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तलाक को बनाया जश्न: मेरठ में परिवार ने बेटी के साथ खड़े होकर तोड़ी सामाजिक सोच
Pranita के तलाक पर पिता ने बजवाए ढोल, बांटी मिठाइयाँ
मेरठ में एक परिवार ने बेटी के तलाक को दुख नहीं, बल्कि समर्थन और नई शुरुआत के रूप में मनाया, जिससे समाज में नई सोच का संदेश गया।
भारत के कई परिवारों में तलाक आज भी एक सामाजिक कलंक माना जाता है। खासकर महिलाओं को इसके लिए सवालों, आरोपों और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ता है। लेकिन Meerut में एक परिवार ने इस सोच को बदलने की मिसाल पेश की।
यहां Pranita नाम की महिला को जब पारिवारिक अदालत से तलाक मिला, तो उसके परिवार ने इसे दुख की बजाय एक नई शुरुआत के रूप में मनाया।
🥁 ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न
तलाक के फैसले के बाद, उनके पिता Dr Gyanendra Sharma, जो एक सेवानिवृत्त जज हैं, ने अदालत परिसर के बाहर ढोल-नगाड़े बजवाए और मिठाइयाँ बांटीं।
परिवार के सदस्य ढोल की थाप पर नाचते नजर आए और लड्डू वितरित किए गए। इस जश्न का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और चर्चा का विषय बन गया।
👕 भावनात्मक संदेश वाले टी-शर्ट
जश्न के दौरान परिवार के सदस्य काले रंग की टी-शर्ट पहने हुए थे, जिन पर Pranita की तस्वीर और “I Love My Daughter, My Heart My Soul” लिखा हुआ था।
वहीं, प्रणिता की टी-शर्ट पर लिखा था — “My Family, My Life”।
💔 संघर्ष और साहस की कहानी
प्रणिता ने बताया कि उन्होंने अपने विवाह को बचाने की पूरी कोशिश की थी।
उन्होंने कहा, “मैं अपने परिवार को बचाना चाहती थी। 2021 में भी तलाक की प्रक्रिया शुरू हुई थी। मेरे पिता हर समय मेरे साथ खड़े रहे। मैं उम्मीद करती हूं कि हर किसी को मुश्किल समय में ऐसा परिवार मिले।”
प्रणिता की शादी 2018 में Gaurav Agnihotri से हुई थी, जो भारतीय सेना में मेजर हैं और फिलहाल Jalandhar में तैनात हैं। दंपति का एक बेटा भी है।
समय के साथ, प्रणिता को ससुराल में उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। स्थिति बिगड़ने पर उन्होंने तलाक लेने का फैसला किया, जिसे बाद में पारिवारिक अदालत ने मंजूरी दे दी।
❤️ पिता का संदेश
Dr Gyanendra Sharma ने जश्न के पीछे का कारण बताते हुए कहा,
“जब मेरी बेटी का जन्म हुआ था, तब भी ढोल बजे थे। आज फिर बजाए गए, ताकि यह दिखाया जा सके कि बेटी की अहमियत हर दौर में समान रहती है।”
🧠 समाज के लिए संदेश
यह घटना समाज को यह संदेश देती है कि तलाक को असफलता नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए। परिवार का साथ किसी भी कठिन परिस्थिति को आसान बना सकता है।
✅ निष्कर्ष
मेरठ का यह उदाहरण सामाजिक सोच में बदलाव की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जो महिलाओं के समर्थन और सम्मान को बढ़ावा देता है।
