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यूपी STF का बड़ा खुलासा: शेयर, क्रिप्टो और फॉरेक्स के नाम पर करोड़ों की ठगी का भंडाफोड़
दो बड़े गिरोहों का पर्दाफाश, 700-800 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का नेटवर्क उजागर
उत्तर प्रदेश STF ने शेयर मार्केट, क्रिप्टोकरेंसी और फॉरेक्स निवेश के नाम पर चल रहे दो बड़े ठगी गिरोहों का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर करोड़ों की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है।
उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने शेयर मार्केट निवेश, क्रिप्टोकरेंसी और फॉरेक्स योजनाओं के नाम पर चल रहे करोड़ों रुपये के दो बड़े ठगी रैकेट का भंडाफोड़ किया है।
पहले मामले में STF ने 26 वर्षीय रूपेश भारद्वाज को बुधवार को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया। वह गाजियाबाद के साहिबाबाद का निवासी है। उस पर शेयर बाजार और आईपीओ में ऊंचे रिटर्न का झांसा देकर निवेशकों को ठगने का आरोप है। यह मामला भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था।
रूपेश ‘X Traders Enterprises’ नाम की एक फर्म चलाता था, जो SEBI में पंजीकृत नहीं थी। वह नकली शेयर सर्टिफिकेट और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लोगों का विश्वास जीतता था। शिकायतें बढ़ने पर उसने गाजियाबाद स्थित अपना कार्यालय बंद कर दिया और गुरुग्राम में छिप गया।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उसके पास से फर्जी आधार कार्ड, चार मोबाइल फोन, एक पैन कार्ड, बैंक पासबुक और बैंक स्टेटमेंट बरामद किए। जांच में पता चला कि उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, गुजरात और पुडुचेरी समेत कई राज्यों में करीब 14 साइबर ठगी के मामले दर्ज हैं।
दूसरे मामले में STF ने हरियाणा के यमुनानगर निवासी 41 वर्षीय जितेंद्र राम को गिरफ्तार किया, जिसे क्रिप्टोकरेंसी और फॉरेक्स निवेश घोटाले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। उसे बुधवार शाम सहारनपुर के दिल्ली रोड स्थित एक रेस्टोरेंट से पकड़ा गया। यह मामला गाजियाबाद के मसूरी थाने में दर्ज है।
जांच में सामने आया कि जितेंद्र राम ‘Sea Prime Capital’ नाम की ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनी के जरिए निवेशकों को क्रिप्टोकरेंसी और USDT में भारी मुनाफे का लालच देता था। वह विज्ञापनों, सोशल मीडिया और सेमिनार के जरिए लोगों को जोड़ता था।
पूछताछ में उसने बताया कि वह अपने साथियों—मोहित राणा, गौरव सिंह और गीता हजारिका—के साथ मिलकर एक संगठित नेटवर्क चला रहा था, जिसमें देशभर में 3,500 से अधिक एजेंट जुड़े थे। इस नेटवर्क के जरिए 30,000 से ज्यादा यूजर आईडी बनाई गईं और करीब 700-800 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया।
STF के अनुसार, यह गिरोह ‘MT-5’ नाम के ट्रेडिंग ऐप का इस्तेमाल करता था, जो भारत में अधिकृत नहीं है। इसके जरिए नकली अकाउंट बनाकर निवेशकों को फर्जी मुनाफा दिखाया जाता था।
विश्वास जीतने के लिए कुछ निवेशकों को शुरुआती रिटर्न भी दिया जाता था, ताकि वे अधिक निवेश करें।
ठगी से जुटाई गई रकम को कथित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर दुबई और मॉरीशस के खातों में ट्रांसफर किया जाता था, जहां इस पैसे से संपत्तियां खरीदी जाती थीं।

