उत्तर प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए नई योजना जल्द शुरू

टाइगर रिजर्व के बाहर बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए पायलट प्रोजेक्ट लागू होगा

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उत्तर प्रदेश वन विभाग 2025-26 से मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए नई योजना लागू करेगा, जिसमें तकनीक और सामुदायिक भागीदारी पर जोर होगा।

उत्तर प्रदेश का वन विभाग जल्द ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए एक नई योजना शुरू करने जा रहा है। यह योजना ‘मैनेजमेंट ऑफ टाइगर्स आउटसाइड टाइगर रिजर्व्स: स्ट्रेटेजीज टू डील विद ह्यूमन–टाइगर कॉन्फ्लिक्ट’ के तहत लागू की जाएगी, जो पूरे देश में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाई जा रही है।

यह पहल देश के 9 राज्यों के 40 वन प्रभागों में लागू की जा रही है और यह राज्यों की मौजूदा योजनाओं के अतिरिक्त होगी।


🌳 कहां लागू होगी योजना

Anuradha Vemuri के अनुसार, इस योजना का पहला चरण उत्तर प्रदेश के

  • साउथ खेरी वन प्रभाग
  • बिजनौर सोशल फॉरेस्ट्री डिवीजन
  • पीलीभीत सोशल फॉरेस्ट्री डिवीजन
  • बहराइच वन प्रभाग

में लागू किया जाएगा।


💰 फंडिंग और उद्देश्य

इस योजना को National CAMPA (Compensatory Afforestation Fund Management and Planning Authority) द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा, जो Ministry of Environment, Forest and Climate Change के अंतर्गत कार्य करता है।

योजना का उद्देश्य मानव और वन्यजीवों, विशेषकर बाघों, के बीच संघर्ष को कम करना और दोनों के बीच संतुलन और सह-अस्तित्व स्थापित करना है।


🐅 योजना की प्रमुख विशेषताएं

इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत:

  • मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम करने के उपाय
  • बाघों और अन्य शिकारी जीवों की निगरानी के लिए तकनीकी साधनों का उपयोग
  • त्वरित प्रतिक्रिया (रैपिड रिस्पॉन्स) प्रणाली विकसित करना
  • मुआवजा तंत्र को बेहतर बनाना
  • स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाना
  • बचाव (रेस्क्यू) सुविधाओं का विस्तार
  • प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण

इन सभी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।


📊 क्यों जरूरी है यह योजना?

भारत में दुनिया के लगभग 70% बाघ पाए जाते हैं। National Tiger Conservation Authority के अनुसार, 2022 की गणना में देश में बाघों की संख्या 3,682 आंकी गई है, जिनमें से करीब 35-40% बाघ टाइगर रिजर्व के बाहर रहते हैं।

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2024-25 के दौरान मानव-वन्यजीव संघर्ष में 62 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 12 मौतें भेड़ियों के हमलों से हुईं। आने वाले समय में यह संख्या बढ़ने की आशंका है।


🌾 संघर्ष के प्रमुख कारण

वन क्षेत्रों के पास बसे कृषि और आबादी वाले इलाकों, खासकर तराई क्षेत्र में, मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं अधिक देखने को मिलती हैं।


निष्कर्ष

यह नई योजना न केवल मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद करेगी, बल्कि बाघ संरक्षण और स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी सुरक्षित बनाएगी।Screenshot_151

Edited By: Karan Singh

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