यूपी में 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं का लोड बढ़ाने पर नया विवाद, अब बिजली ढांचे की क्षमता पर उठे सवाल

बिना सहमति लोड संशोधन के आरोपों के बीच ट्रांसफॉर्मर, फीडर और सबस्टेशन पर बढ़ते दबाव को लेकर उपभोक्ता संगठनों ने जताई चिंता।

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उत्तर प्रदेश में करीब 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं के स्वीकृत विद्युत भार (Sanctioned Load) में संशोधन को लेकर विवाद गहरा गया है। अब मामला केवल बढ़े हुए फिक्स्ड चार्ज तक सीमित नहीं है, बल्कि बिजली वितरण व्यवस्था की क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

 

47 लाख उपभोक्ताओं का बिजली लोड बढ़ाने पर विवाद

उत्तर प्रदेश में लगभग 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं के स्वीकृत बिजली लोड में किए गए संशोधन को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। शुरुआत में उपभोक्ताओं ने बिना सहमति लोड बढ़ाने और फिक्स्ड चार्ज में संभावित वृद्धि का विरोध किया था, लेकिन अब विशेषज्ञ और उपभोक्ता संगठन बिजली वितरण नेटवर्क की क्षमता पर भी सवाल उठा रहे हैं।

लखनऊ में सबसे अधिक असर

इस निर्णय का सबसे अधिक प्रभाव लखनऊ में देखने को मिल रहा है, जहां 3,87,304 उपभोक्ताओं का बिजली लोड Revenue Management System (RMS) के तहत संशोधित किया गया है।

क्षेत्रवार संशोधित कनेक्शनों का विवरण इस प्रकार है—

  • अमौसी – 1,63,343 उपभोक्ता
  • जानकीपुरम – 85,448 उपभोक्ता
  • गोमती नगर – 73,831 उपभोक्ता
  • लखनऊ सेंट्रल – 64,682 उपभोक्ता

लोड संशोधन की सूचना एसएमएस के माध्यम से मिलने के बाद इन चारों क्षेत्रों के लगभग 3,000 से 4,000 उपभोक्ताओं ने पुनरीक्षण (Review) के लिए आवेदन किया है। उनका आरोप है कि उनकी सहमति के बिना स्वीकृत लोड बढ़ा दिया गया।

बिजली विभाग ने क्या दी सफाई?

मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (MVVNL) की प्रबंध निदेशक रिया केजरीवाल ने कहा कि यह प्रक्रिया उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) के Electricity Supply Code-2005 और वित्तीय वर्ष 2025-26 के टैरिफ आदेश के अनुसार की गई है।

बिजली विभाग के अनुसार जिन उपभोक्ताओं ने 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच तीन बार अपने स्वीकृत लोड से अधिक बिजली की मांग दर्ज की, उनका लोड उपलब्ध अधिकतम मांग के न्यूनतम स्तर के आधार पर नियमित (Regularise) किया गया।

नई व्यवस्था के तहत लोड संशोधन के बाद उपभोक्ताओं को एसएमएस के माध्यम से सूचना भेजी जाती है।

अतिरिक्त लोड पर क्या हैं नियम?

यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के अनुसार—

  • घरेलू उपभोक्ताओं पर स्वीकृत लोड से अधिक उपयोग करने पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त डिमांड चार्ज लगाया जाता है।
  • अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए यह 200 प्रतिशत तक हो सकता है।
  • यदि संशोधित स्वीकृत लोड के भीतर बिजली का उपयोग किया जाता है तो अतिरिक्त डिमांड चार्ज नहीं देना पड़ता।

उपभोक्ता परिषद ने उठाए बड़े सवाल

उपभोक्ता परिषद का दावा है कि 47 लाख उपभोक्ताओं का कुल स्वीकृत लोड लगभग 3,654 मेगावाट (36.54 लाख किलोवाट) बढ़ गया है।

परिषद के अनुसार केवल लखनऊ में ही लगभग 350 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मांग पैदा हो सकती है।

