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फगवाड़ा में सिख संगठनों का प्रदर्शन: पंजाब में मानवाधिकार उल्लंघन मामलों की जांच के लिए स्वतंत्र आयोग बनाने की मांग
सिख फॉर इक्वैलिटी फाउंडेशन और एलायंस ऑफ सिख ऑर्गेनाइजेशंस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर 1980 से 2000 के बीच कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
फगवाड़ा में सिख संगठनों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर पंजाब में उग्रवाद के दौर के दौरान कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच के लिए स्वतंत्र 'पंजाब ट्रुथ, अकाउंटेबिलिटी एंड रिकंसिलिएशन कमीशन' गठित करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने फिल्म 'सतलुज' से प्रतिबंध हटाने की भी अपील की।
फगवाड़ा में सिख संगठनों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन
फगवाड़ा के गुरु हरगोबिंद नगर में गुरुवार को सिख फॉर इक्वैलिटी फाउंडेशन और एलायंस ऑफ सिख ऑर्गेनाइजेशंस के सदस्यों ने शांतिपूर्ण सड़क किनारे प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पंजाब में उग्रवाद के दौर के दौरान कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच के लिए एक स्वतंत्र 'पंजाब ट्रुथ, अकाउंटेबिलिटी एंड रिकंसिलिएशन कमीशन' गठित करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान प्रतिभागियों ने तख्तियां लेकर नारे लगाए और केंद्र सरकार तथा पंजाब सरकार से पारदर्शी जांच प्रक्रिया शुरू करने की अपील की।
कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच की मांग
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्ष 1980 से 2000 के बीच पंजाब में कथित तौर पर जबरन गुमशुदगी, फर्जी पुलिस मुठभेड़, हिरासत में मौत और अन्य मानवाधिकार उल्लंघन के कई मामले सामने आए थे।उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से प्रभावित कई परिवार आज भी न्याय और आधिकारिक मान्यता का इंतजार कर रहे हैं।
जसवंत सिंह खालड़ा को दी श्रद्धांजलि
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने कहा कि खालड़ा ने अपने जीवन को जोखिम में डालकर पंजाब में कथित तौर पर 25,000 से अधिक अज्ञात शवों के अवैध अंतिम संस्कार के मामलों को उजागर किया था। वक्ताओं के अनुसार, उनके प्रयासों से यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आया, लेकिन कई मामलों में अब भी सवाल बाकी हैं।
सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में आयोग बनाने की मांग
संगठनों ने मांग की कि एक स्वतंत्र ट्रुथ, अकाउंटेबिलिटी एंड रिकंसिलिएशन कमीशन का गठन किया जाए, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करें।
उन्होंने कहा कि आयोग कथित जबरन गुमशुदगी, फर्जी मुठभेड़ों और अन्य मानवाधिकार उल्लंघन के सभी मामलों की निष्पक्ष और व्यापक जांच करे तथा उसकी रिपोर्ट को आधिकारिक सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाए।
फिल्म 'सतलुज' से प्रतिबंध हटाने की भी मांग
प्रदर्शनकारियों ने फिल्म 'सतलुज' पर लगे प्रतिबंध को तत्काल हटाने की भी मांग की।
उनका कहना था कि यह फिल्म जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और कार्यों से जुड़े विषयों को सामने लाती है और पंजाब के उस दौर को समझने में मदद करती है।
Key Highlights:
- फगवाड़ा में सिख संगठनों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।
- स्वतंत्र ट्रुथ, अकाउंटेबिलिटी एंड रिकंसिलिएशन कमीशन बनाने की मांग।
- 1980 से 2000 के बीच कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच की अपील।
- मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा को श्रद्धांजलि दी गई।
- फिल्म 'सतलुज' से प्रतिबंध हटाने की मांग भी उठाई गई।
- प्रदर्शनकारियों ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की।
FAQ Section:
प्रश्न 1: प्रदर्शन किसने आयोजित किया?
सिख फॉर इक्वैलिटी फाउंडेशन, फगवाड़ा और एलायंस ऑफ सिख ऑर्गेनाइजेशंस ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन आयोजित किया।
प्रश्न 2: प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग क्या थी?
पंजाब में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच के लिए स्वतंत्र ट्रुथ, अकाउंटेबिलिटी एंड रिकंसिलिएशन कमीशन का गठन।
प्रश्न 3: प्रदर्शन में किस अवधि का उल्लेख किया गया?
प्रदर्शनकारियों ने वर्ष 1980 से 2000 के बीच कथित घटनाओं की जांच की मांग की।
प्रश्न 4: जसवंत सिंह खालड़ा का उल्लेख क्यों किया गया?
प्रदर्शन के दौरान उन्हें श्रद्धांजलि दी गई और उनके मानवाधिकार संबंधी कार्यों का उल्लेख किया गया।
प्रश्न 5: फिल्म 'सतलुज' को लेकर क्या मांग की गई?
प्रदर्शनकारियों ने फिल्म से प्रतिबंध हटाने और इसे सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की मांग की।
Conclusion:
फगवाड़ा में हुए इस प्रदर्शन के दौरान सिख संगठनों ने पंजाब के उग्रवाद काल से जुड़े कथित मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। साथ ही उन्होंने फिल्म 'सतलुज' पर लगे प्रतिबंध को हटाने की भी अपील की। इन मांगों पर संबंधित सरकारों की प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा।


