यूपी के कॉलेजों में बनेंगे ‘धर्मांतरण रोकथाम सेल’, राज्यपाल के निर्देश के बाद शुरू हुई तैयारी

छात्रों की सुरक्षा और अवैध धर्मांतरण गतिविधियों पर निगरानी के लिए विश्वविद्यालयों और मेडिकल संस्थानों में बनाए जाएंगे विशेष सेल

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उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देश के बाद राज्य के मेडिकल, डेंटल और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘धर्मांतरण रोकथाम सेल’ (Dharmantaran Roktham Cell) स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस कदम को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।

यूपी के उच्च शिक्षण संस्थानों में बनेंगे धर्मांतरण रोकथाम सेल

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देश के बाद राज्य के मेडिकल कॉलेजों, डेंटल कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘धर्मांतरण रोकथाम सेल’ स्थापित किए जाएंगे। इस संबंध में राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी निर्देशों के बाद संस्थानों ने तैयारी शुरू कर दी है।

इस पहल का उद्देश्य छात्रों के लिए सुरक्षित, निष्पक्ष और शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करना है, साथ ही कथित अवैध धर्मांतरण गतिविधियों पर नजर रखना भी है।

राज्यपाल सचिवालय ने जारी किया निर्देश

28 मई को भेजा गया था पत्र

राज्यपाल सचिवालय द्वारा 28 मई को जारी पत्र में सभी राज्य विश्वविद्यालयों, मेडिकल संस्थानों और उच्च शिक्षण संस्थानों को छात्र कल्याण तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।

यह पत्र राज्यपाल एवं कुलाधिपति के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) द्वारा उत्तर प्रदेश के कुलपतियों और संस्थान निदेशकों को भेजा गया था।

पत्र में कहा गया है कि संस्थानों को परामर्श सेवाओं (Counselling Services), निगरानी तंत्र, छात्र सहायता व्यवस्था और शिकायत रिपोर्टिंग प्रणाली को और प्रभावी बनाना होगा।

धर्मांतरण के आरोपों के बाद लिया गया फैसला

पिछले दो वर्षों की घटनाओं के बाद बढ़ी चिंता

यह निर्देश पिछले दो वर्षों के दौरान सामने आए कुछ मामलों के बाद जारी किया गया है। विशेष रूप से लखनऊ स्थित मेडिकल संस्थानों से जुड़े मामलों में पुलिस ने कथित धर्मांतरण गतिविधियों के आरोपों की जांच की थी।

इन मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने, तलाशी और गिरफ्तारियों के बाद छात्र सुरक्षा तथा संस्थानों की जवाबदेही को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हुई थी। हालांकि संबंधित मामले अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।

छात्रों को जागरूक करने पर रहेगा जोर

मेंटर-मेंटी सत्र और संवाद कार्यक्रम होंगे आयोजित

निर्देशों के अनुसार संस्थानों को छात्रों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए नियमित मेंटर-मेंटी सत्र आयोजित करने होंगे।

इसके अलावा:

  • छात्र-शिक्षक संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
  • अभिभावक-शिक्षक बैठकों को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • छात्र कल्याण और एंटी-रैडिकलाइजेशन सेल को मजबूत किया जाएगा।
  • संदिग्ध गतिविधियों की समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाएगी।
  • छात्रों को उनके अधिकारों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी।

सरकार ने स्पष्ट किया उद्देश्य

व्यक्तिगत आस्था नहीं, अवैध गतिविधियों पर रोक लक्ष्य

राज्य सरकार के अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य किसी व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित करना नहीं है।

सरकार के अनुसार, यह कदम केवल उन गतिविधियों को रोकने के लिए है जो उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत प्रतिबंधित हैं।

इस कानून के तहत बल, धोखाधड़ी, दबाव, अनुचित प्रभाव या लालच देकर कराए गए धर्मांतरण को अपराध माना गया है।

भाजपा और सपा आमने-सामने

फैसले पर शुरू हुई राजनीतिक बहस

राज्यपाल के निर्देश के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा है कि इससे छात्रों को किसी भी प्रकार के दबाव या प्रलोभन से बचाने में मदद मिलेगी।

वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस फैसले की आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार उच्च शिक्षा से जुड़े वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।

छात्र सुरक्षा और संस्थागत जवाबदेही पर फोकस

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी विश्वविद्यालय या कॉलेज का प्राथमिक दायित्व छात्रों को सुरक्षित और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना होता है।

नए सेल के गठन से संस्थानों में छात्र सहायता व्यवस्था, परामर्श सेवाओं और शिकायत निवारण तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।


Key Highlights:

  • उत्तर प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में धर्मांतरण रोकथाम सेल बनाए जाएंगे।
  • राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देश के बाद प्रक्रिया शुरू।
  • मेडिकल, डेंटल और अन्य उच्च शिक्षण संस्थान होंगे शामिल।
  • छात्र सुरक्षा, काउंसलिंग और निगरानी तंत्र को मजबूत करने पर जोर।
  • मेंटर-मेंटी सत्र और अभिभावक-शिक्षक बैठकें आयोजित होंगी।
  • एंटी-रैडिकलाइजेशन और छात्र कल्याण सेल को सशक्त किया जाएगा।
  • भाजपा ने फैसले का समर्थन किया, सपा ने सवाल उठाए।
  • यूपी गैरकानूनी धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत जागरूकता बढ़ाने की पहल।

FAQ Section:

Q1: धर्मांतरण रोकथाम सेल क्या है?

यह एक संस्थागत तंत्र होगा जो छात्रों की सुरक्षा, जागरूकता और शिकायत निवारण से जुड़े मामलों पर काम करेगा तथा कथित अवैध धर्मांतरण गतिविधियों के प्रति सतर्कता बनाए रखेगा।

Q2: यह सेल किन संस्थानों में बनाए जाएंगे?

मेडिकल कॉलेजों, डेंटल कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में।

Q3: इस पहल का उद्देश्य क्या है?

छात्रों के लिए सुरक्षित और शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करना तथा अवैध धर्मांतरण से संबंधित गतिविधियों के प्रति जागरूकता और निगरानी बढ़ाना।

Q4: क्या यह किसी की धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित करेगा?

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य व्यक्तिगत आस्था को नियंत्रित करना नहीं बल्कि कानून के तहत प्रतिबंधित गतिविधियों को रोकना है।

Q5: छात्रों के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाएंगे?

मेंटर-मेंटी सत्र, काउंसलिंग सेवाएं, छात्र कल्याण कार्यक्रम, अभिभावक-शिक्षक बैठकें और शिकायत रिपोर्टिंग तंत्र को मजबूत किया जाएगा।


Conclusion:

उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में धर्मांतरण रोकथाम सेल स्थापित करने का निर्णय छात्र सुरक्षा और संस्थागत जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जहां सरकार इसे अवैध गतिविधियों की रोकथाम और जागरूकता से जोड़कर देख रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से देख रहा है। आने वाले समय में इन सेल्स की कार्यप्रणाली और प्रभावशीलता पर सभी की नजरें रहेंगी।Screenshot_2344

Edited By: Karan Singh

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