संगठन का कहना है कि इतनी बड़ी वृद्धि केवल बिलिंग प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इससे ट्रांसफॉर्मर, फीडर, सबस्टेशन और ट्रांसमिशन लाइनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

बिजली ढांचे पर बढ़ सकता है दबाव

लखनऊ में पहले से ही गर्मियों के दौरान—

  • ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड होने,
  • बार-बार ट्रिपिंग,
  • लो वोल्टेज,
  • स्थानीय बिजली कटौती

जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं।

उपभोक्ता परिषद का कहना है कि यदि वितरण नेटवर्क को मजबूत किए बिना लाखों उपभोक्ताओं का स्वीकृत लोड बढ़ाया गया तो बिजली आपूर्ति संबंधी समस्याएं और बढ़ सकती हैं।

परिषद ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के मानकों का हवाला देते हुए कहा कि पीक डिमांड के समय वास्तविक बिजली मांग स्वीकृत लोड के काफी करीब पहुंच जाती है, जिससे वितरण प्रणाली पर भारी दबाव पड़ सकता है।

बिजली विभाग का पक्ष

एमवीवीएनएल का कहना है कि वास्तविक लोड का सही आकलन होने से भविष्य में ट्रांसफॉर्मर, फीडर और ट्रांसमिशन नेटवर्क को वास्तविक आवश्यकता के अनुसार मजबूत किया जा सकेगा। इससे तकनीकी खराबियों में कमी आएगी और बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय बनेगी।

Key Highlights:

  • यूपी में करीब 47 लाख उपभोक्ताओं का बिजली लोड संशोधित।
  • लखनऊ में 3.87 लाख उपभोक्ता इस प्रक्रिया से प्रभावित।
  • हजारों उपभोक्ताओं ने बिना सहमति लोड बढ़ाने का आरोप लगाया।
  • बिजली विभाग ने UPERC नियमों के तहत कार्रवाई होने का दावा किया।
  • उपभोक्ता परिषद ने ट्रांसफॉर्मर और बिजली नेटवर्क पर बढ़ते दबाव की आशंका जताई।
  • विभाग का कहना है कि इससे भविष्य में बिजली ढांचा बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

FAQ Section:

प्रश्न 1: कितने उपभोक्ताओं का बिजली लोड संशोधित किया गया है?
करीब 47 लाख उपभोक्ताओं का स्वीकृत बिजली लोड संशोधित किया गया है।

प्रश्न 2: लखनऊ में कितने उपभोक्ता प्रभावित हुए हैं?
लखनऊ में 3,87,304 उपभोक्ताओं का लोड संशोधित किया गया है।

प्रश्न 3: उपभोक्ता क्यों विरोध कर रहे हैं?
उनका कहना है कि बिना सहमति बिजली लोड बढ़ाया गया, जिससे फिक्स्ड चार्ज बढ़ सकता है।

प्रश्न 4: बिजली विभाग ने क्या सफाई दी है?
विभाग के अनुसार संशोधन UPERC के नियमों और टैरिफ आदेश के अनुरूप किया गया है।

प्रश्न 5: उपभोक्ता परिषद की मुख्य चिंता क्या है?
परिषद का कहना है कि बिजली वितरण ढांचे को मजबूत किए बिना लोड बढ़ाने से ट्रांसफॉर्मर, फीडर और बिजली आपूर्ति पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

Conclusion:

उत्तर प्रदेश में बिजली लोड संशोधन का मामला अब केवल बिलिंग विवाद तक सीमित नहीं रहा है। जहां बिजली विभाग इसे नियमों के अनुरूप और भविष्य की बेहतर बिजली व्यवस्था की दिशा में उठाया गया कदम बता रहा है, वहीं उपभोक्ता संगठन वितरण नेटवर्क की क्षमता और संभावित बिजली संकट को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले समय में इस मुद्दे पर उपभोक्ताओं और बिजली विभाग के बीच संवाद और तकनीकी सुधार दोनों महत्वपूर्ण रहेंगे।Screenshot_3160

Edited By: Karan Singh

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