- Hindi News
- राज्य
- पंजाब
- पंजाब में ड्रग एवं सामाजिक-आर्थिक सर्वे से दूरी पड़ी भारी, 84 शिक्षकों का जून वेतन रोकने के आदेश
पंजाब में ड्रग एवं सामाजिक-आर्थिक सर्वे से दूरी पड़ी भारी, 84 शिक्षकों का जून वेतन रोकने के आदेश
सर्वे ड्यूटी में अनुपस्थित रहने पर जिला प्रशासन की कार्रवाई, शिक्षक संगठनों ने फैसले को बताया जबरन थोपा गया आदेश
पंजाब सरकार के ड्रग एवं सामाजिक-आर्थिक सर्वे में ड्यूटी पर उपस्थित न होने वाले 84 शिक्षकों का जून माह का वेतन रोकने के आदेश जारी किए गए हैं। शिक्षक संगठनों ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि सर्वे में भागीदारी स्वैच्छिक बताई गई थी, जबकि प्रशासन ने आदेश की समीक्षा का आश्वासन दिया है।
ड्रग एवं सामाजिक-आर्थिक सर्वे से अनुपस्थित रहने पर 84 शिक्षकों का वेतन रोका
पंजाब सरकार द्वारा राज्यभर में कराए जा रहे ड्रग एवं सामाजिक-आर्थिक सर्वे में ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले कम से कम 84 शिक्षकों के जून माह के वेतन पर जिला प्रशासन ने रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं।
प्रशासन का कहना है कि संबंधित कर्मचारियों को सर्वे के लिए एन्यूमरेटर (गणनाकर्ता) नियुक्त किया गया था, लेकिन बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद उन्होंने निर्धारित ड्यूटी जॉइन नहीं की।
प्रशासन ने जारी किए वेतन रोकने के आदेश
जिला प्रशासन की ओर से 23 और 24 जून को जारी तीन अलग-अलग पत्रों में ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर्स (DDOs) और स्कूल प्रमुखों को निर्देश दिया गया कि संबंधित शिक्षकों का जून माह का वेतन सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना जारी न किया जाए।पत्रों के अनुसार शिक्षकों को 11 जून और बाद में 23 जून को चुनाव शाखा कार्यालय में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए थे। प्रशासन का दावा है कि आदेश, कारण बताओ नोटिस और कई बार टेलीफोन पर सूचना देने के बावजूद संबंधित कर्मचारी ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हुए।
स्कूलों को भी दिए गए विशेष निर्देश
प्रशासन ने स्कूल प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि संबंधित शिक्षकों को सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना न तो उपस्थिति दर्ज करने दी जाए और न ही नियमित कार्यभार संभालने की अनुमति दी जाए।
प्रशासन ने इस सर्वे को समयबद्ध और महत्वपूर्ण सरकारी अभियान बताते हुए अनुपस्थिति को सरकारी आदेशों की अवहेलना और लापरवाही माना है।
शिक्षक संगठनों ने फैसले का किया विरोध
सरकारी शिक्षक यूनियन के जिला अध्यक्ष कर्नैल सिंह फिल्लौर ने प्रशासन की कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले स्पष्ट किया था कि इस सर्वे में भागीदारी स्वैच्छिक (Voluntary) होगी, लेकिन अब शिक्षकों पर दबाव बनाने के लिए वेतन रोकने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
शिक्षक संगठनों का आरोप है कि उनकी सहमति के बिना अतिरिक्त ड्यूटी थोपी जा रही है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं।
प्रशासन ने समीक्षा का दिया आश्वासन
अतिरिक्त उपायुक्त (विकास) दिव्या पी ने कहा कि वेतन रोकने के आदेश की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने बताया कि शिक्षकों के साथ बातचीत कर उन्हें सर्वे में सहयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा।
Key Highlights:
- ड्रग एवं सामाजिक-आर्थिक सर्वे में अनुपस्थित रहने पर 84 शिक्षकों का वेतन रोका गया।
- प्रशासन ने 23 और 24 जून को आदेश जारी किए।
- शिक्षकों को सर्वे के लिए एन्यूमरेटर नियुक्त किया गया था।
- शिक्षक संगठनों ने कार्रवाई को अनुचित और जबरन बताया।
- अतिरिक्त उपायुक्त ने आदेश की समीक्षा का आश्वासन दिया।
FAQ Section:
Q1. कितने शिक्षकों का वेतन रोका गया है?
कम से कम 84 शिक्षकों का जून माह का वेतन रोकने के आदेश जारी किए गए हैं।
Q2. वेतन क्यों रोका गया?
ड्रग एवं सामाजिक-आर्थिक सर्वे की ड्यूटी पर अनुपस्थित रहने के कारण प्रशासन ने यह कार्रवाई की।
Q3. शिक्षक संगठनों का क्या कहना है?
उनका कहना है कि सर्वे में भागीदारी स्वैच्छिक थी, इसलिए वेतन रोकना अनुचित है।
Q4. प्रशासन का क्या पक्ष है?
प्रशासन का कहना है कि संबंधित कर्मचारियों ने सरकारी आदेशों और नोटिसों के बावजूद ड्यूटी जॉइन नहीं की।
Q5. क्या इस आदेश में बदलाव हो सकता है?
अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा है कि आदेश की समीक्षा की जाएगी और शिक्षकों से बातचीत भी होगी।
Conclusion:
ड्रग एवं सामाजिक-आर्थिक सर्वे को लेकर जिला प्रशासन और शिक्षक संगठनों के बीच विवाद गहरा गया है। एक ओर प्रशासन इसे महत्वपूर्ण सरकारी अभियान बताते हुए सख्त कार्रवाई कर रहा है, वहीं शिक्षक संगठन इसे स्वैच्छिक ड्यूटी बताकर विरोध जता रहे हैं। अब प्रशासन द्वारा प्रस्तावित समीक्षा और बातचीत से इस विवाद के समाधान की उम्मीद की जा रही है।

