लुधियाना के मिट्टी अखाड़े से हरियाणा तक चमका कबीर कांगड़ा: संघर्ष और जुनून से बना उभरता पहलवान

दिहाड़ी मजदूर के बेटे ने मिट्टी के अखाड़े से शुरू किया सफर, अब सोनीपत की रेसलिंग अकादमी में कर रहा प्रशिक्षण

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लुधियाना के 18 वर्षीय पहलवान कबीर कांगड़ा ने सीमित संसाधनों के बावजूद कुश्ती की दुनिया में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी है। मिट्टी के अखाड़े से लेकर हरियाणा के प्रोफेशनल ट्रेनिंग सेंटर तक उसकी कहानी संघर्ष और मेहनत की मिसाल बन रही है।

परिचय: फैक्ट्रियों के शहर से उभरा नया पहलवान

लुधियाना, जो आमतौर पर उद्योग और फैक्ट्रियों के लिए जाना जाता है, अब कुश्ती की दुनिया में भी नई पहचान बना रहा है। 18 वर्षीय कबीर कांगड़ा अपनी मेहनत, अनुशासन और संघर्ष के दम पर इस धारणा को बदलने में जुटे हैं।

मिट्टी के छोटे अखाड़े से शुरू हुआ उनका सफर अब हरियाणा के सोनीपत स्थित प्रतिष्ठित रेसलिंग सेंटर तक पहुंच चुका है।


H2: शिवपुरी के मिट्टी अखाड़े से हुई शुरुआत

कबीर की कुश्ती यात्रा वर्ष 2022 में पुराने शहर के शिवपुरी इलाके में स्थित टुटियां वाला मंदिर के पीछे बने एक छोटे अखाड़े से शुरू हुई।

H3: कोच शौकी पहलवान ने पहचानी प्रतिभा

यह अखाड़ा अनुभवी कोच अशोक कुमार उर्फ ‘शौकी पहलवान’ चलाते हैं।

कोच अशोक बताते हैं:

  • कबीर स्कूल के बाद दोस्तों के साथ अखाड़े में आया करता था
  • उसके पास ना जूते थे, ना प्रोफेशनल किट
  • लेकिन सीखने का जुनून और अनुशासन अलग था

उन्होंने कहा कि मिट्टी में प्रशिक्षण केवल ताकत नहीं, बल्कि धैर्य, संतुलन और सम्मान भी सिखाता है।


H2: शुरुआती जीत से बढ़ा आत्मविश्वास

कोच की निगरानी में कबीर ने कुश्ती की बुनियादी तकनीकों पर तेजी से पकड़ बनाई।

H3: पारंपरिक दांव बने ताकत

  • धोबी पछाड़
  • बाहरली जैसे दांव
  • मजबूत पकड़ और संतुलन

कुछ ही महीनों में कबीर ने स्थानीय दंगल जीतकर अपनी प्रतिभा साबित कर दी।


H2: पिता के संघर्ष ने बनाया मजबूत आधार

कबीर की सफलता के पीछे उनके पिता धर्मिंदर कुमार का बड़ा योगदान है।

H3: दिहाड़ी मजदूर पिता ने नहीं छोड़ा बेटे का सपना

  • पिता लुधियाना में दिहाड़ी मजदूरी करते हैं
  • रोजाना ₹400-500 की कमाई
  • बेटे की ट्रेनिंग के लिए पैसे बचाए और उधार भी लिया

उन्होंने कहा कि कोच द्वारा प्रतिभा की पहचान के बाद उन्होंने बेटे के सपने को पूरा करने का फैसला किया।


H2: जिला स्तर से हरियाणा तक पहुंचा कबीर

कबीर ने फ्रीस्टाइल रेसलिंग में कई उपलब्धियां हासिल कीं।

H3: प्रमुख उपलब्धियां

  • जिला स्तरीय अंडर-17 प्रतियोगिता में मेडल
  • अंडर-19 60 किलोग्राम वर्ग के राज्य ट्रायल के लिए क्वालिफाई
  • अमृतसर में आयोजित राज्य चैंपियनशिप में रनर-अप

H2: अब सोनीपत में ले रहे प्रोफेशनल ट्रेनिंग

कुछ महीने पहले कबीर सोनीपत चले गए, जिसे भारत की कुश्ती राजधानी माना जाता है।

H3: राईपुर अकादमी में प्रशिक्षण

उन्होंने प्रतिष्ठित राईपुर अकादमी जॉइन की, जहां:

  • वैज्ञानिक प्रशिक्षण
  • सख्त डाइट प्लान
  • प्रोफेशनल मैट ट्रेनिंग

दी जाती है।

कोच कुलदीप के अनुसार मिट्टी अखाड़े की ट्रेनिंग ने कबीर को प्राकृतिक ताकत और बेहतरीन संतुलन दिया है।


H2: जड़ों से जुड़ा है कबीर

कबीर आज भी अपने पुराने अखाड़े और गुरु को नहीं भूले हैं।

H3: मिट्टी से जुड़ाव बरकरार

जब भी वह लुधियाना लौटते हैं:

  • शिवपुरी अखाड़े जरूर जाते हैं
  • मिट्टी को प्रणाम करते हैं
  • गुरु का आशीर्वाद लेते हैं

कबीर कहते हैं कि उन्होंने खेल, विरोधी और मिट्टी का सम्मान यहीं सीखा।


H2: आर्थिक चुनौतियां अब भी बड़ी

कबीर के पिता के अनुसार:

  • डाइट, ट्रेनिंग और यात्रा पर हर महीने ₹15,000 से ज्यादा खर्च होता है
  • परिवार के लिए यह बड़ी चुनौती है
  • उम्मीद है कि भविष्य में सरकारी योजनाओं और स्पॉन्सरशिप से मदद मिलेगी

Key Highlights:

  • लुधियाना के कबीर कांगड़ा की प्रेरणादायक कहानी
  • मिट्टी के अखाड़े से शुरू हुआ सफर
  • दिहाड़ी मजदूर पिता ने किया संघर्ष
  • सोनीपत की रेसलिंग अकादमी में प्रशिक्षण
  • राज्य स्तर पर हासिल की सफलता
  • पारंपरिक अखाड़ों की भूमिका फिर चर्चा में

FAQ Section:

Q1: कबीर कांगड़ा कौन हैं?

कबीर कांगड़ा लुधियाना के 18 वर्षीय उभरते पहलवान हैं।

Q2: उन्होंने कुश्ती की शुरुआत कहां से की?

उन्होंने शिवपुरी स्थित मिट्टी के अखाड़े से प्रशिक्षण शुरू किया।

Q3: कबीर फिलहाल कहां ट्रेनिंग ले रहे हैं?

वह हरियाणा के सोनीपत स्थित राईपुर अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे हैं।

Q4: कबीर के पिता क्या करते हैं?

उनके पिता दिहाड़ी मजदूर हैं और बेटे की ट्रेनिंग के लिए अतिरिक्त काम करते हैं।


Conclusion:

कबीर कांगड़ा की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि संघर्ष, परिवार के त्याग और पारंपरिक खेल संस्कृति की ताकत की मिसाल है। सीमित संसाधनों के बावजूद उनका सफर यह साबित करता है कि मेहनत और सही मार्गदर्शन से बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।Screenshot_1589

Edited By: Karan Singh

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