- Hindi News
- राज्य
- पंजाब
- कपूरथला में मिड-डे मील के भुगतान में देरी पर उठे सवाल, अप्रैल 2026 से दुकानदारों की पेमेंट लंबित होन...
कपूरथला में मिड-डे मील के भुगतान में देरी पर उठे सवाल, अप्रैल 2026 से दुकानदारों की पेमेंट लंबित होने का दावा
SC/BC कर्मचारी वेलफेयर फेडरेशन ने शिक्षकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ का मुद्दा उठाया, मुख्यमंत्री भगवंत मान और शिक्षा मंत्री से भुगतान व्यवस्था सुधारने की अपील।
पंजाब के कपूरथला में SC/BC कर्मचारी वेलफेयर फेडरेशन ने मिड-डे मील योजना के तहत खाना बनाने की लागत के भुगतान में देरी को लेकर चिंता जताई है। फेडरेशन का दावा है कि अप्रैल 2026 से दुकानदारों और अन्य सप्लायरों के भुगतान लंबित हैं। संगठन ने सरकार से स्कूलों को अग्रिम बजट उपलब्ध कराने और भुगतान प्रक्रिया सरल बनाने की मांग की है।
कपूरथला: पंजाब के कपूरथला में मिड-डे मील योजना के तहत खाना बनाने की लागत के भुगतान में कथित देरी का मामला सामने आया है। गजेटेड एवं नॉन-गजेटेड SC/BC कर्मचारी वेलफेयर फेडरेशन, पंजाब की कपूरथला इकाई ने आरोप लगाया है कि अप्रैल 2026 से दुकानदारों और अन्य सप्लायरों के भुगतान लंबित हैं। संगठन ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार से भुगतान व्यवस्था में सुधार करने की मांग की है।
फेडरेशन के कपूरथला अध्यक्ष एवं पंजाब के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सतवंत तूरा ने अन्य पदाधिकारियों के साथ मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए मिड-डे मील योजना चलाई जा रही है। हालांकि, उनके अनुसार, योजना के लिए धनराशि जारी होने के बावजूद संबंधित दुकानदारों और सप्लायरों तक भुगतान नहीं पहुंच रहा है।
अप्रैल 2026 से भुगतान लंबित होने का दावा
फेडरेशन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि स्कूलों के खातों में मिड-डे मील के लिए धनराशि जारी होने का रिकॉर्ड दिखाया जाता है, लेकिन जिन दुकानदारों से राशन और भोजन बनाने के लिए जरूरी सामान खरीदा जाता है, उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है।संगठन के अनुसार, इस समस्या के कारण स्कूलों में मिड-डे मील की व्यवस्था संभालने वाले शिक्षकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भुगतान में देरी से शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन में नाराजगी बढ़ रही है।
भुगतान प्रक्रिया में बदलाव से स्कूलों को परेशानी
फेडरेशन के सदस्यों ने कहा कि मिड-डे मील की खाना पकाने की लागत के लिए जारी धनराशि के इस्तेमाल की प्रक्रिया में समय-समय पर बदलाव किए जाते हैं। इससे स्कूलों के कर्मचारियों को दुकानदारों का भुगतान करने और राशन की आपूर्ति सुनिश्चित करने में मुश्किलें आती हैं।
संगठन का कहना है कि बार-बार बदलती प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण स्कूलों में मिड-डे मील की व्यवस्था संभालने वाले शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी पड़ रही है।
शिक्षकों को अपनी जेब से भुगतान करने का आरोप
फेडरेशन के अध्यक्ष सतवंत तूरा ने आरोप लगाया कि स्कूलों में अलग से उपलब्ध धनराशि नहीं होने के कारण कई बार शिक्षकों और मिड-डे मील प्रभारियों को अपनी जेब से भुगतान करना पड़ता है। वहीं, कुछ दुकानदार सीमित समय तक उधार पर सामान उपलब्ध कराते हैं।
तूरा के मुताबिक, भुगतान और प्रतिपूर्ति में लंबे समय तक देरी होने से शिक्षकों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। इसका असर उनके घरेलू बजट पर भी पड़ रहा है।
स्कूलों के बजट में बदलाव से बढ़ रही उलझन
फेडरेशन ने यह भी दावा किया कि कुछ मौकों पर स्कूलों के लिए खाना पकाने की लागत का बजट आवंटित दिखाया गया, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया गया या उसमें बदलाव कर दिया गया।
