Uhel Seth की किताब ने उठाए बड़े सवाल: क्या भारत ने विकास के साथ खो दी नागरिक जिम्मेदारी और जवाबदेही?

‘WTF India: Are We Losing the Plot?’ में प्रदूषण, गंदगी और बदहाल सड़कों से आगे शासन व्यवस्था पर सवाल, अमृतसर में लेखक ने रखी बेबाक राय

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ब्रांड स्ट्रैटेजिस्ट और लेखक Uhel Seth ने अमृतसर में अपनी किताब पर चर्चा के दौरान शासन की जवाबदेही, नागरिक जिम्मेदारी और शहरों की बदहाल स्थिति पर तीखी टिप्पणी की।

 

भारत में प्रदूषित हवा, गंदगी से भरी सड़कें और जगह-जगह बने गड्ढे अक्सर विकास की चुनौतियों के तौर पर देखे जाते हैं। लेकिन लेखक और ब्रांड स्ट्रैटेजिस्ट Uhel Seth की नई किताब ‘WTF India: Are We Losing the Plot?’ इन समस्याओं को केवल नागरिक सुविधाओं की कमी तक सीमित नहीं रखती। किताब देश में शासन व्यवस्था, राजनीतिक इच्छाशक्ति और नागरिक जिम्मेदारी के कमजोर पड़ते स्वरूप पर भी सवाल उठाती है।

अमृतसर में Phulkari-Women of Amritsar की ओर से आयोजित एक चर्चा के दौरान सेठ ने अपनी किताब और उसमें उठाए गए मुद्दों पर खुलकर बात की। उनसे पूछा गया कि क्या भारत वास्तव में विकास की दिशा और प्राथमिकताओं को लेकर भटक गया है।

‘हमने अभी पूरी तरह प्लॉट नहीं खोया’

सेठ ने कहा कि उन्हें अभी ऐसा नहीं लगता कि भारत ने पूरी तरह अपनी दिशा खो दी है। उनके मुताबिक देश रॉकेट बनाने और चांद के कठिन हिस्सों तक पहुंचने की क्षमता रखता है, लेकिन अपने शहरों की सड़कों को कचरा मुक्त रखने में अब भी असफल नजर आता है।

उन्होंने इस विरोधाभास के पीछे शासन में जवाबदेही की कमी और नागरिकों की उदासीनता को बड़ी समस्या बताया।

सेठ के अनुसार, देश की प्रगति केवल बड़े तकनीकी और वैज्ञानिक उपलब्धियों से नहीं मापी जा सकती। रोजमर्रा की नागरिक सुविधाओं, साफ-सफाई और सार्वजनिक व्यवस्था में भी उसी स्तर की गंभीरता दिखाई देनी चाहिए।

किताब में शासन और नागरिक जिम्मेदारी पर फोकस

‘WTF India: Are We Losing the Plot?’ में सेठ ने नागरिकों की जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति और शासन व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की कमी को प्रमुख मुद्दा बनाया है।

लेखक ने इन समस्याओं को व्यंग्य, हास्य और बेबाक अंदाज में सामने रखने की कोशिश की है। उनका तर्क है कि जब नागरिक अपने शहर और सार्वजनिक स्थानों की जिम्मेदारी लेने से पीछे हटते हैं और शासन व्यवस्था पर्याप्त पारदर्शी एवं जवाबदेह नहीं होती, तो समस्याएं लगातार गहराती जाती हैं।

अमृतसर की बदहाली पर जताई निराशा

अमृतसर का जिक्र करते हुए सेठ ने शहर की क्षमता और उसकी मौजूदा स्थिति के बीच के अंतर पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि स्वर्ण मंदिर के कारण अमृतसर उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक रूप से शांत शहर है, लेकिन इसके आसपास के कुछ किलोमीटर क्षेत्र को भी साफ और कचरा मुक्त रखना चुनौती बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि अमृतसर में पर्यटन और विकास की बड़ी संभावनाएं हैं, लेकिन शासन व्यवस्था की कमजोरी और नागरिकों द्वारा शहर की जिम्मेदारी नहीं लेने की प्रवृत्ति इसके विकास में बाधा बन रही है।

गड्ढों और जलभराव पर राजनीतिक कटाक्ष

सड़कों पर गड्ढों और जलभराव जैसी समस्याओं पर चर्चा के दौरान सेठ ने राजनीतिक कटाक्ष भी किया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि “शेरशाह सूरी की सड़कें गडकरी की सड़कों से बेहतर थीं।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क, जलभराव और नागरिक सुविधाओं की समस्याएं किसी एक राजनीतिक दल या क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। उनके मुताबिक यह देशभर में शासन और नागरिक व्यवस्था से जुड़ी व्यापक चुनौती है।

