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बरनाला में नगर निगम चुनाव पर बवाल: नामांकन रद्द होने के विरोध में दोपहर 2 बजे तक बंद, विपक्ष का हंगामा
वार्ड 31 से BJP और निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन खारिज होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमाया, व्यापारियों और विपक्षी दलों ने किया विरोध प्रदर्शन
बरनाला नगर निगम चुनाव में वार्ड 31 से भाजपा उम्मीदवार रजनी रानी और निर्दलीय प्रत्याशी स्वीटी गोयल के नामांकन रद्द होने के बाद शहर में विरोध तेज हो गया है। विपक्षी दलों, व्यापार मंडलों और सामाजिक संगठनों ने बुधवार को दोपहर 2 बजे तक बंद का ऐलान किया है।
बरनाला में बंद का ऐलान, व्यापारियों और विपक्षी दलों का समर्थन
बरनाला नगर निगम चुनाव को लेकर पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। वार्ड नंबर 31 से भाजपा उम्मीदवार रजनी रानी और निर्दलीय प्रत्याशी स्वीटी गोयल के नामांकन पत्र खारिज होने के विरोध में बुधवार को दोपहर 2 बजे तक शहर बंद रखने का ऐलान किया गया है।
यह बंद व्यापार मंडल अध्यक्ष अनिल बंसल की ओर से बुलाया गया है, जिसे विभिन्न व्यापारी संगठनों, विपक्षी दलों और सामाजिक संस्थाओं का समर्थन मिला है।
चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप का आरोप
अग्रवाल धर्मशाला में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए अनिल बंसल ने आरोप लगाया कि नामांकन पत्रों को रद्द करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सरकारी हस्तक्षेप को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर राजनीतिक दबाव के चलते निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई है।जिला प्रशासनिक परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन
नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस, भाजपा, शिरोमणि अकाली दल (SAD) और पूर्व AAP नेता गुरदीप बाठ के नेतृत्व में जिला प्रशासनिक परिसर में विरोध प्रदर्शन किया गया।
विपक्षी नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को “लोकतंत्र की हत्या” करार दिया। बाद में प्रदर्शनकारी परिसर के बाहर सड़क पर धरने पर बैठ गए, जहां से कुछ लोगों को पुलिस ने हटाया।
विजय सांपला ने प्रशासन को दी चेतावनी
पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता विजय सांपला भी विपक्षी दलों और व्यापारियों की संयुक्त बैठक में शामिल हुए। उन्होंने स्थानीय AAP नेताओं और प्रशासन को कथित राजनीतिक हस्तक्षेप से दूर रहने की चेतावनी दी।
कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह काला ढिल्लों ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी को चुनाव में हार का डर था, इसलिए इस तरह की रणनीति अपनाई जा रही है।
BJP उम्मीदवार रजनी रानी ने लगाए गंभीर आरोप
भाजपा उम्मीदवार रजनी रानी ने दावा किया कि उनके नामांकन पत्र पहले अधिकारियों द्वारा स्वीकार कर लिए गए थे, लेकिन बाद में दुर्भावनापूर्ण तरीके से उन्हें खारिज कर दिया गया।
भाजपा नेताओं ने कहा कि पार्टी इस मामले को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।
मलोट और मुक्तसर में भी बढ़ा राजनीतिक तनाव
उधर मलोट में SDM कार्यालय परिसर में हुई कथित हिंसा को लेकर कांग्रेस, SAD और भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायक डॉ. बलजीत कौर के निजी सहायक अर्श सिद्धू पर कार्रवाई की मांग की।
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि झड़प के दौरान एक कांग्रेस नेता की पगड़ी उछाली गई। हालांकि डॉ. बलजीत कौर और अर्श सिद्धू ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि झगड़े की शुरुआत कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने की थी।
वहीं मुक्तसर में SAD कार्यकर्ताओं ने पूर्व विधायक कंवरजीत सिंह रोजी बरकंडी के नेतृत्व में AAP विधायक जगदीप सिंह ‘काका’ बराड़ के निजी सहायक के आवास के बाहर प्रदर्शन किया।
Key Highlights:
- बरनाला में बुधवार को दोपहर 2 बजे तक बंद का ऐलान
- भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन रद्द होने पर विवाद
- विपक्ष ने घटना को बताया “लोकतंत्र की हत्या”
- विजय सांपला ने प्रशासन पर लगाए राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप
- भाजपा हाईकोर्ट जाने की तैयारी में
- मलोट और मुक्तसर में भी विरोध प्रदर्शन तेज
FAQ Section:
Q1. बरनाला में बंद क्यों बुलाया गया है?
वार्ड 31 से भाजपा उम्मीदवार रजनी रानी और निर्दलीय उम्मीदवार स्वीटी गोयल के नामांकन रद्द होने के विरोध में बंद बुलाया गया है।
Q2. बंद कब तक रहेगा?
व्यापार मंडल द्वारा घोषित बंद बुधवार को दोपहर 2 बजे तक रहेगा।
Q3. विपक्षी दलों ने क्या आरोप लगाए हैं?
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप किया गया है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।
Q4. भाजपा अब क्या कदम उठाएगी?
भाजपा नेताओं ने कहा है कि वे नामांकन रद्द करने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे।
Q5. किन-किन संगठनों ने बंद का समर्थन किया?
व्यापारी संगठनों, विपक्षी दलों और कई सामाजिक संस्थाओं ने बंद का समर्थन किया है।
Conclusion:
बरनाला नगर निगम चुनाव से पहले पंजाब की राजनीति में तनाव लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। नामांकन रद्द होने के मामले ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है। विपक्षी दल जहां इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहे हैं, वहीं प्रशासन और सत्तारूढ़ पक्ष आरोपों को खारिज कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर और गहरा सकता है।