संगठन के अनुसार, इस तरह के प्रशासनिक बदलावों से स्कूलों के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा होती है। साथ ही, मिड-डे मील से जुड़ी भुगतान संबंधी समस्याओं को सुलझाने में शिक्षकों का अतिरिक्त समय खर्च हो रहा है, जिससे उनकी पढ़ाई से जुड़ी जिम्मेदारियां भी प्रभावित हो सकती हैं।
मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से भुगतान व्यवस्था सुधारने की मांग
सतवंत तूरा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है।
उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूलों को खाना पकाने की लागत का बजट पहले से उपलब्ध कराया जाना चाहिए। यह बजट विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर पूरे शैक्षणिक वर्ष के लिए जारी किया जा सकता है।
फेडरेशन ने यह भी सुझाव दिया कि स्कूल प्रमुखों को बैंकिंग माध्यम से सीधे दुकानदारों और सप्लायरों को भुगतान करने का अधिकार दिया जाए। संगठन के मुताबिक, इससे भुगतान में होने वाली देरी कम करने और राशन की आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
Key Highlights
कपूरथला में मिड-डे मील योजना के भुगतान में देरी को लेकर फेडरेशन ने चिंता जताई।
अप्रैल 2026 से दुकानदारों और सप्लायरों की पेमेंट लंबित होने का दावा किया गया।
SC/BC कर्मचारी वेलफेयर फेडरेशन की कपूरथला इकाई ने यह मुद्दा उठाया।
संगठन के अनुसार, भुगतान में देरी से शिक्षकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
कुछ शिक्षकों को अपनी जेब से भुगतान करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
फेडरेशन ने बजट आवंटन और भुगतान प्रक्रिया में बार-बार बदलाव पर सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री भगवंत मान, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस से हस्तक्षेप की अपील की गई।
स्कूलों को पूरे शैक्षणिक वर्ष के लिए अग्रिम बजट देने का सुझाव दिया गया।
FAQ Section
1. कपूरथला में मिड-डे मील भुगतान को लेकर क्या मामला सामने आया है?
कपूरथला की SC/BC कर्मचारी वेलफेयर फेडरेशन ने आरोप लगाया है कि मिड-डे मील योजना के तहत खाना बनाने की लागत के भुगतान में देरी हो रही है और अप्रैल 2026 से कई दुकानदारों के भुगतान लंबित हैं।
2. मिड-डे मील भुगतान में देरी का मुद्दा किस संगठन ने उठाया है?
यह मुद्दा गजेटेड एवं नॉन-गजेटेड SC/BC कर्मचारी वेलफेयर फेडरेशन, पंजाब की कपूरथला इकाई ने उठाया है।
3. भुगतान में देरी से शिक्षकों को क्या परेशानी हो रही है?
फेडरेशन के अनुसार, भुगतान में देरी के कारण कुछ शिक्षकों और मिड-डे मील प्रभारियों को अपनी जेब से सामान का भुगतान करना पड़ रहा है। इससे उन पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
4. फेडरेशन ने पंजाब सरकार से क्या मांग की है?
फेडरेशन ने भुगतान व्यवस्था को सरल बनाने, स्कूलों को अग्रिम बजट उपलब्ध कराने और स्कूल प्रमुखों को सीधे सप्लायरों के खातों में भुगतान करने का अधिकार देने की मांग की है।
5. फेडरेशन ने किन मंत्रियों से हस्तक्षेप की अपील की है?
फेडरेशन के अध्यक्ष सतवंत तूरा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है।
6. फेडरेशन ने मिड-डे मील के बजट को लेकर क्या सुझाव दिया है?
फेडरेशन ने विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर पूरे शैक्षणिक वर्ष के लिए खाना पकाने की लागत का बजट अग्रिम रूप से स्कूलों को देने का सुझाव दिया है।
Conclusion
कपूरथला में मिड-डे मील योजना के तहत भुगतान में कथित देरी का मुद्दा उठाते हुए SC/BC कर्मचारी वेलफेयर फेडरेशन ने स्कूलों के सामने आ रही वित्तीय और प्रशासनिक समस्याओं पर चिंता जताई है। संगठन ने सरकार से भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाने और स्कूलों को अग्रिम बजट उपलब्ध कराने की मांग की है। अब इस मामले में संबंधित विभागों की ओर से किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया या कार्रवाई की जानकारी मिलने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

