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बुनकरों की आय और सम्मान बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता: योगी आदित्यनाथ
क्लस्टर आधारित विकास योजना पर जोर, आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़ने के निर्देश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बुनकरों की आय, सम्मान और आजीविका को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने क्लस्टर आधारित विकास और आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर जोर दिया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कहा कि बुनकरों की आय में वृद्धि, उनका सम्मान और आजीविका की स्थिरता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने इस क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान के लिए समन्वित और परिणाम आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।
हैंडलूम विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बुनकर केवल परंपरा के संरक्षक ही नहीं हैं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था के मजबूत स्तंभ भी हैं।
उन्होंने बताया कि कच्चे माल की बढ़ती लागत, आधुनिक डिजाइन और तकनीक तक सीमित पहुंच तथा बाजार तक पहुंच की कमी जैसी समस्याएं इस क्षेत्र के सामने प्रमुख चुनौतियां हैं। इनका समाधान अलग-अलग योजनाओं के बजाय एक मजबूत और एकीकृत प्रणाली के माध्यम से किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बुनकर-प्रधान क्षेत्रों की पहचान कर नई क्लस्टर आधारित विकास योजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि इन क्लस्टरों को वैल्यू चेन मॉडल पर विकसित किया जाए, जिसमें उत्पादन के साथ-साथ डिजाइन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग को भी शामिल किया जाए।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश में लगभग 1.99 लाख बुनकर इस क्षेत्र से जुड़े हैं और यह राज्य देश में छठे स्थान पर है। राज्य कालीन, दरी और मैट उत्पादन में अग्रणी है और बेडशीट, फर्निशिंग तथा कंबल निर्माण में भी इसकी मजबूत भागीदारी है।
वर्ष 2024-25 में भारत का कुल हैंडलूम निर्यात ₹1,178.93 करोड़ रहा, जिसमें उत्तर प्रदेश का योगदान ₹109.40 करोड़ यानी लगभग 9.27 प्रतिशत है।
मुख्यमंत्री ने बुनकरों को संगठित कर क्लस्टरों के भीतर पंजीकृत इकाइयों में जोड़ने पर भी जोर दिया, ताकि सामूहिक उत्पादन और विपणन को बढ़ावा मिल सके।
उन्होंने बुनकरों को आधुनिक तकनीक, उन्नत उपकरणों और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने के निर्देश दिए, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सके।
डिजाइन और मार्केटिंग के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि उत्पादों को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है।
इसके साथ ही उन्होंने डिजाइनर-कम-मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव, डिजाइन हाउस, सोर्सिंग-बाइंग एजेंसियों और एक्सपोर्ट हाउस जैसी संस्थागत व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए, ताकि बाजार तक पहुंच बढ़े और बुनकरों की आय में वृद्धि हो सके।

