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हरियाणा में बेमौसम बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता, खेतों में बिछी धान की फसल; कटाई में हो सकती है एक हफ्ते की देरी
करनाल में इस सीजन की एक दिन में सबसे अधिक 113.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। कटाई के लिए तैयार धान की फसल गिरने से किसानों को पैदावार और अनाज की गुणवत्ता प्रभावित होने का डर सता रहा है।
हरियाणा में सोमवार को हुई भारी बारिश ने धान की कटाई की तैयारी कर रहे किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई इलाकों में खड़ी फसल जमीन पर गिर गई है। खेतों में नमी के कारण कटाई में करीब एक सप्ताह की देरी होने की आशंका है।
हरियाणा में भारी बारिश से धान किसानों की बढ़ी परेशानी, कटाई पर लगा ब्रेक
हरियाणा में सोमवार को हुई भारी बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर उन किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जिनकी धान की फसल पककर कटाई के लिए तैयार थी। अचानक हुई तेज बारिश के कारण कई इलाकों में खड़ी धान की फसल खेतों में बिछ गई है। इससे किसानों को पैदावार में गिरावट और अनाज की गुणवत्ता खराब होने का डर सता रहा है।
बारिश के चलते धान की कटाई का काम भी प्रभावित हुआ है। किसानों का कहना है कि खेतों में अधिक नमी होने के कारण फिलहाल कटाई करना मुश्किल है। मौसम और खेतों की स्थिति अनुकूल होने में करीब एक सप्ताह का समय लग सकता है।
करनाल में सबसे ज्यादा 113.5 मिमी बारिश दर्ज
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को करनाल में 113.5 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो इस सीजन में वहां एक दिन में हुई सबसे अधिक बारिश है। इसके अलावा प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी बारिश हुई।प्रमुख जिलों में दर्ज बारिश का आंकड़ा:
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करनाल: 113.5 मिमी
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अंबाला: 37.4 मिमी
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कैथल: 30 मिमी
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जींद: 26.5 मिमी
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पंचकूला: 15.5 मिमी
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रोहतक: 14.5 मिमी
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कुरुक्षेत्र: 13 मिमी
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सोनीपत: 10 मिमी
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यमुनानगर: 9 मिमी
करनाल में हुई भारी बारिश का असर धान की तैयार फसल पर दिखाई दे रहा है। कई जगहों पर फसल गिरने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
कटाई के लिए तैयार थी फसल, अब एक सप्ताह का करना पड़ सकता है इंतजार
किसानों के अनुसार, धान की फसल पककर तैयार हो चुकी थी और कई किसान कटाई की तैयारी कर रहे थे। कुछ किसानों ने कंबाइन हार्वेस्टर की व्यवस्था भी कर ली थी। लेकिन अचानक हुई बारिश के कारण कटाई का कार्यक्रम टालना पड़ रहा है।
बारिश के बाद खेतों में नमी अधिक होने से मशीनों के जरिए कटाई करना मुश्किल हो सकता है। वहीं, गीली फसल की कटाई से अनाज की गुणवत्ता पर भी असर पड़ने की आशंका है।
किसान मलाक सिंह बोले- बारिश ने बदल दिए हालात
किसान मलाक सिंह ने बताया कि उनकी धान की फसल कटाई के लिए तैयार थी और वह अगले कुछ दिनों में कटाई शुरू करने वाले थे। लेकिन भारी बारिश ने उनकी पूरी योजना बदल दी है।
उन्होंने बताया कि उनके खेतों में तेज बारिश हुई, जिससे धान की खड़ी फसल जमीन पर गिर गई। अब उन्हें कटाई के लिए कम से कम एक सप्ताह इंतजार करना पड़ सकता है। मलाक सिंह को आशंका है कि फसल गिरने से पैदावार और अनाज की गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
कंबाइन हार्वेस्टर की व्यवस्था भी आई काम नहीं
एक अन्य किसान सुल्तान सिंह ने बताया कि उनकी फसल कटाई के लिए लगभग पूरी तरह तैयार थी। उन्होंने कंबाइन हार्वेस्टर की व्यवस्था भी कर ली थी, लेकिन बारिश के कारण कटाई स्थगित करनी पड़ रही है।
उनके मुताबिक, यदि खेतों में नमी बनी रहती है तो फसल को कटाई के योग्य होने में करीब एक सप्ताह लग सकता है। ऐसे में किसानों को मौसम साफ होने और खेतों के सूखने का इंतजार करना पड़ेगा।
फसल गिरने से पैदावार घटने की आशंका
किसान अमित ने बताया कि धान की फसल तैयार करने में कई महीनों की मेहनत और काफी पैसा खर्च हुआ है। जब फसल कटाई के लिए तैयार हुई, तभी बारिश ने परेशानी बढ़ा दी।
उन्होंने कहा कि कई जगहों पर धान की खड़ी फसल जमीन पर गिर गई है। यदि फसल लंबे समय तक इसी स्थिति में रहती है, तो पैदावार घटने की आशंका है। किसानों को अब अपनी मेहनत और लागत के नुकसान की चिंता सता रही है।
बारिश के बाद किसानों के सामने क्या हैं चुनौतियां?
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कटाई में देरी: खेतों में नमी के कारण कटाई करीब एक सप्ताह तक टल सकती है।
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फसल गिरने का खतरा: तेज बारिश के कारण कई इलाकों में धान की खड़ी फसल जमीन पर गिर गई है।
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पैदावार पर असर: फसल लंबे समय तक गिरी रहने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
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अनाज की गुणवत्ता: अधिक नमी और कटाई में देरी से अनाज की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
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लागत की चिंता: महीनों की मेहनत और खेती पर किए गए खर्च के बाद किसान संभावित नुकसान को लेकर चिंतित हैं।
निष्कर्ष
हरियाणा में सोमवार को हुई भारी बारिश ने धान की कटाई के महत्वपूर्ण समय पर किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खासकर करनाल और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद फसल गिरने और खेतों में नमी की समस्या सामने आई है। अब किसानों को खेत सूखने और मौसम अनुकूल होने का इंतजार है। हालांकि, कटाई में देरी और फसल की स्थिति को लेकर किसानों की चिंता बनी हुई है।
