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यूपी में 13 साल से प्रिंसिपल भर्ती नहीं, 2,500 से अधिक पद खाली
4,512 सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में आधे से ज्यादा पद रिक्त, अब UPESSC करेगा भर्ती
उत्तर प्रदेश के सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 13 साल से प्रिंसिपल और हेडमास्टर की भर्ती न होने से 2,500 से अधिक पद खाली हैं। इससे शिक्षा और अनुशासन व्यवस्था पर असर पड़ा है।
उत्तर प्रदेश के 4,512 सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रिंसिपल पदों पर 13 वर्षों से नई भर्ती नहीं होने के कारण आधे से अधिक स्वीकृत पद खाली पड़े हैं।
प्रयागराज स्थित उत्तर प्रदेश शिक्षा निदेशालय को राज्य के सभी 75 जिलों से प्राप्त ताजा आंकड़ों के अनुसार, इंटर कॉलेजों में 1,502 प्रिंसिपल पद और हाई स्कूलों में 1,003 हेडमास्टर पद खाली हैं। इस प्रकार कुल 2,505 पद रिक्त हैं, जो कुल स्वीकृत पदों का लगभग 55.51% है।
अब इन पदों पर भर्ती की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) को सौंपी गई है। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, रिक्तियों की जानकारी जल्द ही ऑनलाइन माध्यम से भेजी जाएगी।
अधिकारी ने माना कि लंबे समय तक नियमित प्रिंसिपलों की अनुपस्थिति ने न केवल छात्रों की पढ़ाई को प्रभावित किया है, बल्कि स्कूलों में अनुशासन बनाए रखना और नियमों को लागू करना भी मुश्किल हो गया है।
इससे पहले, दिसंबर 2013 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड (जो अब भंग हो चुका है) ने 632 प्रिंसिपल और हेडमास्टर पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी किया था और फरवरी 2014 तक आवेदन लिए गए थे।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, बोर्ड ने 632 में से 581 पदों के परिणाम नवंबर 2022 में घोषित किए। हालांकि, जॉइनिंग प्रक्रिया के दौरान फरवरी 2023 में लखनऊ खंडपीठ ने चयन प्रक्रिया में नौ साल की देरी को आधार बनाते हुए भर्ती को रद्द कर दिया।
हालांकि अदालत के आदेश से पहले जॉइन कर चुके 150 से अधिक प्रिंसिपलों को पद पर बनाए रखा गया, लेकिन 400 से अधिक पद फिर से खाली रह गए।

