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नंगे पांव दौड़ने से खेलो इंडिया कोच बनने तक, नेहा की संघर्ष से सफलता तक की कहानी
23 साल की उम्र में खेल कॉलेज में कोच बनीं 400 मीटर हर्डलर नेहा, कभी यहीं से शुरू हुआ था सफर
कठिन हालात में पली-बढ़ी 23 वर्षीय एथलीट नेहा ने संघर्ष और मेहनत के बल पर नई पहचान बनाई है। 400 मीटर हर्डलर नेहा अब उसी खेल कॉलेज में खेलो इंडिया कोच बनी हैं, जहां से उनके खेल जीवन की शुरुआत हुई थी।
महज 23 वर्ष की उम्र में नेहा की जीवन यात्रा संघर्ष से उम्मीद तक की एक प्रेरक मिसाल बन गई है। एक फैक्ट्री फोरमैन की बेटी और 400 मीटर हर्डलर नेहा ने अब उसी खेल कॉलेज में खेलो इंडिया कोच के रूप में जिम्मेदारी संभाली है, जहां से उनके खेल करियर की नींव रखी गई थी।
नेहा ने 20 जनवरी को औपचारिक रूप से कोच के रूप में कार्यभार संभाला। इससे कुछ महीने पहले, नवंबर 2025 में, उन्होंने खेलो इंडिया गेम्स में 400 मीटर रिले दौड़ में रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था।
नेहा की शुरुआती दिनों को याद करते हुए आदर्श नगर स्थित गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल की शारीरिक शिक्षा अध्यापिका शरणदीप कौर ने बताया,
“जब नेहा ने दौड़ना शुरू किया था, तब उसके पास सही जूते तक नहीं थे और वह नंगे पांव दौड़ती थी। आज उसे इस मुकाम पर देखकर जो खुशी है, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।”
शरणदीप कौर ही नेहा को खेल कॉलेज लेकर गई थीं, जहां उनकी मुलाकात खेल विभाग के एथलेटिक्स कोच सुनील कंबोज से हुई। यही मुलाकात नेहा के जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। बीते सात वर्षों से नेहा, कोच सुनील कंबोज के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेती रही हैं। नेहा का कहना है कि वह अपने कोच के एहसान को कभी चुका नहीं सकती।
नेहा ने द ट्रिब्यून से बातचीत में कहा,
“मैंने गरीबी देखी है। वे यादें आज भी मन में लौट आती हैं। लेकिन अब मैं ज़िंदगी में बहुत आगे बढ़ चुकी हूं। अब मैं सिर्फ आभार महसूस करती हूं।”
साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाली नेहा ने अपने परिवार के संघर्षों को बेहद करीब से देखा है। उनकी मां पहले घरेलू सहायिका के रूप में काम करती थीं और अब एक फैक्ट्री में फुटबॉल सिलाई का काम करती हैं। इन तमाम मुश्किलों के बावजूद, नेहा कहती हैं कि माता-पिता का गर्व ही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
“मेरे माता-पिता मुझ पर गर्व करते हैं और यही मेरी सबसे बड़ी खुशी है,” नेहा ने कहा।
“मैंने आर्थिक तंगी देखी है, लेकिन आज मैं यहां तक पहुंची हूं। अब मैंने कमाना भी शुरू कर दिया है।”
नेहा की कहानी यह साबित करती है कि कठिन हालात, अगर मजबूत इरादों और सही मार्गदर्शन से मिल जाएं, तो सफलता की राह कभी नहीं रोक सकते।
