यमुनानगर में 140 राइस मिलों ने धान की मिलिंग से किया इनकार, ₹55 करोड़ बकाया भुगतान को लेकर बढ़ा विवाद

कस्टम मिल्ड राइस (CMR) का काम शुरू करने से पहले राइस मिलर्स ने रखीं कई मांगें, धान में नमी की सीमा 17 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने की मांग।

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हरियाणा के यमुनानगर में करीब 140 राइस मिलों ने इस सीजन में सरकारी कस्टम मिल्ड राइस (CMR) की मिलिंग नहीं करने का फैसला लिया है। राइस मिलर्स का आरोप है कि सरकारी खरीद एजेंसियों पर वर्ष 2025-26 के लगभग 55 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसके अलावा मिलर्स ने रेलवे रैक, धान में नमी की सीमा और चावल की रिकवरी को लेकर भी मांगें उठाई हैं।

यमुनानगर: हरियाणा के यमुनानगर जिले में धान की सरकारी मिलिंग को लेकर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। जिले के राइस मिलर्स ने इस सीजन में कस्टम मिल्ड राइस (CMR) का काम नहीं करने का फैसला किया है। मिलर्स का कहना है कि सरकारी खरीद एजेंसियों पर उनके करीब 55 करोड़ रुपये बकाया हैं। भुगतान नहीं होने और अन्य मांगें पूरी न होने के कारण मिलर्स ने सरकार के साथ मिलिंग समझौता करने से दूरी बना ली है।

जिला राइस मिलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, जिले की कुल 175 राइस मिलों में से लगभग 140 मिलों ने अभी तक CMR मिलिंग के लिए न तो पंजीकरण कराया है और न ही सरकार के साथ कोई समझौता किया है। इस फैसले से धान खरीद के बाद चावल की सरकारी मिलिंग की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है।

55 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान को लेकर नाराजगी

यमुनानगर जिला राइस मिलर्स एसोसिएशन की बैठक गुरुवार को व्यासपुर में आयोजित की गई। बैठक में मिलर्स ने वर्ष 2025-26 के कस्टम मिल्ड राइस कार्य का भुगतान लंबित रहने पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि लंबे समय से भुगतान नहीं मिलने के कारण राइस मिल संचालकों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

एसोसिएशन के जिला प्रधान मनीष बंसल ने बताया कि सरकारी खरीद एजेंसियों पर CMR सेवाओं के लिए करीब 55 करोड़ रुपये बकाया हैं। उन्होंने कहा कि जब तक बकाया भुगतान और अन्य समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक जिले के मिलर्स के लिए इस सीजन में मिलिंग का काम करना मुश्किल है।

मिलर्स ने यह भी कहा कि सरकार और जिला प्रशासन की ओर से पहले कई बार भुगतान को लेकर आश्वासन दिए गए थे, लेकिन अब तक उनकी बकाया राशि का निपटारा नहीं हुआ है।

175 में से 140 राइस मिलों ने नहीं कराया पंजीकरण

जिला राइस मिलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, यमुनानगर की 175 राइस मिलों में से करीब 140 ने इस सीजन में CMR मिलिंग के लिए पंजीकरण नहीं कराया है।

यमुनानगर राइस मिलों की स्थिति

कुल राइस मिलें

175

पंजीकरण नहीं कराने वाली मिलें

140

बकाया भुगतान

₹55 करोड़

मांगों का प्रमुख मुद्दा

CMR मिलिंग

मिलर्स का कहना है कि बकाया भुगतान के साथ-साथ परिवहन और मिलिंग से जुड़ी अन्य समस्याओं का भी समाधान जरूरी है। इसी वजह से उन्होंने फिलहाल सरकारी मिलिंग कार्य से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है।

रेलवे रैक की कमी का भी उठाया मुद्दा

राइस मिलर्स ने चावल को निर्धारित स्थानों तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त रेलवे रैक उपलब्ध नहीं कराए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन के जिला प्रधान मनीष बंसल के अनुसार, मिलर्स ने CMR चावल की ढुलाई के लिए हर महीने पर्याप्त रेलवे रैक उपलब्ध कराने की मांग की थी।

हालांकि, अक्टूबर के कोटे में जिले को केवल एक मालगाड़ी आवंटित की गई है। मिलर्स का कहना है कि इतनी कम माल ढुलाई सुविधा से चावल को समय पर निर्धारित गंतव्यों तक पहुंचाना मुश्किल हो सकता है।

धान में नमी की सीमा 17 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने की मांग

राइस मिलर्स ने धान की सरकारी खरीद में नमी की निर्धारित सीमा को लेकर भी बदलाव की मांग की है। फिलहाल धान की खरीद के लिए नमी की अनुमत सीमा 17 प्रतिशत है। मिलर्स इसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने की मांग कर रहे हैं।

मनीष बंसल के अनुसार, बारिश और फसल की परिस्थितियों के चलते किसानों को धान की नमी को लेकर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नमी की सीमा बढ़ाने से किसानों को राहत मिल सकती है।

CMR रिकवरी 67 से घटाकर 62 प्रतिशत करने की मांग

राइस मिलर्स ने नमी की सीमा बढ़ाने के साथ-साथ प्रति क्विंटल धान से चावल की निर्धारित रिकवरी में भी बदलाव की मांग की है।

