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उत्तर प्रदेश में किशोर अपराधों में बड़ी गिरावट, 2024 में 25% कम हुए मामले
एनसीआरबी रिपोर्ट में खुलासा: देशभर में बढ़े किशोर अपराध, लेकिन यूपी में तीन साल का सबसे निचला स्तर दर्ज
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में किशोर अपराध के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। राज्य में 2024 में 1,175 मामले सामने आए, जो 2023 की तुलना में 25.4% कम हैं। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर किशोर अपराध के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की हाल ही में जारी “क्राइम इन इंडिया 2024” रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में किशोर अपराध के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे मामलों की संख्या पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक रही।
रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में वर्ष 2024 में किशोर अपराध के 1,175 मामले दर्ज किए गए। यह संख्या 2023 में 1,575 और 2022 में 1,505 थी। इस तरह एक ही वर्ष में मामलों में 25.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह पिछले तीन वर्षों का सबसे निचला स्तर रहा।
राज्य में 2024 में किशोर अपराध दर प्रति एक लाख बाल आबादी पर 1.4 रही।वहीं राष्ट्रीय स्तर पर किशोर अपराध के कुल मामले 2023 के 31,365 से बढ़कर 2024 में 34,878 हो गए। यानी एक वर्ष में 3,513 मामलों या 11.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2022 में यह संख्या 30,555 थी। पूरे देश में किशोर अपराध दर 2024 में प्रति एक लाख बाल आबादी पर 7.9 रही।
रिपोर्ट में बताया गया कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक बाल आबादी वाला राज्य है। 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में बच्चों की आबादी 853.3 लाख है।
रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में किशोर अपराध के मामलों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहां 2023 के 1,818 मामलों की तुलना में 2024 में यह संख्या बढ़कर 5,037 हो गई। यानी एक ही वर्ष में 3,219 मामलों या 177 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वर्ष 2022 में बिहार में 1,052 मामले दर्ज हुए थे। राज्य की किशोर अपराध दर 2024 में प्रति एक लाख आबादी पर 10.6 रही।
बिहार में अकेले 3,219 मामलों की बढ़ोतरी राष्ट्रीय स्तर पर बढ़े कुल 3,513 मामलों का बड़ा हिस्सा रही।
अन्य प्रमुख राज्यों में महाराष्ट्र में 2024 में 3,779 किशोर अपराध मामले दर्ज किए गए, जो 2022 के 4,406 मामलों से कम हैं। वहां अपराध दर 10.5 प्रति लाख रही।
मध्य प्रदेश में 3,474 मामले और अपराध दर 12.1 प्रति लाख दर्ज की गई। राजस्थान में 2,827 मामले और अपराध दर 10.0 रही, जबकि तमिलनाडु में 2,946 मामले और अपराध दर 14.3 प्रति लाख रही।
छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक किशोर अपराध दर दर्ज की गई, जहां प्रति एक लाख आबादी पर 22.4 की दर से 2,180 मामले सामने आए। हरियाणा में 1,550 मामले और अपराध दर 17.0 रही, जबकि तेलंगाना में 1,569 मामले और अपराध दर 13.8 रही।
झारखंड में सबसे कम किशोर अपराध दर दर्ज की गई, जहां 2024 में केवल 122 मामले सामने आए और अपराध दर 0.9 प्रति लाख रही। मणिपुर में केवल 3 मामले दर्ज हुए, जबकि नागालैंड में एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ।
केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली में सबसे अधिक 2,306 किशोर अपराध मामले दर्ज किए गए और यहां अपराध दर 41.6 प्रति लाख रही, जो देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में सबसे अधिक है। दिल्ली ने केंद्र शासित प्रदेशों के कुल किशोर अपराध मामलों में 82 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की।
चंडीगढ़ में 88 मामले दर्ज हुए और अपराध दर 27.2 प्रति लाख रही। सभी केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 2,797 मामले दर्ज किए गए, जो 2022 के 2,955 मामलों से कम हैं।
लद्दाख और लक्षद्वीप में 2024 के दौरान किशोर अपराध का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ।

