भीषण गर्मी से यूपी में बिजली की रिकॉर्ड मांग, 32,634 मेगावाट पहुंची खपत; गांवों में 6-7 घंटे की लोड शेडिंग

देरी से मानसून और लगातार बढ़ती गर्मी ने बढ़ाया बिजली संकट, शहरों में फॉल्ट तो गांवों में आपातकालीन कटौती से लोग परेशान

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उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और मानसून में देरी के कारण बिजली की मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। गुरुवार को राज्य में 32,634 मेगावाट की अब तक की सबसे अधिक बिजली मांग दर्ज की गई, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 6 से 7 घंटे तक आपातकालीन लोड शेडिंग की जा रही है।

उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग ने तोड़ा रिकॉर्ड, गर्मी ने बढ़ाई मुश्किलें

उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और मानसून में देरी के चलते बिजली की मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। गुरुवार रात राज्य में 32,634 मेगावाट की सर्वाधिक बिजली मांग दर्ज की गई, जो प्रदेश के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। लगातार बढ़ती खपत के कारण बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है और ग्रामीण इलाकों में आपातकालीन लोड शेडिंग करनी पड़ रही है।

राज्य विद्युत तंत्र के अधिकारियों का कहना है कि यदि मानसून में और देरी हुई तो आने वाले दिनों में बिजली की मांग और बढ़ सकती है।

32,634 मेगावाट पहुंची बिजली की रिकॉर्ड मांग

उत्तर प्रदेश राज्य लोड डिस्पैच सेंटर के अनुसार गुरुवार रात 9:54 बजे बिजली की अधिकतम मांग 32,634 मेगावाट दर्ज की गई। इससे पहले 21 जून को 32,348 मेगावाट की मांग रिकॉर्ड की गई थी।

इसी रात 12:39 बजे भी बिजली की मांग 32,402 मेगावाट तक पहुंच गई, जो राज्य में बिजली की लगातार बढ़ती खपत को दर्शाता है।

गांवों में 6-7 घंटे तक आपातकालीन लोड शेडिंग

यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के अधिकारियों के मुताबिक पीक आवर्स के दौरान प्रतिदिन 2,000 से 3,000 मेगावाट तक बिजली की कमी बनी हुई है।

इसी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में 6 से 7 घंटे तक आपातकालीन लोड शेडिंग करनी पड़ रही है। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि दिन के समय गांवों में निर्धारित रोस्टर के तहत कटौती नहीं की जा रही है।

शहरों में रोस्टर नहीं, तकनीकी खराबियों से बाधित आपूर्ति

बिजली विभाग का कहना है कि फिलहाल शहरों में नियमित रोस्टर लागू नहीं किया गया है। शहरी क्षेत्रों में जहां कहीं बिजली आपूर्ति बाधित हो रही है, उसका मुख्य कारण स्थानीय तकनीकी खराबियां और उत्पादन इकाइयों में आने वाली रुकावटें हैं।

दो महीने से बढ़ी मांग ने बिगाड़ी बिजली विभाग की योजना

UPPCL अधिकारियों के अनुसार पिछले दो महीनों से लगातार रिकॉर्ड स्तर पर बनी बिजली मांग ने विभाग की ग्रीष्मकालीन तैयारियों को प्रभावित किया है। उत्पादन और आपूर्ति के बावजूद बढ़ती खपत के कारण बिजली व्यवस्था पर लगातार दबाव बना हुआ है।

बिजली कर्मचारियों ने स्टाफ की कमी पर जताई चिंता

उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा कि रिकॉर्ड बिजली मांग और कर्मचारियों की भारी कमी के कारण बिजली व्यवस्था पर अभूतपूर्व दबाव है।

समिति का कहना है कि वर्षों से पर्याप्त भर्ती नहीं होने, बड़ी संख्या में पद खाली रहने और संविदा कर्मचारियों की छंटनी के कारण फॉल्ट सुधार, रखरखाव और निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है।


Key Highlights:

  • यूपी में 32,634 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग दर्ज।
  • 21 जून का पिछला रिकॉर्ड 32,348 मेगावाट था।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में 6-7 घंटे तक आपातकालीन लोड शेडिंग।
  • पीक समय में 2,000-3,000 मेगावाट तक बिजली की कमी।
  • मानसून में देरी से बिजली संकट और गहराने की आशंका।
  • कर्मचारियों की कमी से बिजली व्यवस्था पर बढ़ा दबाव।

FAQ Section:

Q1. उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड बिजली मांग कितनी दर्ज की गई?
32,634 मेगावाट।

Q2. रिकॉर्ड मांग कब दर्ज हुई?
गुरुवार रात 9:54 बजे।

Q3. गांवों में बिजली कटौती क्यों की जा रही है?
पीक समय में 2,000-3,000 मेगावाट बिजली की कमी के कारण आपातकालीन लोड शेडिंग की जा रही है।

Q4. क्या शहरों में भी रोस्टर लागू किया गया है?
नहीं। विभाग के अनुसार शहरों में नियमित रोस्टर लागू नहीं है, वहां कटौती मुख्यतः तकनीकी खराबियों के कारण होती है।

Q5. बिजली की मांग बढ़ने का मुख्य कारण क्या है?
भीषण गर्मी और मानसून में देरी के कारण बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है।


Conclusion:

भीषण गर्मी और मानसून में देरी के कारण उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। बढ़ती खपत ने बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोड शेडिंग करनी पड़ रही है। यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर बढ़ सकता है।Screenshot_2813

Edited By: Karan Singh

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