

विराज शर्मा ने भारत की ताजा अंडर-17 लड़कों की बैडमिंटन रैंकिंग में नंबर-1 स्थान हासिल किया है।

2. विराज शर्मा कहां के रहने वाले हैं?

विराज शर्मा पंजाब के जालंधर से हैं।

3. विराज शर्मा ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में कौन-सा पदक जीता था?

उन्होंने पिछले साल दिसंबर में भुवनेश्वर में आयोजित 37वीं सब-जूनियर राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप के अंडर-17 सिंगल्स फाइनल में सिल्वर मेडल जीता था।

4. विराज शर्मा फिलहाल कहां प्रशिक्षण ले रहे हैं?

वह बेंगलुरु स्थित प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे हैं।

5. विराज शर्मा के शुरुआती कोच कौन थे?

विराज को शुरुआती वर्षों में डीएवी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी की अकादमी में कोच परवीन कुमार ने प्रशिक्षण दिया था।

Conclusion

जालंधर के विराज शर्मा ने साबित किया है कि लगातार मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। छह साल की उम्र से शुरू हुआ उनका बैडमिंटन सफर अब राष्ट्रीय अंडर-17 रैंकिंग में नंबर-1 स्थान तक पहुंच गया है। युवा खिलाड़ी की यह उपलब्धि पंजाब के खेल जगत के लिए गर्व की बात है।Screenshot_110

Edited By: Atul Sharma

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