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रोहतक में 2.44 लाख एकड़ जलभराव और खारी कृषि भूमि होगी उपजाऊ, आधुनिक तकनीक से बदलेगी किसानों की तस्वीर
विश्व बैंक समर्थित 'वॉटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम' के तहत 453 वर्टिकल ड्रेनेज ट्यूबवेल लगाए जाएंगे, हजारों किसानों को मिलेगा लाभ
हरियाणा के रोहतक जिले में जलभराव और मिट्टी के खारेपन से प्रभावित करीब 2.44 लाख एकड़ कृषि भूमि को दोबारा उपजाऊ बनाने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने बड़ा अभियान शुरू किया है। आधुनिक ड्रेनेज तकनीकों और विश्व बैंक की सहायता से हजारों एकड़ भूमि का वैज्ञानिक तरीके से पुनरुद्धार किया जाएगा।
रोहतक में जलभराव और खारी भूमि के सुधार के लिए शुरू हुआ बड़ा अभियान
हरियाणा के रोहतक जिले में जलभराव और मिट्टी में बढ़ती लवणता (खारेपन) के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से प्रभावित कृषि भूमि को फिर से उपजाऊ बनाने की दिशा में बड़े स्तर पर काम कर रहा है।
विभाग के अनुसार, जिले के 116 गांवों की करीब 2.44 लाख एकड़ कृषि भूमि जलभराव और लवणता से प्रभावित है, जिससे फसलों की पैदावार में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
विश्व बैंक की मदद से चलेगी विशेष परियोजना
रोहतक की मंडलीय मृदा संरक्षण अधिकारी नीना सहवाग ने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए जिले को विश्व बैंक समर्थित 'वॉटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम' में शामिल किया गया है।इस परियोजना के तहत लगभग 38,200 एकड़ भूमि के पुनरुद्धार की योजना बनाई गई है। इसके लिए जिले के विभिन्न गांवों में 453 वर्टिकल ड्रेनेज ट्यूबवेल स्थापित किए जाएंगे, जिससे जलभराव और खारी भूमि को दोबारा खेती योग्य बनाया जा सके।
8,400 एकड़ भूमि का सुधार पहले ही पूरा
नीना सहवाग के अनुसार, वर्टिकल ड्रेनेज तकनीक के जरिए चिरी, खरक जाटान, नांदल, बसंतपुर, बलंद, घिलोड़ कलां, धमार, बहू अकबरपुर, किसरेंती, बलंभा और तैमूरपुर सहित कई गांवों की करीब 8,400 एकड़ भूमि का सफलतापूर्वक पुनरुद्धार किया जा चुका है। इसके लिए 81 वर्टिकल ड्रेनेज ट्यूबवेल लगाए गए हैं।
8,500 एकड़ भूमि पर तेजी से जारी है काम
वर्तमान में मयना, मोखरा खेड़ी, अटैल, समचाना, मसूदपुर और अजब गांवों में लगभग 8,500 एकड़ भूमि के सुधार का कार्य चल रहा है। इन क्षेत्रों में 91 नए वर्टिकल ड्रेनेज ट्यूबवेल स्थापित किए जा रहे हैं।
सब-सर्फेस ड्रेनेज तकनीक से भी मिलेगा लाभ
नीना सहवाग ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान रीठाल, किलोई खास, किलोई डोपाना और आसन गांवों की लगभग 4,340 एकड़ भूमि के सुधार के लिए सब-सर्फेस ड्रेनेज तकनीक अपनाई गई थी। इनमें से आसन गांव की करीब 600 एकड़ भूमि का पुनरुद्धार पूरा हो चुका है।
राज्य सरकार की योजना के तहत भी चल रहा कार्य
'रिक्लेमेशन ऑफ वाटरलॉग्ड लैंड एंड सलाइन सॉयल' योजना के तहत शिमली, कलानौर कलां और मुरादपुर टेकना गांवों की करीब 3,400 एकड़ भूमि के सुधार का कार्य टेंडर प्रक्रिया में है। इसके लिए 45 वर्टिकल ड्रेनेज ट्यूबवेल लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
इसके अलावा, डोभ, भाली और बनियानी गांवों की करीब 1,500 एकड़ खारी भूमि के पुनरुद्धार के लिए भी विश्व बैंक परियोजना के तहत प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं।
कैसे काम करती हैं ये आधुनिक तकनीकें?
नीना सहवाग ने बताया कि जिन क्षेत्रों में भूजल की इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी (EC) 6,000 µS/cm से कम होती है, वहां वर्टिकल ड्रेनेज तकनीक अपनाई जाती है।
वहीं, जहां मिट्टी और भूजल में लवणता अधिक होती है, वहां सब-सर्फेस ड्रेनेज तकनीक का उपयोग किया जाता है। इस तकनीक में भूमिगत पाइपलाइन बिछाकर अतिरिक्त खारा पानी बाहर निकाला जाता है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और कृषि योग्य भूमि का विस्तार होता है।
Key Highlights:
- रोहतक के 116 गांवों की 2.44 लाख एकड़ भूमि जलभराव और खारेपन से प्रभावित।
- विश्व बैंक समर्थित योजना के तहत 38,200 एकड़ भूमि का होगा पुनरुद्धार।
- 453 वर्टिकल ड्रेनेज ट्यूबवेल लगाए जाएंगे।
- 8,400 एकड़ भूमि का सुधार पहले ही पूरा किया जा चुका है।
- 8,500 एकड़ भूमि पर पुनरुद्धार का कार्य जारी।
- आधुनिक ड्रेनेज तकनीक से किसानों की आय और कृषि उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य।
FAQ Section:
Q1. रोहतक में कितनी कृषि भूमि जलभराव और खारेपन से प्रभावित है?
करीब 2.44 लाख एकड़ कृषि भूमि प्रभावित है।
Q2. यह परियोजना किस योजना के तहत चलाई जा रही है?
विश्व बैंक समर्थित 'वॉटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम' के तहत।
Q3. कितने वर्टिकल ड्रेनेज ट्यूबवेल लगाए जाएंगे?
परियोजना के तहत 453 वर्टिकल ड्रेनेज ट्यूबवेल लगाए जाएंगे।
Q4. कौन-कौन सी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है?
वर्टिकल ड्रेनेज और सब-सर्फेस ड्रेनेज तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
Q5. किसानों को इस परियोजना से क्या फायदा होगा?
जलभराव और खारी मिट्टी से प्रभावित भूमि दोबारा उपजाऊ बनेगी, जिससे फसल उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में सुधार होगा।
Conclusion:
रोहतक जिले में जलभराव और लवणता से प्रभावित कृषि भूमि के वैज्ञानिक पुनरुद्धार की यह पहल किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। आधुनिक ड्रेनेज तकनीकों और विश्व बैंक के सहयोग से हजारों एकड़ भूमि को फिर से खेती योग्य बनाकर कृषि उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है।