‘ऑप्टिक्स ने जवाबदेही को पीछे छोड़ दिया’

शासन में जवाबदेही की कमी पर बात करते हुए सेठ ने दिल्ली में हालिया इमारत ढहने से हुई मौतों का भी संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि देश में कई बार वास्तविक जवाबदेही की जगह प्रतीकात्मक कार्रवाई अधिक दिखाई देती है।

उनका सवाल था कि अगर किसी हादसे में सात लोगों की मौत हो चुकी हो, तो उसके बाद कुछ अधिकारियों को निलंबित करना समस्या के मूल समाधान का विकल्प कैसे हो सकता है।

उन्होंने इसे ऐसी व्यवस्था का उदाहरण बताया, जहां “ऑप्टिक्स” यानी दिखने वाली कार्रवाई, वास्तविक जवाबदेही और सुरक्षा सुनिश्चित करने से ज्यादा महत्व हासिल कर लेती है।

विकास के साथ नागरिक सुविधाओं पर भी ध्यान जरूरी

सेठ की टिप्पणी का मूल सवाल यह है कि क्या भारत तकनीकी और आर्थिक प्रगति के साथ अपनी बुनियादी नागरिक जिम्मेदारियों को भी उसी गति से मजबूत कर पा रहा है। उनके अनुसार बड़े विकास लक्ष्यों के साथ साफ शहर, सुरक्षित इमारतें, बेहतर सड़कें और जवाबदेह शासन भी उतने ही जरूरी हैं।

Key Highlights:

  • Uhel Seth की नई किताब ‘WTF India: Are We Losing the Plot?’ चर्चा में।
  • किताब में शासन व्यवस्था और नागरिक जिम्मेदारी पर सवाल उठाए गए हैं।
  • अमृतसर में Phulkari-Women of Amritsar ने चर्चा का आयोजन किया।
  • सेठ ने कहा कि भारत ने अभी पूरी तरह अपनी दिशा नहीं खोई है।
  • प्रदूषण, कचरा, गड्ढों और जलभराव जैसी समस्याओं पर चिंता जताई।
  • अमृतसर की सफाई व्यवस्था और शासन की कार्यप्रणाली पर निराशा व्यक्त की।
  • दिल्ली इमारत हादसे का उदाहरण देकर सरकारी जवाबदेही पर सवाल उठाया।
  • तकनीकी उपलब्धियों के साथ बुनियादी नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर।

FAQ Section:

Q1. Uhel Seth की नई किताब का नाम क्या है?
Uhel Seth की नई किताब का नाम ‘WTF India: Are We Losing the Plot?’ है।

Q2. किताब में किन मुद्दों को उठाया गया है?
किताब में शासन की जवाबदेही, राजनीतिक इच्छाशक्ति, नागरिक जिम्मेदारी, प्रदूषण, कचरा, खराब सड़कों और सार्वजनिक व्यवस्था जैसी समस्याओं पर चर्चा की गई है।

Q3. Uhel Seth ने अमृतसर को लेकर क्या कहा?
उन्होंने अमृतसर की आध्यात्मिक और पर्यटन क्षमता की प्रशंसा करते हुए शहर में सफाई और शासन व्यवस्था की स्थिति पर निराशा जताई।

Q4. क्या सेठ ने राजनीतिक दलों को किसी समस्या के लिए जिम्मेदार ठहराया?
उन्होंने कहा कि गड्ढों और जलभराव जैसी समस्याएं राजनीतिक और क्षेत्रीय सीमाओं से परे हैं और इन्हें व्यापक शासन एवं नागरिक जिम्मेदारी के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

Q5. शासन में जवाबदेही को लेकर सेठ की मुख्य चिंता क्या है?
उनका कहना है कि कई मामलों में वास्तविक जवाबदेही की जगह दिखावटी या प्रतीकात्मक कार्रवाई को प्राथमिकता मिल जाती है, जबकि नागरिक सुरक्षा और व्यवस्था को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

Conclusion:

Uhel Seth की किताब और अमृतसर में हुई चर्चा ने भारत की विकास यात्रा के साथ जुड़ी एक अहम चुनौती को सामने रखा है। देश जहां विज्ञान और तकनीक में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर रहा है, वहीं साफ-सफाई, सुरक्षित बुनियादी ढांचे और जवाबदेह शासन जैसे रोजमर्रा के मुद्दे अब भी चिंता का विषय हैं। सेठ का जोर इसी अंतर को पाटने और सरकार तथा नागरिक दोनों की जिम्मेदारी तय करने पर है।Screenshot_1369

Edited By: Atul Sharma

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