बोधगया एक्ट रद्द करने की मांग को लेकर बौद्ध समाज का धरना, डीसी कार्यालय के बाहर रखा एकदिवसीय भूख हड़ताल

बौद्ध नेताओं ने केंद्र और बिहार सरकार को ज्ञापन भेजकर महाबोधि महाविहार का पूर्ण प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग उठाई

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बौद्ध समाज और विभिन्न संगठनों ने बोधगया एक्ट को निरस्त करने की मांग को लेकर डीसी कार्यालय के बाहर एकदिवसीय भूख हड़ताल और धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और बिहार सरकार से महाबोधि महाविहार का पूर्ण नियंत्रण बौद्ध समुदाय को सौंपने सहित कई मांगें रखीं।

बोधगया एक्ट के विरोध में बौद्ध समाज का प्रदर्शन

बौद्ध समाज और उससे जुड़े विभिन्न संगठनों ने शुक्रवार को डीसी कार्यालय के बाहर एकदिवसीय भूख हड़ताल और धरना आयोजित किया। प्रदर्शनकारियों ने बोधगया एक्ट को निरस्त करने की मांग करते हुए केंद्र और बिहार सरकार से महाबोधि महाविहार का संपूर्ण प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपने की अपील की।

यह प्रदर्शन बोधगया महाविहार मुक्ति आंदोलन के तहत आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायियों ने भाग लिया।

पांच घंटे चला धरना

प्रदर्शन सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक चला। इस दौरान बौद्ध नेताओं, भिक्षुओं और बुद्धिजीवियों ने डिप्टी कमिश्नर के जनरल असिस्टेंट को एक ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में मांग की गई कि भारत सरकार और बिहार सरकार महाबोधि महाविहार का संपूर्ण प्रशासनिक नियंत्रण केवल बौद्ध समुदाय को सौंपें।

पंजाब सरकार से भी की गईं अहम मांगें

ज्ञापन के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने पंजाब सरकार से भी दो प्रमुख मांगें रखीं—

  • बुद्ध पूर्णिमा को राजपत्रित (Gazetted) अवकाश घोषित किया जाए।
  • अल्पसंख्यक आयोग में बौद्ध समुदाय को प्रतिनिधित्व दिया जाए।

बौद्ध नेताओं ने रखे अपने विचार

धरने में भिक्षु चंद्र कीर्ति, भिक्षु प्रज्ञा प्रभाकर, अधिवक्ता हरभजन समपला, प्रोफेसर बलवीर, चंचल बौद्ध सहित कई सामाजिक और धार्मिक प्रतिनिधि मौजूद रहे। उन्होंने बौद्ध समुदाय से जुड़े मुद्दों पर सरकारों से सकारात्मक पहल करने की अपील की।


Key Highlights:

  • बोधगया एक्ट को रद्द करने की मांग को लेकर धरना और भूख हड़ताल।
  • डीसी कार्यालय के बाहर पांच घंटे तक चला प्रदर्शन।
  • महाबोधि महाविहार का पूर्ण नियंत्रण बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग।
  • बुद्ध पूर्णिमा को राजपत्रित अवकाश घोषित करने की मांग।
  • पंजाब अल्पसंख्यक आयोग में बौद्ध समुदाय को प्रतिनिधित्व देने की अपील।

FAQ Section:

Q1. प्रदर्शन क्यों किया गया?
बोधगया एक्ट को निरस्त करने और महाबोधि महाविहार का पूर्ण प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग को लेकर।

Q2. धरना कितने समय तक चला?
सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक, यानी लगभग पांच घंटे।

Q3. ज्ञापन किसे सौंपा गया?
डिप्टी कमिश्नर के जनरल असिस्टेंट को।

Q4. पंजाब सरकार से क्या मांग की गई?
बुद्ध पूर्णिमा को राजपत्रित अवकाश घोषित करने और अल्पसंख्यक आयोग में बौद्ध समुदाय को प्रतिनिधित्व देने की मांग की गई।

Q5. प्रदर्शन में कौन-कौन शामिल रहा?
भिक्षु चंद्र कीर्ति, भिक्षु प्रज्ञा प्रभाकर, अधिवक्ता हरभजन समपला, प्रोफेसर बलवीर, चंचल बौद्ध सहित कई बौद्ध नेता और सामाजिक कार्यकर्ता।


Conclusion:

बौद्ध समाज ने बोधगया एक्ट को लेकर अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार के सामने रखा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि महाबोधि महाविहार के प्रबंधन और बौद्ध समुदाय से जुड़े अन्य मुद्दों पर सरकारों को संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए। अब इन मांगों पर संबंधित सरकारों की प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा।Screenshot_2808

Edited By: Karan Singh

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