पंजाब सरकार की बंद फैक्ट्री की 106 एकड़ जमीन का पता चला, प्रिमो के कब्जे में मिली 72 कनाल भूमि

नंगल में PNFC की जमीन को लेकर राजस्व विभाग की जांच में खुलासा, 2025 में आधिकारिक रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर सामने आने के बाद शुरू हुई थी पड़ताल

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पंजाब के नंगल में बंद सरकारी औद्योगिक इकाई पंजाब नेशनल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (PNFC) की लापता बताई जा रही 106 एकड़ जमीन का पता चल गया है। राजस्व अधिकारियों की जांच के मुताबिक, करीब 72 कनाल जमीन प्रिमो केमिकल्स के कब्जे में पाई गई। इस मामले में राजस्व रिकॉर्ड और जमीन की वास्तविक स्थिति का मिलान किया गया है।

पंजाब के नंगल में राज्य सरकार की बंद औद्योगिक इकाई पंजाब नेशनल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (PNFC) की जमीन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। लंबे समय से रिकॉर्ड में विसंगतियों के कारण चर्चा में रही करीब 106 एकड़ जमीन का पता लगाने में राजस्व विभाग को सफलता मिली है।

रिपोर्ट के अनुसार, नंगल के एसडीएम सचिन पाठक के नेतृत्व में राजस्व अधिकारियों ने जमीन के रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद स्थिति की जांच की। दस्तावेजों के मुताबिक, लापता बताई जा रही जमीन का लगभग 72 कनाल हिस्सा प्रिमो केमिकल्स के कब्जे में पाया गया। इस कंपनी को पहले पंजाब एल्कलीज एंड केमिकल्स लिमिटेड (PACL) के नाम से जाना जाता था।

2025 में सामने आया था जमीन के रिकॉर्ड में अंतर

PNFC की जमीन का मामला वर्ष 2025 में प्रमुखता से सामने आया था। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त आधिकारिक परिसमापक (Official Liquidator) ने अलग-अलग वर्षों के जमाबंदी रिकॉर्ड और मौके पर उपलब्ध जमीन के बीच अंतर की ओर ध्यान दिलाया था।

22 मार्च 2025 को लिखे पत्र में परिसमापक ने नंगल के एसडीएम से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था। पत्र में कहा गया था कि वर्ष 2008-09 की जमाबंदी में दर्ज कंपनी की जमीन और बाद के राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज भूमि का हिसाब मेल नहीं खा रहा था।

इस विसंगति के कारण लगभग 15.25 एकड़ जमीन की कमी का सवाल उठा था। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा सरकारी दरों पर इस जमीन का मूल्य प्रति एकड़ 3 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है।

राजस्व अधिकारियों ने किया जमीन का संयुक्त सर्वे

छह सदस्यीय समिति ने की पैमाइश

नंगल के तहसीलदार सुमित सिंह ढिल्लों की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति ने 15 सितंबर को संयुक्त निरीक्षण और जमीन की पैमाइश की। इसके बाद एसडीएम सचिन पाठक ने 17 सितंबर को आधिकारिक परिसमापक को रिपोर्ट सौंपी।

रिपोर्ट में राजमार्ग परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन और गांवों के राजस्व रिकॉर्ड में विसंगतियों को ध्यान में रखते हुए PNFC की भूमि का हिसाब प्रस्तुत किया गया।

सरकारी रिकॉर्ड में कितनी जमीन दर्ज है?

रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब सरकार ने मूल रूप से अजोली और मैदा माजरा गांवों में PNFC को 891 कनाल और 18 मरला जमीन हस्तांतरित की थी। यह कुल 111.48 राजस्व एकड़ के बराबर बताई गई है।

इसमें से केंद्र सरकार ने NH-503 पर अजोली मोड़ के पास रोड ओवरब्रिज के निर्माण के लिए 36 कनाल और 15 मरला जमीन अधिग्रहित की थी।

अधिग्रहित भूमि का हिसाब लगाने के बाद कंपनी की जमीन का रिकॉर्ड दोबारा निर्धारित किया गया।

फैक्ट्री की चारदीवारी के अंदर और बाहर मिली जमीन

ताजा सर्वे में सामने आया कि PNFC की जमीन का एक बड़ा हिस्सा फैक्ट्री की चारदीवारी के भीतर है, जबकि कुछ भूमि दीवार के बाहर दो अलग-अलग पट्टियों में स्थित है।

  • चारदीवारी के भीतर: 780 कनाल और 13 मरला जमीन, जो लगभग 97.41 एकड़ के बराबर है।

  • चारदीवारी के बाहर: 74 कनाल और 10 मरला जमीन, जो लगभग 9.31 एकड़ बताई गई है।

  • पूर्वी पट्टी: 36 कनाल और 5 मरला जमीन, जो फैक्ट्री की दीवार और नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड के बिजली के खंभों के बीच स्थित है।

