पंजाब में बच्चों में बढ़ रहे टीबी के मामले, लुधियाना सबसे अधिक प्रभावित जिला

2025 में राज्य में 2,733 बाल टीबी मामले दर्ज, अकेले लुधियाना में 712 केस सामने आए

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पंजाब में तपेदिक (टीबी) बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों में टीबी के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। लुधियाना जिला इस मामले में सबसे अधिक प्रभावित रहा है।

Tuberculosis पंजाब में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। खासकर 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों में टीबी के मामलों में लगातार वृद्धि चिंता बढ़ा रही है।

वर्ष 2025 में राज्यभर में कुल 59,994 टीबी मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 13,106 मामले अकेले Ludhiana जिले में सामने आए। यह किसी भी जिले में सबसे अधिक संख्या है।

इसी तरह बच्चों में टीबी के मामलों में भी लुधियाना सबसे आगे रहा। राज्य में दर्ज कुल 2,733 बाल टीबी मामलों में से 712 मामले केवल लुधियाना जिले में पाए गए।

पांच वर्षों में 25 प्रतिशत तक बढ़े मामले

आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में बच्चों में टीबी के मामलों में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

  • वर्ष 2020 में 2,097 मामले दर्ज हुए
  • 2021 में यह संख्या घटकर 2,038 हुई
  • 2022 में बढ़कर 2,266 हो गई
  • 2023 में 2,316 मामले सामने आए
  • 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 2,517 तक पहुंच गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में टीबी के लगातार बढ़ते मामले इस बात का संकेत हैं कि समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी है।

स्कूलों में निगरानी बढ़ाई गई

स्वास्थ्य विभाग ने लुधियाना जिले में निगरानी और जांच अभियान तेज कर दिए हैं। इसके तहत Rashtriya Bal Swasthya Karyakram (RBSK) की टीमों को स्कूलों में संभावित टीबी मरीजों की पहचान करने और समय पर इलाज सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।

कमजोर प्रतिरक्षा वाले बच्चों में तेजी से फैलता है संक्रमण

Ashish Chawla ने बताया कि बच्चों में टीबी संक्रमण कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण तेजी से फैलता है।

उन्होंने कहा, “टीबी संक्रमित वयस्क के खांसने या छींकने से हवा में फैलने वाले माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया के जरिए बच्चों तक पहुंचती है। जिन बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उनके शरीर में संक्रमण तेजी से सक्रिय और संक्रामक अवस्था में पहुंच जाता है।”

जल्द पहचान और इलाज पर जोर

डॉ. चावला ने बताया कि RBSK प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्कूल जाने वाले बच्चों में संदिग्ध मामलों की जल्द पहचान करना और समय पर उपचार सुनिश्चित करना है, ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके।Screenshot_1308

Edited By: Karan Singh

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