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आप नेता सतविंदरपाल सिंह उर्फ लकी ओबेरॉय की हत्या से जालंधर में दहशत
गुरुद्वारा सिंह सभा के बाहर दिनदहाड़े फायरिंग, छात्र यूनियन अध्यक्ष की नियुक्ति बना हत्या की वजह
जालंधर के मॉडल टाउन इलाके में आम आदमी पार्टी के नेता सतविंदरपाल सिंह उर्फ लकी ओबेरॉय की शुक्रवार सुबह गोली मारकर हत्या कर दी गई। गुरुद्वारे के बाहर हुई इस वारदात से शहर में दहशत फैल गई। प्रारंभिक जांच में हत्या का कारण कॉलेज में छात्र यूनियन अध्यक्ष की नियुक्ति से जुड़ा विवाद बताया जा रहा है।
जालंधर के मॉडल टाउन इलाके में शुक्रवार सुबह आम आदमी पार्टी के नेता सतविंदरपाल सिंह उर्फ लकी ओबेरॉय (41) की गोली मारकर हत्या किए जाने से इलाके में दहशत फैल गई। यह सनसनीखेज वारदात गुरुद्वारा सिंह सभा के बाहर सुबह करीब 7:36 बजे हुई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लकी ओबेरॉय अपनी थार गाड़ी में सवार थे, तभी स्कूटर पर आए एक युवक ने पार्किंग एरिया में पास से उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। ओबेरॉय की थार गाड़ी गोलियों से छलनी हो गई। घटना के समय गुरुद्वारे के भीतर एक शादी समारोह चल रहा था, जिससे वहां मौजूद परिवारों में अफरा-तफरी और भय का माहौल बन गया।
दोपहर तक जब हत्या के पीछे की वजह सामने आई, तो पता चला कि यह विवाद लायलपुर खालसा कॉलेज में छात्र यूनियन अध्यक्ष की हालिया नियुक्ति से जुड़ा था। यह नियुक्ति कथित तौर पर लकी ओबेरॉय द्वारा की गई थी, जिससे तनाव बढ़ा और अंततः यह विवाद हत्या में तब्दील हो गया।
यह पहली ऐसी घटना नहीं है। इससे पहले 21 दिसंबर को अलावलपुर के पास एक पेट्रोल पंप पर सेंट सोल्जर कॉलेज, जालंधर के 20–25 छात्रों पर छात्र यूनियन अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर हुए विवाद में फायरिंग की गई थी। उस मामले में पुलिस ने उसी दिन मुठभेड़ के बाद मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।
इस बीच, पंजाब यूथ कांग्रेस के सचिव अंगद दत्ता ने इस हत्या के लिए सरकार को नैतिक, प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि यह घटना पहले से आशंकित थी और यदि समय रहते प्रशासन ने चेतावनियों पर ध्यान दिया होता तो इसे रोका जा सकता था।
अंगद दत्ता ने बताया कि 22 दिसंबर को उन्होंने जालंधर के डिप्टी कमिश्नर को अवैध ‘प्रेसिडेंटशिप’ संस्कृति, हथियारबंद युवा समूहों और समानांतर सत्ता केंद्रों के बढ़ते खतरे को लेकर आगाह किया था और तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।
उन्होंने कहा,
“मैंने प्रशासन को चेताया था कि यदि इन गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक नहीं लगी, तो जालंधर हिंसक टकराव की ओर बढ़ जाएगा। आज हम उसके नतीजे देख रहे हैं।”
