'एक वृक्ष दस पुत्रों के समान', यूपी में वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने की पहल तेज

मत्स्य पुराण के संदेश से प्रेरित होकर उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान को जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

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उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वृक्षारोपण को जनआंदोलन का रूप दिया जा रहा है। प्राचीन भारतीय पर्यावरण दर्शन से प्रेरित इस अभियान में जनभागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है।

भारतीय संस्कृति में प्रकृति संरक्षण का विशेष महत्व

भारतीय संस्कृति में प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण को सदियों से जीवन का अभिन्न हिस्सा माना गया है। मत्स्य पुराण का प्रसिद्ध श्लोक—

"दशकूपसमा वापी, दशवापीसमो ह्रदः।
दशह्रदसमः पुत्रो, दशपुत्रसमो द्रुमः॥"

प्रकृति के महत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। इसका अर्थ है कि दस कुओं के बराबर एक बावड़ी, दस बावड़ियों के बराबर एक तालाब, दस तालाबों के बराबर एक पुत्र और दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष होता है।

यह संदेश बताता है कि जल और वन मानव जीवन के आधार हैं तथा एक वृक्ष आने वाली कई पीढ़ियों के जीवन को सुरक्षित रखने की क्षमता रखता है।

पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की कोशिश

उत्तर प्रदेश में हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

सरकार का उद्देश्य केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना और वृक्षों के संरक्षण की जिम्मेदारी साझा करना भी है।

2017 के बाद बड़े स्तर पर बढ़ाया गया वृक्षारोपण

सरकारी पहल के अनुसार, वर्ष 2017 में नई सरकार के गठन के समय वन विभाग की नर्सरियों में लगभग 5 लाख पौधे उपलब्ध थे।

इसके बाद बड़े स्तर पर पौधों का उत्पादन बढ़ाने, वृक्षारोपण अभियान का विस्तार करने और इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में कार्य किया गया।

विभिन्न विभागों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की भागीदारी के साथ वृक्षारोपण कार्यक्रमों को व्यापक बनाया गया।

पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर

वृक्षारोपण अभियान का उद्देश्य हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ-साथ भूजल संरक्षण, जैव विविधता को बढ़ावा देना और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करना भी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण से पर्यावरण संतुलन मजबूत होगा और भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण संभव हो सकेगा।

Key Highlights:

  • मत्स्य पुराण में वृक्ष को दस पुत्रों के बराबर महत्व दिया गया है।
  • उत्तर प्रदेश में वृक्षारोपण को जनभागीदारी आधारित अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।
  • वर्ष 2017 के बाद वृक्षारोपण कार्यक्रमों का व्यापक विस्तार किया गया।
  • पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने पर विशेष जोर।
  • समाज के विभिन्न वर्गों को अभियान से जोड़ने की पहल।

FAQ Section:

प्रश्न 1: मत्स्य पुराण का श्लोक क्या संदेश देता है?
यह श्लोक जल और वृक्षों के महत्व को बताते हुए एक वृक्ष को दस पुत्रों के बराबर महत्व देता है।

प्रश्न 2: वृक्षारोपण अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
हरित क्षेत्र बढ़ाना, पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना और जनभागीदारी को बढ़ावा देना।

प्रश्न 3: वर्ष 2017 में वन विभाग की नर्सरियों में कितने पौधे उपलब्ध थे?
करीब 5 लाख पौधे उपलब्ध थे।

प्रश्न 4: अभियान में किन लोगों की भागीदारी पर जोर दिया गया है?
सरकारी विभागों, सामाजिक संगठनों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की।

प्रश्न 5: बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण से क्या लाभ होंगे?
पर्यावरण संरक्षण, भूजल संरक्षण, जैव विविधता में वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी।

Conclusion:

भारतीय परंपरा में प्रकृति संरक्षण को हमेशा सर्वोच्च महत्व दिया गया है। व्यापक वृक्षारोपण अभियान इसी सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी के माध्यम से मजबूत बनाने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए हरित एवं सुरक्षित वातावरण तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।Screenshot_3158

Edited By: Karan Singh

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