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NIT जालंधर की टीम ने मॉस्को में जीता ब्रॉन्ज मेडल, अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग चैंपियनशिप में बढ़ाया भारत का मान
BRICS और CIS देशों की CASE-IN प्रतियोगिता में NIT जालंधर टीम को तीसरा स्थान, टिकाऊ निर्माण तकनीक पर पेश किया मॉडल
डॉ. बीआर अंबेडकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) जालंधर की टीम ने मॉस्को में आयोजित अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग चैंपियनशिप CASE-IN में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत को गौरवान्वित किया। टीम ने जियोपॉलीमर कंक्रीट पर आधारित टिकाऊ निर्माण समाधान प्रस्तुत किया।
NIT जालंधर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि
Dr BR Ambedkar National Institute of Technology Jalandhar की टीम ने रूस की राजधानी मॉस्को में आयोजित अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग चैंपियनशिप CASE-IN में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत को गौरवान्वित किया है।
यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता BRICS और CIS देशों के बीच आयोजित की गई थी, जिसमें दुनिया भर की चयनित टीमों ने हिस्सा लिया।
भारतीय टीम ने हासिल किया तीसरा स्थान
भारतीय टीम “Pioneers in Sustainable and Innovative Construction Materials” नाम से प्रतियोगिता में शामिल हुई थी।टीम में शामिल सदस्य थे:
- डॉ. कनिष कपूर
- तेजिंदरपाल सिंह
- परमवीर सिंह
- अंशुल शर्मा
NIT जालंधर की टीम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच तीसरा स्थान हासिल कर भारत के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता।
ऑनलाइन राउंड में टॉप कर बनाई जगह
प्रतियोगिता के प्रारंभिक ऑनलाइन चरण में देशभर के कई प्रतिष्ठित संस्थानों की टीमों ने हिस्सा लिया था, जिनमें विभिन्न IITs और NITs शामिल थे।
NIT जालंधर की टीम ने भारतीय टीमों में शीर्ष प्रदर्शन करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर हासिल किया।
जियोपॉलीमर कंक्रीट पर आधारित था प्रोजेक्ट
टीम की केस स्टडी और प्रस्तुति “आधुनिक निर्माण में जियोपॉलीमर कंक्रीट के टिकाऊ और बड़े पैमाने पर उपयोग” पर आधारित थी।
प्रस्तावित समाधान में पारंपरिक सीमेंट आधारित कंक्रीट के विकल्प के रूप में जियोपॉलीमर कंक्रीट को अपनाने की रणनीति प्रस्तुत की गई।
पर्यावरण संरक्षण पर दिया जोर
प्रतियोगिता के दौरान टीम ने बताया कि पारंपरिक पोर्टलैंड सीमेंट के निर्माण से वैश्विक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन का लगभग 7 प्रतिशत हिस्सा पैदा होता है।
टीम ने इसे जलवायु परिवर्तन का बड़ा कारण बताते हुए अधिक पर्यावरण-अनुकूल निर्माण तकनीक अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
औद्योगिक और कृषि अपशिष्ट के उपयोग का मॉडल
टीम ने अपने मॉडल में सीमेंट को पूरी तरह हटाकर फ्लाई ऐश, GGBS, राइस स्ट्रॉ ऐश और अन्य औद्योगिक व कृषि अपशिष्ट सामग्री के उपयोग का प्रस्ताव रखा।
इस तकनीक को टिकाऊ, पर्यावरण हितैषी और भविष्य की निर्माण आवश्यकताओं के लिए बेहतर विकल्प बताया गया।
Key Highlights:
- NIT जालंधर की टीम ने मॉस्को में जीता ब्रॉन्ज मेडल
- CASE-IN अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व
- BRICS और CIS देशों के बीच आयोजित हुई प्रतियोगिता
- जियोपॉलीमर कंक्रीट पर आधारित प्रस्तुति
- पर्यावरण-अनुकूल निर्माण तकनीक पर जोर
- IITs और NITs को पीछे छोड़कर बनाई जगह
FAQ Section:
Q1. NIT जालंधर की टीम ने कौन-सा पुरस्कार जीता?
टीम ने CASE-IN अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
Q2. प्रतियोगिता कहां आयोजित हुई?
यह प्रतियोगिता मॉस्को, रूस में आयोजित की गई।
Q3. टीम का मुख्य प्रोजेक्ट क्या था?
टीम ने जियोपॉलीमर कंक्रीट के टिकाऊ उपयोग पर आधारित मॉडल प्रस्तुत किया।
Q4. टीम में कौन-कौन शामिल थे?
डॉ. कनिष कपूर, तेजिंदरपाल सिंह, परमवीर सिंह और अंशुल शर्मा टीम का हिस्सा थे।
Q5. जियोपॉलीमर कंक्रीट क्यों महत्वपूर्ण है?
यह पारंपरिक सीमेंट की तुलना में अधिक पर्यावरण-अनुकूल और कम कार्बन उत्सर्जन वाली तकनीक मानी जाती है।
Conclusion:
NIT जालंधर की यह उपलब्धि भारतीय तकनीकी शिक्षा और नवाचार की वैश्विक स्तर पर बढ़ती पहचान को दर्शाती है। टिकाऊ निर्माण तकनीकों पर आधारित यह सफलता पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भारत की मजबूत उपस्थिति का संकेत है।

