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भाखड़ा पानी के बंटवारे पर बढ़ा विवाद, बालसमंद के ग्रामीणों ने आंदोलन की दी चेतावनी
बारवाला ब्रांच में स्वीकृत क्षमता के अनुसार पानी छोड़ने की मांग, भाखड़ा कमांड क्षेत्र का पानी यमुना कमांड क्षेत्र में भेजने का ग्रामीणों ने किया विरोध।
हिसार के बालसमंद और आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने पेयजल और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने पर नाराजगी जताई है। ग्रामीणों ने सरकार से बारवाला ब्रांच में स्वीकृत क्षमता के अनुसार पानी छोड़ने और भाखड़ा कमांड क्षेत्र का पानी यमुना कमांड क्षेत्र में भेजने पर रोक लगाने की मांग की है।
पानी की कमी को लेकर बालसमंद क्षेत्र में बढ़ा असंतोष
हरियाणा के बालसमंद और आसपास के गांवों में पेयजल और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। सोमवार को आयोजित एक बैठक में ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ और उनके हिस्से का पानी अन्य क्षेत्रों में भेजा गया तो वे आंदोलन शुरू करेंगे।
ग्रामीणों ने सरकार से बारवाला ब्रांच में उसकी स्वीकृत क्षमता के अनुसार पानी छोड़े जाने और लंबित जल परियोजनाओं को जल्द पूरा करने की मांग की।
'स्वीकृत क्षमता से कम मिल रहा है पानी'
बैठक में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खनौरी हेड से निकलने वाली बारवाला ब्रांच की स्वीकृत जल क्षमता 1,725 क्यूसेक है, लेकिन पिछले कई वर्षों से केवल करीब 1,500 क्यूसेक पानी ही छोड़ा जा रहा है।उनका कहना है कि कम पानी मिलने के कारण पेयजल आपूर्ति और सिंचाई दोनों प्रभावित हो रही हैं। कई गांवों को आज भी उनके निर्धारित हिस्से का पानी नहीं मिल रहा।
भाखड़ा का पानी यमुना कमांड क्षेत्र में भेजने का विरोध
ग्रामीणों ने भाखड़ा कमांड क्षेत्र के पानी को यमुना कमांड क्षेत्र में भेजे जाने का भी विरोध किया।
उनका कहना है कि पहले भाखड़ा कमांड क्षेत्र की जरूरतें पूरी की जानी चाहिए। यदि सरकार ने उनके हिस्से का पानी दूसरे क्षेत्रों की ओर मोड़ा तो वे इसका विरोध करेंगे।
आईएनएलडी नेता ने भी उठाए सवाल
इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के वरिष्ठ नेता प्रो. संपत सिंह ने कहा कि हांसी शहर यमुना कमांड क्षेत्र में आता है, जबकि राजली हेड से भाखड़ा का पानी पाइपलाइन के जरिए वहां ले जाने की योजना नियमों के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने कहा कि संबंधित सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी के बिना भाखड़ा कमांड क्षेत्र का पानी यमुना कमांड क्षेत्र में नहीं भेजा जा सकता।
प्रो. संपत सिंह ने यह भी कहा कि हांसी और जींद की अतिरिक्त जल आवश्यकता यमुना प्रणाली से पूरी की जानी चाहिए, जबकि चनोट गांव भाखड़ा कमांड क्षेत्र का हिस्सा है।
किसान संगठनों ने सरकार को सौंपा ज्ञापन
पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति ने भी इस मुद्दे पर हरियाणा सरकार का ध्यान आकर्षित किया है।
समिति ने हिसार के उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर बारवाला ब्रांच से यमुना कमांड क्षेत्र की ओर पानी मोड़े जाने का विरोध दर्ज कराया।
सरकार से जल्द समाधान की मांग
किसान नेताओं संदीप धीरणवास और कुर्दा राम नंबरदार ने कहा कि बारवाला ब्रांच को उसकी स्वीकृत क्षमता के अनुसार पानी नहीं मिल रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए तो हिसार और भिवानी जिलों के प्रभावित क्षेत्रों के किसान और ग्रामीण बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
Key Highlights
- बालसमंद और आसपास के गांवों में पानी की कमी पर बढ़ा विरोध।
- बारवाला ब्रांच में 1,725 क्यूसेक के बजाय करीब 1,500 क्यूसेक पानी छोड़े जाने का आरोप।
- भाखड़ा कमांड क्षेत्र का पानी यमुना कमांड क्षेत्र में भेजने का विरोध।
- ग्रामीणों ने आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी।
- आईएनएलडी नेता प्रो. संपत सिंह ने भी जल बंटवारे पर सवाल उठाए।
- किसान संगठन ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
FAQ Section
Q1. ग्रामीण किस बात का विरोध कर रहे हैं?
ग्रामीण पर्याप्त पानी नहीं मिलने और भाखड़ा कमांड क्षेत्र का पानी यमुना कमांड क्षेत्र में भेजे जाने का विरोध कर रहे हैं।
Q2. बारवाला ब्रांच की स्वीकृत क्षमता कितनी है?
बारवाला ब्रांच की स्वीकृत क्षमता 1,725 क्यूसेक बताई गई है।
Q3. ग्रामीणों का आरोप क्या है?
उनका कहना है कि कई वर्षों से केवल लगभग 1,500 क्यूसेक पानी ही छोड़ा जा रहा है, जिससे पेयजल और सिंचाई प्रभावित हो रही है।
Q4. प्रो. संपत सिंह ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि यमुना कमांड क्षेत्र को भाखड़ा का पानी देने से पहले आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृति होनी चाहिए और अतिरिक्त पानी की जरूरत यमुना प्रणाली से पूरी की जानी चाहिए।
Q5. यदि मांगें नहीं मानी गईं तो ग्रामीण क्या करेंगे?
ग्रामीणों और किसान संगठनों ने आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
Conclusion
भाखड़ा और यमुना कमांड क्षेत्रों के बीच जल बंटवारे को लेकर विवाद एक बार फिर गहराता दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले उनके क्षेत्र को निर्धारित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो यह मुद्दा बड़े किसान आंदोलन का रूप ले सकता है।

