करनाल में तीन दिवसीय राष्ट्रीय डेयरी मेला व कृषि एक्सपो-2026 शुरू

किसानों को डेयरी तकनीक, योजनाओं और पशुपालन की नई जानकारी देने के लिए 70 से अधिक स्टॉल लगाए गए

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करनाल स्थित आईसीएआर-नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (NDRI) में शुक्रवार से तीन दिवसीय राष्ट्रीय डेयरी मेला व कृषि एक्सपो-2026 की शुरुआत हुई। इस मेले में किसानों और पशुपालकों को डेयरी क्षेत्र से जुड़ी नई तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।

करनाल स्थित आईसीएआर–नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (NDRI) में शुक्रवार को तीन दिवसीय राष्ट्रीय डेयरी मेला और कृषि एक्सपो-2026 की शुरुआत हुई। मेले का उद्घाटन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (पशु विज्ञान) डॉ. राघवेंद्र भट्टा ने किया।

उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता करते हुए आईसीएआर-एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने कहा कि यह मेला किसानों और पशुपालकों को डेयरी फार्मिंग से जुड़ी नवीनतम तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने का एक अनूठा मंच प्रदान करता है।

उन्होंने बताया कि करीब 7 से 8 करोड़ लोग पशुपालन पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर हैं, जिनमें लगभग 17 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं।

उत्पादकता के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि एनडीआरआई द्वारा विकसित ‘करण फ्राइज’ गाय की नस्ल को हाल ही में पंजीकृत किया गया है। एक करण फ्राइज गाय अधिकतम 46 लीटर दूध दे सकती है, जबकि सामान्य तौर पर प्रति गाय औसत उत्पादन करीब 14 लीटर होता है।

उन्होंने मेले में भाग लेने वाले किसानों और पशुपालकों का आभार जताते हुए कहा कि इस मेले में दूध उत्पादन, पशु पोषण, डेयरी प्रोसेसिंग और विस्तार सेवाओं से जुड़ी जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्य अतिथि डॉ. राघवेंद्र भट्टा ने कहा कि भारत दुनिया के कुल दूध उत्पादन का लगभग एक चौथाई उत्पादन करता है और इस मामले में अमेरिका, चीन और ब्राजील जैसे देशों से आगे है।

उन्होंने बताया कि भारत में वर्तमान में करीब 248 मिलियन टन दूध का उत्पादन होता है।
उन्होंने कहा, “लक्ष्य है कि इसे 2030 तक 300 मिलियन टन और 2047 तक 600 मिलियन टन तक बढ़ाया जाए।”

किसानों और पशुपालकों को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश देश में दूध उत्पादन में पहले स्थान पर है, इसके बाद राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र का स्थान आता है।

उन्होंने यह भी बताया कि देश में प्रति व्यक्ति औसत दैनिक दूध खपत लगभग 484 ग्राम है। हालांकि, अब पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों जैसे प्रोसेस्ड दूध उत्पादों की मांग बढ़ रही है, खासकर बच्चों के बीच।

डॉ. भट्टा ने 2035 तक भारत को खुरपका-मुंहपका (Foot-and-Mouth Disease) से मुक्त बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे दूध और डेयरी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा

कार्यक्रम में महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल के कुलपति डॉ. एस.के. मल्होत्रा ने बतौर विशिष्ट अतिथि भाग लिया। उन्होंने बागवानी और डेयरी को जोड़कर एकीकृत खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

एनडीआरआई के संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. राजन शर्मा ने बताया कि तीन दिवसीय मेले के दौरान किसानों की डेयरी से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे

उन्होंने बताया कि मेले में एनडीआरआई की 16 डिवीजन, आईसीएआर के 8 संस्थान और 70 व्यावसायिक स्टॉल लगाए गए हैं।

साथ ही किसानों और पशुपालकों द्वारा करीब 400 पशु विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए लाए गए हैं, जिनके लिए कुल 12 लाख रुपये की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है।Screenshot_1802

Edited By: Karan Singh

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