उनकी मांग है कि CMR रिकवरी की मौजूदा आवश्यकता 67 प्रतिशत से घटाकर 62 प्रतिशत की जाए। मिलर्स का तर्क है कि इससे मिलिंग प्रक्रिया से जुड़ी उनकी समस्याओं का समाधान करने में मदद मिलेगी।

दूसरे राज्यों में चावल भेजने का खर्च भी बना परेशानी

मिलर्स ने चावल को जिले और राज्य से बाहर निर्धारित स्थानों तक पहुंचाने के खर्च का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि चावल की ढुलाई पर आने वाले अतिरिक्त खर्च के मुकाबले उन्हें पर्याप्त मुआवजा नहीं मिल रहा है।

इस वजह से राइस मिल संचालकों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। एसोसिएशन का कहना है कि इस समस्या का समाधान किए बिना मिलिंग का काम शुरू करना उनके लिए मुश्किल होगा।

सरकार और प्रशासन से समाधान की मांग

राइस मिलर्स का कहना है कि उन्होंने अपनी मांगों और समस्याओं को कई बार संबंधित अधिकारियों के सामने उठाया है, लेकिन अभी तक उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।

एसोसिएशन ने बकाया भुगतान, रेलवे रैक की उपलब्धता, धान की नमी की सीमा, CMR रिकवरी और परिवहन खर्च जैसे मुद्दों का समाधान करने की मांग की है। फिलहाल, जिले की बड़ी संख्या में राइस मिलों के पंजीकरण नहीं कराने से इस सीजन की सरकारी मिलिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

 

Key Highlights

  • यमुनानगर की करीब 140 राइस मिलों ने इस सीजन CMR मिलिंग नहीं करने का फैसला किया है।

  • जिले की कुल 175 राइस मिलों में से 140 ने अभी तक पंजीकरण और समझौता नहीं किया है।

  • सरकारी खरीद एजेंसियों पर वर्ष 2025-26 के लगभग 55 करोड़ रुपये बकाया होने का दावा है।

  • अक्टूबर के कोटे में यमुनानगर को केवल एक रेलवे मालगाड़ी मिली है।

  • मिलर्स ने धान में नमी की सीमा 17 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने की मांग की है।

  • CMR रिकवरी को 67 से घटाकर 62 प्रतिशत करने की मांग भी उठाई गई है।

  • दूसरे जिलों और राज्यों में चावल भेजने के परिवहन खर्च की पर्याप्त भरपाई की मांग की गई है।

FAQ Section

1. यमुनानगर के राइस मिलर्स ने CMR मिलिंग से इनकार क्यों किया है?

राइस मिलर्स ने लगभग 55 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान, रेलवे रैक की कमी, नमी की सीमा, CMR रिकवरी और परिवहन खर्च से जुड़ी समस्याओं के कारण इस सीजन मिलिंग नहीं करने का फैसला लिया है।

2. यमुनानगर में कितनी राइस मिलों ने पंजीकरण नहीं कराया है?

जिला राइस मिलर्स एसोसिएशन के अनुसार, जिले की कुल 175 राइस मिलों में से लगभग 140 ने CMR मिलिंग के लिए पंजीकरण नहीं कराया है और सरकार के साथ समझौता भी नहीं किया है।

3. राइस मिलर्स का कितना भुगतान बकाया है?

एसोसिएशन के जिला प्रधान मनीष बंसल के अनुसार, सरकारी खरीद एजेंसियों पर वर्ष 2025-26 की CMR सेवाओं के लिए लगभग 55 करोड़ रुपये बकाया हैं।

4. राइस मिलर्स ने धान में नमी की कितनी सीमा करने की मांग की है?

राइस मिलर्स ने धान की खरीद के लिए निर्धारित नमी की सीमा को 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने की मांग की है।

5. CMR रिकवरी को लेकर राइस मिलर्स की क्या मांग है?

मिलर्स ने प्रति क्विंटल धान पर CMR रिकवरी की निर्धारित आवश्यकता को 67 प्रतिशत से घटाकर 62 प्रतिशत करने की मांग की है।

6. यमुनानगर के राइस मिलर्स ने रेलवे रैक को लेकर क्या मांग की है?

मिलर्स ने CMR चावल की ढुलाई के लिए हर महीने पर्याप्त रेलवे रैक उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अक्टूबर के कोटे में जिले को केवल एक मालगाड़ी आवंटित की गई है।

Conclusion

यमुनानगर में CMR मिलिंग को लेकर राइस मिलर्स और सरकारी व्यवस्था के बीच भुगतान तथा अन्य मांगों को लेकर असहमति बनी हुई है। करीब 140 राइस मिलों के पंजीकरण नहीं कराने से इस सीजन की मिलिंग प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है। मिलर्स ने बकाया 55 करोड़ रुपये का भुगतान करने के साथ-साथ रेलवे रैक, नमी की सीमा, रिकवरी और परिवहन खर्च से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग की है। अब इस मामले में आगे की स्थिति संबंधित मांगों पर होने वाली कार्रवाई पर निर्भर करेगी।Screenshot_371

Edited By: Atul Sharma

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