- Hindi News
- राज्य
- पंजाब
- अमृतसर के स्कूल में तिब्बत के इतिहास और विरासत पर विशेष कार्यक्रम, छात्रों ने समझा निर्वासन का दर्द
अमृतसर के स्कूल में तिब्बत के इतिहास और विरासत पर विशेष कार्यक्रम, छात्रों ने समझा निर्वासन का दर्द
इन्विक्टस इंटरनेशनल स्कूल में लगी ‘India and Tibet: Ancient Ties and Current Bonds’ प्रदर्शनी, तिब्बती शरणार्थियों के अनुभवों और सांस्कृतिक पहचान पर हुई चर्चा
अमृतसर के इन्विक्टस इंटरनेशनल स्कूल में तिब्बत के इतिहास, संस्कृति और निर्वासन में रह रहे लोगों के अनुभवों को समझने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। IB की छात्रा अबाना ढिल्लों की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में तिब्बती विरासत और भारत-तिब्बत के ऐतिहासिक संबंधों पर चर्चा हुई।
अमृतसर के इन्विक्टस इंटरनेशनल स्कूल में विद्यार्थियों को तिब्बत के इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और शरणार्थियों के जीवन के अनुभवों से परिचित कराने के लिए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पहल के जरिए छात्रों ने समझने की कोशिश की कि अपनी जन्मभूमि से दूर रहने वाले लोग अपनी संस्कृति, परंपराओं और पहचान को किस तरह जीवित रखते हैं।
इस कार्यक्रम का नेतृत्व स्कूल के इंटरनेशनल बैकलॉरिएट डिप्लोमा प्रोग्राम (IBDP) के प्रथम वर्ष की छात्रा अबाना ढिल्लों ने किया। उनका उद्देश्य तिब्बत के इतिहास और विरासत को वहां के लोगों की कहानियों के माध्यम से दर्ज करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना था।
धर्मशाला में शोध के बाद छात्रा ने शुरू की पहल
अबाना ढिल्लों ने बताया कि वह हाल ही में शोध यात्रा के लिए धर्मशाला गई थीं। वहां उन्होंने अलग-अलग पीढ़ियों के तिब्बती शरणार्थियों से बातचीत की और उनके जीवन के अनुभवों को समझा।
उन्होंने कहा कि इस यात्रा से उन्हें तिब्बती शरणार्थियों के अनुभवों और उनकी परिस्थितियों को गहराई से जानने का अवसर मिला। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने स्कूल में इस विषय पर चर्चा आयोजित की, ताकि दूसरे विद्यार्थी भी तिब्बत के इतिहास को केवल राजनीतिक घटनाओं के बजाय लोगों के जीवन से जोड़कर समझ सकें।
तिब्बती प्रतिनिधिमंडल ने साझा किया दृष्टिकोण
कार्यक्रम में तिब्बती प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व तेम्पा ग्याल्त्सेन ज़मल्हा ने किया। वह सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) के सूचना एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग के अंतरराष्ट्रीय संबंध अनुभाग में संयुक्त सचिव और कार्यकारी प्रमुख हैं।
उन्होंने तिब्बत के इतिहास, विस्थापन, सांस्कृतिक पहचान और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े विषयों पर समकालीन दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक इतिहास की पढ़ाई से आगे बढ़कर यह समझने के लिए प्रेरित करना था कि किसी समुदाय के लोग अपनी मातृभूमि से दूर रहते हुए भी अपनी पहचान और विरासत को कैसे आगे बढ़ाते हैं।
प्रदर्शनी में भारत-तिब्बत के ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण ‘India and Tibet: Ancient Ties and Current Bonds’ नामक प्रदर्शनी रही। इसे सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन के तिब्बत म्यूजियम ने तैयार किया था।
प्रदर्शनी के माध्यम से विद्यार्थियों ने तिब्बत के इतिहास, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं, राजनीतिक संघर्षों तथा भारत के साथ उसके लंबे समय से चले आ रहे संबंधों के बारे में जाना।
