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करनाल धान खरीद घोटाले में बड़ा खुलासा: ‘घोस्ट प्रोक्योरमेंट’ रैकेट में अधिकारी, मिलर और आढ़ती शामिल
विभागीय जांच में करोड़ों के फर्जी धान खरीद घोटाले का पर्दाफाश, कई अधिकारियों पर गिरी गाज
करनाल में पिछले खरीफ सीजन के दौरान हुए बहु-करोड़ धान खरीद घोटाले की विभागीय जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। जांच में फर्जी खरीद, नकली गेट पास और रिकॉर्ड में मौजूद लेकिन जमीन पर गायब स्टॉक की पुष्टि हुई है।
परिचय: करनाल धान खरीद घोटाले में चौंकाने वाले खुलासे
हरियाणा के करनाल में पिछले खरीफ सीजन के दौरान सामने आए बहु-करोड़ धान खरीद घोटाले की विभागीय जांच में संगठित भ्रष्टाचार का बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है। जांच रिपोर्ट के अनुसार यह पूरा मामला “घोस्ट प्रोक्योरमेंट” यानी कागजों में धान खरीद दिखाकर सरकारी धन की हेराफेरी करने का संगठित रैकेट था।
H2: किन लोगों पर लगे गंभीर आरोप?
जांच में हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों, राइस मिलर्स, आढ़तियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका सामने आई है।
H3: फर्जी रिकॉर्ड और गायब स्टॉक का खुलासा
विभागीय जांच में पाया गया:- सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज धान का स्टॉक मौके पर मौजूद नहीं था
- नकली गेट पास तैयार किए गए
- स्टॉक एंट्री में फर्जीवाड़ा किया गया
- GPS रिकॉर्ड संदिग्ध पाए गए
- कई खरीद केवल कागजों तक सीमित थीं
इन अनियमितताओं से सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान होने की आशंका जताई गई है।
H2: कई अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के महानिदेशक ने मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कई अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया।
H3: किन अधिकारियों को हटाया गया?
बर्खास्त किए गए अधिकारियों में शामिल हैं:
- इंस्पेक्टर लोकेश
- संदीप शर्मा
- यशवीर सिंह
- समीर वशिष्ठ
- एसआई रामफल
H2: करनाल अनाज मंडी में मिली भारी गड़बड़ी
जांच में करनाल अनाज मंडी के इंस्पेक्टर समीर वशिष्ठ को भी संयुक्त रूप से जिम्मेदार माना गया है।
H3: फिजिकल वेरिफिकेशन में सामने आई कमी
भिवानी के जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक द्वारा की गई जांच में वर्ष 2025 के दौरान फिजिकल वेरिफिकेशन में:
- रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर मिला
- हजारों क्विंटल धान की कमी सामने आई
- कई दस्तावेज संदिग्ध पाए गए
H2: क्या है ‘घोस्ट प्रोक्योरमेंट’ रैकेट?
विशेषज्ञों के अनुसार “घोस्ट प्रोक्योरमेंट” में:
- कागजों में फर्जी खरीद दिखाई जाती है
- वास्तविक माल मौजूद नहीं होता
- सरकारी भुगतान फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जारी किया जाता है
यह तरीका सरकारी खरीद प्रणाली में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का संकेत माना जाता है।
Key Highlights:
- करनाल धान खरीद घोटाले में बड़ा खुलासा
- विभागीय जांच में “घोस्ट प्रोक्योरमेंट” रैकेट का पर्दाफाश
- अधिकारियों, मिलर्स और आढ़तियों की भूमिका सामने आई
- फर्जी गेट पास और नकली रिकॉर्ड मिले
- कई अधिकारियों को बर्खास्त किया गया
- करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका
FAQ Section:
Q1: करनाल धान खरीद घोटाला क्या है?
यह मामला फर्जी धान खरीद दिखाकर सरकारी धन की कथित हेराफेरी से जुड़ा है।
Q2: जांच में क्या-क्या अनियमितताएं मिलीं?
फर्जी गेट पास, नकली स्टॉक एंट्री, गायब स्टॉक और संदिग्ध GPS रिकॉर्ड पाए गए।
Q3: किन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई?
कई इंस्पेक्टरों और एक एसआई को बर्खास्त किया गया है।
Q4: ‘घोस्ट प्रोक्योरमेंट’ का मतलब क्या है?
ऐसी खरीद जो केवल कागजों में दिखाई जाए, लेकिन वास्तविक स्टॉक मौजूद न हो।
Conclusion:
करनाल धान खरीद घोटाले की जांच ने सरकारी खरीद प्रणाली में गंभीर खामियों और संगठित भ्रष्टाचार की ओर संकेत किया है। विभागीय कार्रवाई के बाद अब इस मामले में आगे और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