  • पश्चिमी पट्टी: 38 कनाल और 5 मरला जमीन, जो फैक्ट्री की दीवार और आसपास के औद्योगिक प्लॉटों के परिसर के बीच है। इस हिस्से में प्रिमो केमिकल्स लिमिटेड द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला संपर्क मार्ग भी शामिल है।

प्रिमो केमिकल्स के कब्जे में मिली जमीन का मामला

राजस्व अधिकारियों के दस्तावेजों के अनुसार, लापता बताई जा रही जमीन का करीब 72 कनाल हिस्सा प्रिमो केमिकल्स के कब्जे में पाया गया। कंपनी का पुराना नाम पंजाब एल्कलीज एंड केमिकल्स लिमिटेड (PACL) था।

रिपोर्ट में बताया गया है कि PACL इकाई को पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बेचा गया था और नए प्रबंधन ने इसका नाम बदलकर प्रिमो केमिकल्स कर दिया।

अब इस मामले में जमीन के स्वामित्व, कब्जे और राजस्व रिकॉर्ड के बीच संबंध को समझना महत्वपूर्ण होगा। किसी जमीन का किसी कंपनी के कब्जे में पाया जाना अपने आप में अवैध कब्जे का अंतिम प्रमाण नहीं है। इसके लिए संबंधित दस्तावेजों और कानूनी स्थिति की जांच जरूरी है।

Key Highlights

  • नंगल में पंजाब सरकार की बंद औद्योगिक इकाई PNFC की जमीन का पता लगाया गया।

  • राजस्व अधिकारियों के अनुसार, करीब 72 कनाल जमीन प्रिमो केमिकल्स के कब्जे में मिली।

  • जमीन के रिकॉर्ड में विसंगतियां वर्ष 2025 में सामने आई थीं।

  • छह सदस्यीय समिति ने 15 सितंबर को संयुक्त सर्वे किया।

  • एसडीएम सचिन पाठक ने 17 सितंबर को आधिकारिक परिसमापक को रिपोर्ट सौंपी।

  • फैक्ट्री की चारदीवारी के भीतर लगभग 97.41 एकड़ जमीन दर्ज की गई।

  • करीब 9.31 एकड़ जमीन चारदीवारी के बाहर दो अलग-अलग पट्टियों में मिली।

  • रिपोर्ट के अनुसार, जमीन का मूल्य मौजूदा सरकारी दरों पर प्रति एकड़ 3 करोड़ रुपये से अधिक है।

FAQ Section

1. PNFC क्या है?

PNFC का पूरा नाम पंजाब नेशनल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड है। यह पंजाब सरकार की एक बंद औद्योगिक इकाई है, जिसकी जमीन को लेकर राजस्व रिकॉर्ड में विसंगतियां सामने आई थीं।

2. PNFC की जमीन कहां स्थित है?

रिपोर्ट के अनुसार, जमीन पंजाब के नंगल क्षेत्र के अजोली और मैदा माजरा गांवों में स्थित है।

3. PNFC की जमीन का पता कैसे चला?

नंगल के एसडीएम सचिन पाठक के नेतृत्व में राजस्व अधिकारियों ने रिकॉर्ड की जांच की। तहसीलदार सुमित सिंह ढिल्लों की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति ने संयुक्त निरीक्षण और पैमाइश भी की।

4. प्रिमो केमिकल्स का पुराना नाम क्या था?

प्रिमो केमिकल्स को पहले पंजाब एल्कलीज एंड केमिकल्स लिमिटेड (PACL) के नाम से जाना जाता था।

5. फैक्ट्री की चारदीवारी के बाहर कितनी जमीन मिली?

सर्वे के अनुसार, 74 कनाल और 10 मरला जमीन चारदीवारी के बाहर दो अलग-अलग पट्टियों में स्थित है, जो लगभग 9.31 एकड़ के बराबर है।

6. PNFC की जमीन की कीमत कितनी बताई गई है?

रिपोर्ट में संबंधित जमीन की मौजूदा सरकारी दर 3 करोड़ रुपये प्रति एकड़ से अधिक बताई गई है। कुल जमीन के मूल्य का सटीक आकलन संबंधित भूमि के वर्गीकरण और लागू दरों पर निर्भर करेगा।

Conclusion

नंगल में PNFC की जमीन को लेकर हुई जांच ने वर्षों से चले आ रहे राजस्व रिकॉर्ड के विवाद पर नई जानकारी सामने रखी है। संयुक्त सर्वे के बाद फैक्ट्री की चारदीवारी के भीतर और बाहर मौजूद जमीन का विवरण तैयार किया गया तथा करीब 72 कनाल भूमि प्रिमो केमिकल्स के कब्जे में पाए जाने की बात सामने आई। अब इस मामले में जमीन के स्वामित्व, कब्जे और रिकॉर्ड से जुड़ी विसंगतियों का आधिकारिक व कानूनी स्तर पर समाधान महत्वपूर्ण होगा।Screenshot_102

Edited By: Atul Sharma

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