इस पहल ने छात्रों को यह समझने का अवसर दिया कि किसी क्षेत्र की विरासत केवल उसके भूगोल तक सीमित नहीं होती, बल्कि भाषा, खान-पान, संगीत, कहानियों और परंपराओं के माध्यम से भी आगे बढ़ती है।
‘युवाओं की यादों और कल्पनाओं में जीवित है तिब्बत’
तेम्पा ग्याल्त्सेन ज़मल्हा ने कहा कि निर्वासन में पली-बढ़ी तिब्बती युवाओं की एक पूरी पीढ़ी के लिए घर की अवधारणा केवल किसी भौतिक स्थान तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यादें और कल्पनाएं भी उनकी मातृभूमि से जुड़ाव बनाए रखने का माध्यम हैं।
उन्होंने बताया कि तिब्बती युवा अपनी कहानियों, भोजन और गीतों के जरिए तिब्बत की संस्कृति को जीवित रख रहे हैं। पारंपरिक तिब्बती गोलाकार नृत्य जैसे सांस्कृतिक रूपों को भी नई पीढ़ी आधुनिक तरीकों से आगे बढ़ा रही है।
उनके अनुसार, इस तरह सांस्कृतिक परंपराओं को नए रूप में अपनाना विरासत को संरक्षित रखने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण तरीका है।
मुख्य बातें
-
अमृतसर के इन्विक्टस इंटरनेशनल स्कूल में तिब्बत के इतिहास और विरासत पर कार्यक्रम आयोजित हुआ।
-
IBDP की छात्रा अबाना ढिल्लों ने इस पहल का नेतृत्व किया।
-
धर्मशाला में तिब्बती शरणार्थियों से बातचीत के बाद उन्हें इस परियोजना की प्रेरणा मिली।
-
तिब्बती प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व तेम्पा ग्याल्त्सेन ज़मल्हा ने किया।
-
‘India and Tibet: Ancient Ties and Current Bonds’ प्रदर्शनी में इतिहास, संस्कृति और भारत-तिब्बत संबंधों को प्रस्तुत किया गया।
-
कार्यक्रम में निर्वासन के दौरान सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के तरीकों पर चर्चा हुई।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. अमृतसर के स्कूल में कार्यक्रम किस विषय पर आयोजित किया गया?
कार्यक्रम तिब्बत के इतिहास, सांस्कृतिक विरासत, भारत-तिब्बत संबंधों और निर्वासन में रह रहे तिब्बती समुदाय के अनुभवों पर केंद्रित था।
2. कार्यक्रम की पहल किसने की?
इन्विक्टस इंटरनेशनल स्कूल की IBDP प्रथम वर्ष की छात्रा अबाना ढिल्लों ने इस पहल का नेतृत्व किया।
3. अबाना ढिल्लों को इस परियोजना की प्रेरणा कैसे मिली?
धर्मशाला की शोध यात्रा के दौरान उन्होंने विभिन्न पीढ़ियों के तिब्बती शरणार्थियों से बातचीत की। उनके अनुभवों ने उन्हें तिब्बत की विरासत को लोगों की कहानियों के माध्यम से दर्ज करने के लिए प्रेरित किया।
4. प्रदर्शनी का नाम क्या था?
प्रदर्शनी का नाम ‘India and Tibet: Ancient Ties and Current Bonds’ था। इसे सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन के तिब्बत म्यूजियम ने तैयार किया था।
5. निर्वासन में तिब्बती संस्कृति को कैसे संरक्षित रखा जा रहा है?
कार्यक्रम में साझा विचारों के अनुसार, तिब्बती समुदाय कहानियों, गीतों, खान-पान और पारंपरिक नृत्य के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ा रहा है।
निष्कर्ष
अमृतसर के इन्विक्टस इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को तिब्बत के इतिहास और निर्वासन में रह रहे लोगों के अनुभवों को मानवीय दृष्टिकोण से समझने का अवसर देता है। अबाना ढिल्लों की पहल और तिब्बती प्रतिनिधिमंडल के संवाद ने यह संदेश दिया कि अपनी मातृभूमि से दूर रहने के बावजूद भाषा, परंपराएं, संगीत और सामुदायिक स्मृतियां किसी संस्कृति को जीवित रख सकती हैं।

