होशियारपुर में कॉर्नियल ब्लाइंडनेस मरीजों की पहचान के लिए आगे आया रोटरी आई बैंक, स्वास्थ्य विभाग से मांगी सूची

जरूरतमंद मरीजों को समय पर कॉर्निया ट्रांसप्लांट उपलब्ध कराने की पहल, अब तक 4,165 लोगों की लौटाई जा चुकी है रोशनी

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होशियारपुर में रोटरी आई बैंक एंड कॉर्नियल ट्रांसप्लांटेशन सोसाइटी ने स्वास्थ्य विभाग से कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से पीड़ित मरीजों की सूची उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि जरूरतमंदों का समय पर इलाज और कॉर्निया प्रत्यारोपण कराया जा सके।

कॉर्नियल ब्लाइंडनेस मरीजों की मदद के लिए नई पहल

होशियारपुर में रोटरी आई बैंक एंड कॉर्नियल ट्रांसप्लांटेशन सोसाइटी ने कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से पीड़ित मरीजों के इलाज को लेकर महत्वपूर्ण पहल की है। संस्था के पदाधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग से जिले के ऐसे मरीजों की सूची उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है, ताकि उन्हें समय रहते उपचार और कॉर्निया ट्रांसप्लांट की सुविधा मिल सके।

इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संस्था के अध्यक्ष जेबी बहल और चेयरमैन एवं समाजसेवी संजीव अरोड़ा ने किया।


सिविल सर्जन से की विशेष बैठक

संस्था के प्रतिनिधियों ने सिविल सर्जन डॉ. मनदीप कमल से मुलाकात कर जिले में कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से पीड़ित मरीजों की पहचान और इलाज को लेकर चर्चा की।

बैठक के दौरान संस्था ने कहा कि जागरूकता की कमी और सही पहचान न होने के कारण कई मरीज अब भी दृष्टि से वंचित हैं।


अस्पतालों से मरीजों की जानकारी साझा करने की मांग

संस्था ने सिविल सर्जन से अनुरोध किया कि जिले के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को निर्देश जारी किए जाएं ताकि वे कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से पीड़ित मरीजों की जानकारी सिविल सर्जन कार्यालय के साथ साझा करें।

संस्था का कहना है कि इससे जरूरतमंद मरीजों तक समय पर इलाज पहुंच सकेगा और कोई भी मरीज उपचार से वंचित नहीं रहेगा।


अब तक 4,165 लोगों को मिला नया जीवन

समाजसेवी संजीव अरोड़ा ने बताया कि रोटरी आई बैंक अब तक 4,165 दृष्टिबाधित लोगों के कॉर्निया ट्रांसप्लांट में मदद कर चुका है।

उन्होंने कहा कि इनमें छह महीने से लेकर आठ साल तक के बच्चे भी शामिल हैं, जिनकी आंखों की रोशनी वापस लाई गई है।


देशभर के अस्पतालों से कर रहे समन्वय

संस्था ने बताया कि अधिक से अधिक मरीजों को इलाज उपलब्ध कराने के लिए देशभर के आई बैंक और अस्पतालों के साथ समन्वय किया जा रहा है।

इस पहल का उद्देश्य कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से पीड़ित लोगों को बेहतर और समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।


Key Highlights:

  • रोटरी आई बैंक ने स्वास्थ्य विभाग से मांगी मरीजों की सूची
  • कॉर्नियल ब्लाइंडनेस मरीजों के इलाज पर फोकस
  • सरकारी और निजी अस्पतालों से जानकारी साझा करने की मांग
  • अब तक 4,165 लोगों की आंखों की रोशनी लौटाई गई
  • छोटे बच्चों के भी सफल कॉर्निया ट्रांसप्लांट किए गए
  • देशभर के अस्पतालों के साथ समन्वय जारी

FAQ Section:

Q1. रोटरी आई बैंक ने स्वास्थ्य विभाग से क्या मांग की है?

संस्था ने जिले में कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से पीड़ित मरीजों की सूची उपलब्ध कराने की मांग की है।

Q2. कॉर्नियल ब्लाइंडनेस क्या होती है?

यह आंख की कॉर्निया से जुड़ी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति की दृष्टि प्रभावित हो जाती है।

Q3. अब तक कितने लोगों की मदद की गई है?

रोटरी आई बैंक अब तक 4,165 लोगों के कॉर्निया ट्रांसप्लांट में सहायता कर चुका है।

Q4. क्या बच्चों का भी इलाज किया गया है?

हाँ, छह महीने से लेकर आठ साल तक के बच्चों के सफल कॉर्निया ट्रांसप्लांट किए गए हैं।

Q5. संस्था का मुख्य उद्देश्य क्या है?

जरूरतमंद मरीजों को समय पर इलाज और कॉर्निया प्रत्यारोपण उपलब्ध कराना।


Conclusion:

होशियारपुर में रोटरी आई बैंक की यह पहल कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से पीड़ित मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग और अस्पतालों के सहयोग से जरूरतमंद मरीजों तक समय पर इलाज पहुंचाने की दिशा में यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।Screenshot_1782

Edited By: Karan Singh

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