- Hindi News
- राज्य
- हरियाणा
- फसल बीमा विवाद में किसानों की बड़ी जीत, हाईकोर्ट से याचिका वापस लेने पर AIKS ने जताई खुशी
फसल बीमा विवाद में किसानों की बड़ी जीत, हाईकोर्ट से याचिका वापस लेने पर AIKS ने जताई खुशी
सरसों फसल के 85 करोड़ रुपये के बीमा दावों से जुड़ी याचिका वापस लेने को किसानों के लंबे आंदोलन की सफलता बताया गया।
ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सरसों फसल के बीमा दावों को लेकर बीमा कंपनी द्वारा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से याचिका वापस लेने को किसानों की बड़ी जीत बताया है। किसान नेताओं का कहना है कि इससे 250 करोड़ रुपये के अन्य लंबित दावों के समाधान का रास्ता भी मजबूत होगा।
हाईकोर्ट से याचिका वापस लेने पर किसानों ने जताई खुशी
ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत सरसों फसल बीमा दावों से जुड़े मामले में क्षेमा जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से अपनी रिट याचिका वापस लेने को किसानों की महत्वपूर्ण जीत बताया है।
यह मामला भिवानी, चरखी दादरी और नूंह जिलों के किसानों की करीब 85 करोड़ रुपये की बीमा क्षतिपूर्ति से संबंधित था।
85 करोड़ रुपये के बीमा दावों को लेकर था विवाद
जानकारी के अनुसार, बीमा कंपनी ने रबी सीजन 2023-24 के दौरान सरसों फसल के लगभग 85 करोड़ रुपये के बीमा दावों को निरस्त कर दिया था।इसके बाद मामला सेंट्रल टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी (CTAC) के पास पहुंचा, जिसने किसानों के पक्ष में फैसला सुनाया। इस निर्णय को चुनौती देते हुए बीमा कंपनी ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी।
अब कंपनी द्वारा यह याचिका वापस लेने के बाद किसान संगठनों ने इसे अपनी बड़ी सफलता बताया है।
250 करोड़ रुपये के दूसरे बीमा दावे भी बने मुद्दा
इसी बीमा कंपनी पर खरीफ सीजन 2023-24 के दौरान विशेष रूप से कपास फसल के नुकसान के मामलों में किसानों के करीब 250 करोड़ रुपये के बीमा दावों में कटौती करने का भी आरोप है।
किसानों का आरोप है कि कंपनी ने फसल कटाई (Crop Cutting) के आंकड़ों के बजाय सैटेलाइट आधारित तकनीकी उपज (Technical Yield) का इस्तेमाल कर बीमा राशि कम कर दी।
11 महीने तक चला किसानों का धरना
इस फैसले के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के नेतृत्व में किसानों ने लोहारू एसडीएम कार्यालय के बाहर लगातार 11 महीने तक दिन-रात धरना दिया।
किसान नेता बलबीर सिंह ठाकरण ने बताया कि आंदोलन के बाद राज्य सरकार को कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) की अध्यक्षता में स्टेट लेवल ग्रिवेंस रिड्रेसल कमेटी (SLGRC) का गठन करना पड़ा।
हाल ही में इस समिति ने बीमा कंपनी को किसानों के 250 करोड़ रुपये के लंबित बीमा दावों का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।
AIKS ने बताया किसानों के संघर्ष की जीत
किसान नेता बलबीर सिंह ठाकरण ने कहा कि हाईकोर्ट से याचिका वापस लेना किसानों के लंबे, शांतिपूर्ण और अनुशासित संघर्ष की जीत है।
उन्होंने दावा किया कि इस घटनाक्रम से किसानों के 250 करोड़ रुपये के लंबित बीमा दावों के समाधान की दिशा भी और मजबूत होगी।
Key Highlights:
- AIKS ने हाईकोर्ट से याचिका वापस लेने को किसानों की जीत बताया।
- मामला सरसों फसल के 85 करोड़ रुपये के बीमा दावों से जुड़ा था।
- CTAC ने पहले ही किसानों के पक्ष में फैसला दिया था।
- खरीफ 2023-24 में 250 करोड़ रुपये के बीमा दावों को लेकर भी विवाद जारी है।
- किसानों ने लोहारू में 11 महीने तक लगातार धरना दिया था।
- SLGRC ने बीमा कंपनी को 250 करोड़ रुपये का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।
FAQ Section:
प्रश्न 1: यह मामला किस फसल से संबंधित है?
यह मामला रबी 2023-24 सीजन की सरसों फसल के बीमा दावों से जुड़ा है।
प्रश्न 2: कितनी राशि के बीमा दावों पर विवाद था?
करीब 85 करोड़ रुपये के बीमा दावों पर विवाद था।
प्रश्न 3: CTAC ने क्या फैसला दिया था?
सेंट्रल टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी (CTAC) ने किसानों के पक्ष में निर्णय दिया था।
प्रश्न 4: 250 करोड़ रुपये का मामला किससे जुड़ा है?
यह खरीफ 2023-24, विशेषकर कपास फसल के बीमा दावों में कथित कटौती से संबंधित है।
प्रश्न 5: किसानों ने कितने समय तक आंदोलन किया?
संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में किसानों ने लोहारू में 11 महीने तक लगातार धरना दिया।
Conclusion:
हाईकोर्ट से याचिका वापस लिया जाना किसानों के लिए राहतभरी खबर माना जा रहा है। किसान संगठनों का मानना है कि इससे न केवल 85 करोड़ रुपये के सरसों बीमा दावों का रास्ता साफ होगा, बल्कि 250 करोड़ रुपये के लंबित बीमा दावों के समाधान की संभावना भी मजबूत हुई है।

