बीकन हटे, लेकिन VIP संस्कृति जारी: उत्तर प्रदेश में गाड़ियों पर अवैध झंडों का बढ़ता चलन

लाल-नीली बत्ती की जगह अब झंडे, पदनाम और प्रतीकों से दिखाया जा रहा रुतबा

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2017 में बीकन हटाए जाने के बावजूद उत्तर प्रदेश में VIP संस्कृति खत्म नहीं हुई है। अब गाड़ियों पर अवैध झंडे और पदनाम लगाकर प्रभाव दिखाया जा रहा है।

2017 में केंद्र सरकार द्वारा वीआईपी वाहनों से लाल-नीली बत्तियां (बीकन) हटाने का फैसला लिया गया था, जिसे विशेषाधिकार की संस्कृति के अंत के रूप में देखा गया। लेकिन उत्तर प्रदेश की सड़कों पर वीआईपी संस्कृति खत्म नहीं हुई, बल्कि उसने नया रूप ले लिया है।

अब बीकन की जगह गाड़ियों पर बहुरंगी लाइटें, छोटे सख्त झंडे, कढ़ाई किए गए पदनाम और बड़े-बड़े संस्थागत लेबल लगाकर प्रभाव और अधिकार दिखाया जा रहा है।


🚗 गाड़ियों पर दिख रहा ‘रुतबा’

राज्य में कई अधिकारी अपनी गाड़ियों के बोनट पर लाल या नीले रंग के छोटे झंडे लगाते देखे जा रहे हैं। इन झंडों पर ‘मुख्य सचिव’, ‘प्रमुख सचिव’, ‘कृषि उत्पादन आयुक्त’, ‘परिवहन आयुक्त’ जैसे पदनाम के साथ ‘उत्तर प्रदेश सरकार’ और राज्य चिन्ह भी अंकित होते हैं।

इसी तरह, कई राजनेता भी अपनी एसयूवी गाड़ियों पर पार्टी के झंडे लगाकर सड़कों पर चलते नजर आते हैं, जिससे बिना किसी कानूनी आधार के प्रभाव दिखाया जाता है।


⚖️ कानून क्या कहता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, Motor Vehicles Act, 1988 और Central Motor Vehicles Rules, 1989 के तहत वाहनों पर इस तरह के झंडे लगाने का कोई प्रावधान नहीं है।

मोटर व्हीकल एक्ट के जानकार गंगाफल ने कहा कि कानून में अधिकारियों को अपनी गाड़ियों पर इस तरह के प्रतीक लगाने की अनुमति नहीं है। राष्ट्रीय ध्वज के उपयोग के लिए अलग नियम हैं, जो केवल चुनिंदा पदाधिकारियों तक सीमित हैं।

एक अन्य विशेषज्ञ अरविंद कुमार पांडेय ने भी कहा कि कानून में वाहनों पर झंडे लगाने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने बताया कि संभवतः केवल शीर्ष पुलिस अधिकारियों को गृह विभाग की अधिसूचना के तहत सीमित रूप से झंडा लगाने की अनुमति हो सकती है।


📜 RTI और कोर्ट का रुख

2022 में सड़क परिवहन मंत्रालय के आरटीआई जवाब में भी स्पष्ट किया गया कि मोटर व्हीकल कानूनों के तहत वाहनों पर झंडे लगाने की अनुमति नहीं है।

इसके अलावा, Allahabad High Court भी करीब दो दशक पहले इस तरह के प्रदर्शनों पर रोक लगा चुका है।


क्या है प्रतिबंधित?

वाहनों पर निर्धारित नंबर प्लेट के अलावा किसी भी तरह का अतिरिक्त प्रदर्शन — जैसे पदनाम, पेशा, संस्थान या जाति से जुड़ी पहचान — गैरकानूनी है और दंडनीय भी है।

इसके बावजूद, जिला स्तर पर डीएम, एसएसपी, सीडीओ, आरटीओ जैसे अधिकारियों की गाड़ियों पर पदनाम लिखे होने या ‘हाई कोर्ट’, ‘आर्मी’, ‘पुलिस’, ‘रेलवे’, ‘एडवोकेट’, ‘एडिटर’ जैसे लेबल लगे होने के मामले आम हैं।


⚠️ निष्कर्ष

स्पष्ट है कि वीआईपी संस्कृति खत्म होने के बजाय नए रूप में सामने आ रही है। जब तक नियमों का सख्ती से पालन नहीं होगा, तब तक सड़कों पर इस तरह का “रुतबा प्रदर्शन” जारी रहेगा।Screenshot_150

Edited By: Karan Singh

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