रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी छूट को लेकर कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला

राहुल गांधी बोले—भारत की विदेश नीति पर बाहरी दबाव का असर, संसद सत्र से पहले तेज हुई सियासत

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अमेरिका द्वारा भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट देने की घोषणा के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष ने इसे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर असर डालने वाला कदम बताया है।

कांग्रेस ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर भारत की विदेश नीति से समझौता करने का आरोप लगाया। यह आरोप तब सामने आया जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट (वेवर) देने की घोषणा की। इस मुद्दे पर अगले सप्ताह शुरू होने वाले संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण से पहले राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि यह घटनाक्रम दिखाता है कि भारत की विदेश नीति के फैसले अब राष्ट्रीय हित के बजाय बाहरी दबावों से प्रभावित हो रहे हैं

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति देश के लोगों की सामूहिक इच्छा को दर्शाने वाली होनी चाहिए और इसे देश के इतिहास, भूगोल और मूल्यों पर आधारित होना चाहिए।

राहुल गांधी ने अपने 11 फरवरी को लोकसभा में दिए गए भाषण का एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें उन्होंने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी और चेतावनी दी थी कि वैश्विक शक्तियां भारत की तेल खरीद को प्रभावित करने की कोशिश कर सकती हैं।

उन्होंने उस दौरान कहा था, “अमेरिका हमें बताएगा कि हम किससे तेल खरीद सकते हैं और किससे नहीं। अगर वह रूस या ईरान है तो अमेरिका फैसला करेगा, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री फैसला नहीं करेंगे।”

यह बयान उस समय आया जब अमेरिका ने घोषणा की कि वह भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए अल्पकालिक छूट देगा

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह 30 दिन की छूट एक अस्थायी उपाय है, जिसका उद्देश्य उन तेल खेपों से जुड़े लेनदेन को पूरा करना है जो पहले से समुद्र में भेजी जा चुकी हैं।

उनके अनुसार, यह छूट रूस की सरकार को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं देगी, क्योंकि यह केवल पहले से ट्रांजिट में मौजूद तेल कार्गो पर लागू होगी।

कांग्रेस नेतृत्व ने राहुल गांधी की आलोचना का समर्थन करते हुए आरोप लगाया कि भारत अंतरराष्ट्रीय मामलों में धीरे-धीरे अपनी कूटनीतिक स्वतंत्रता खो रहा है

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अमेरिकी घोषणा में इस्तेमाल की गई भाषा भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को लेकर चिंता पैदा करती है

उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “अमेरिका का हमें रूसी तेल खरीदने की ‘अनुमति’ देने और 30 दिन की अस्थायी छूट की घोषणा करना साफ दिखाता है कि मोदी सरकार लगातार कूटनीतिक स्पेस छोड़ रही है।”

खड़गे ने कहा कि इस तरह की भाषा आमतौर पर प्रतिबंधित देशों के लिए इस्तेमाल होती है, न कि भारत जैसे देश के लिए जिसने वैश्विक कूटनीति में हमेशा स्वतंत्र भूमिका निभाई है।

नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी सवाल उठाया कि क्या अब भारत को तेल आयात के लिए वाशिंगटन से अनुमति लेनी पड़ेगी

उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अभी अंतिम रूप में नहीं पहुंचा है, लेकिन इसके बावजूद शर्तों और प्रतिबंधों की चर्चा शुरू हो गई है।

खेड़ा ने कहा कि राहुल गांधी पहले ही चेतावनी दे चुके थे कि वैश्विक शक्तियां भारत की ऊर्जा नीतियों को प्रभावित कर सकती हैं, और हालिया घटनाक्रम उसी आशंका को सही साबित करता नजर आ रहा है।

 
 
Edited By: Karan Singh

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