मेरठ छात्र हत्याकांड पर मायावती और चंद्रशेखर आजाद आमने-सामने, दलितों को न्याय दिलाने के तरीके पर छिड़ी बहस

मायावती ने संवैधानिक रास्ता अपनाने की दी सलाह, चंद्रशेखर आजाद के विरोध प्रदर्शन के तरीके पर साधा निशाना

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मेरठ में अनुसूचित जाति के एक कॉलेज छात्र की हत्या के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों को लेकर बसपा प्रमुख मायावती और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के बीच सार्वजनिक रूप से तीखी बयानबाजी देखने को मिली। दोनों नेताओं ने दलितों को न्याय दिलाने के लिए अलग-अलग रणनीतियों की वकालत की।

मेरठ छात्र हत्याकांड पर मायावती और चंद्रशेखर आजाद के बीच जुबानी जंग

मेरठ में अनुसूचित जाति के एक कॉलेज छात्र की हत्या के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों को लेकर शुक्रवार को बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली। दोनों नेताओं ने दलित समुदाय को न्याय दिलाने के तरीकों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने रखे।

NHRC ने भी मांगी रिपोर्ट

इसी बीच, प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर मिली शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने उत्तर प्रदेश के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी किया है।

आयोग ने दोनों अधिकारियों से 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

मायावती ने कहा- संविधान के दायरे में लड़ें न्याय की लड़ाई

लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती ने दलितों और समाज के अन्य वंचित वर्गों से अपील की कि वे अन्याय के खिलाफ संवैधानिक और कानूनी रास्ता अपनाएं तथा सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने से बचें।

उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने न्याय पाने के लिए संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं का मार्ग दिखाया था।

बिना नाम लिए साधा निशाना

मायावती ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि कुछ संगठन और राजनीतिक दल अपने संकुचित राजनीतिक हितों के लिए वंचित समाज के लोगों को आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों के लिए उकसाते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे संगठन पहले हिंसा, अशांति और सड़क जाम जैसी स्थितियां पैदा करते हैं और बाद में उनके नेता घटनास्थल पर पहुंचकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करते हैं।

मायावती के अनुसार, इससे न तो पीड़ित परिवारों को न्याय मिलता है और न ही समाज का भला होता है, बल्कि उनकी परेशानियां और बढ़ जाती हैं।

सुप्रीम कोर्ट तक जाने की दी सलाह

बसपा प्रमुख ने कहा कि यदि निचली अदालतों से न्याय नहीं मिलता है तो लोगों को उच्च न्यायालय और आवश्यकता पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए, न कि कानून अपने हाथ में लेना चाहिए।

उन्होंने बसपा संस्थापक कांशीराम का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने डॉ. आंबेडकर के विचारों को राजनीतिक आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया और लोकतांत्रिक व्यवस्था के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन का रास्ता दिखाया।


Key Highlights:

  • मेरठ छात्र हत्याकांड पर मायावती और चंद्रशेखर आजाद के बीच बयानबाजी।
  • मायावती ने संवैधानिक और कानूनी रास्ते से न्याय की पैरवी की।
  • विरोध प्रदर्शनों के तरीके पर बिना नाम लिए राजनीतिक दलों पर निशाना।
  • NHRC ने पुलिस कार्रवाई पर यूपी सरकार से 15 दिन में रिपोर्ट मांगी।
  • मायावती ने जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह दी।
  • कांशीराम और डॉ. आंबेडकर के विचारों का किया उल्लेख।

FAQ Section:

प्रश्न 1: विवाद किस मुद्दे को लेकर हुआ?
मेरठ में अनुसूचित जाति के एक छात्र की हत्या के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों को लेकर दोनों नेताओं के बीच मतभेद सामने आए।

प्रश्न 2: मायावती ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि न्याय के लिए संविधान और न्यायपालिका का रास्ता अपनाना चाहिए तथा कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए।

प्रश्न 3: NHRC ने क्या कार्रवाई की?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पुलिस की कार्रवाई पर उत्तर प्रदेश के गृह सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी कर 15 दिनों में रिपोर्ट मांगी है।

प्रश्न 4: मायावती ने किसका उल्लेख किया?
उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर और बसपा संस्थापक कांशीराम के विचारों का उल्लेख करते हुए संवैधानिक संघर्ष पर जोर दिया।


Conclusion:

मेरठ छात्र हत्याकांड के बाद दलित समुदाय को न्याय दिलाने के मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक ओर मायावती संवैधानिक और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखने की बात कर रही हैं, वहीं इस मामले को लेकर अन्य राजनीतिक दलों की अलग-अलग रणनीतियां सामने आ रही हैं। इस बीच, NHRC की दखल के बाद मामले की जांच और पुलिस की भूमिका पर भी निगाहें टिकी हुई हैं।Screenshot_3188

Edited By: Karan Singh

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