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DHBVN की कार्यप्रणाली पर बिजली लोकपाल सख्त, 15 दिन में उपभोक्ता के बकाया की अंतिम सत्यापित राशि तय करने के आदेश
पुराने बिजली रिकॉर्ड पेश नहीं कर पाने पर हरियाणा बिजली लोकपाल ने जताई नाराजगी, वरिष्ठ अधिकारियों की विशेष बैठक बुलाने के निर्देश।
हरियाणा बिजली लोकपाल राकेश कुमार खन्ना ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताते हुए अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर एक उपभोक्ता के बकाया की अंतिम और सत्यापित राशि तय करने का निर्देश दिया है। मामले में रिकॉर्ड उपलब्ध न कराने पर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए हैं।
DHBVN के रिकॉर्ड प्रबंधन पर उठे सवाल, बिजली लोकपाल ने दिए सख्त निर्देश
हरियाणा के बिजली लोकपाल (Electricity Ombudsman) राकेश कुमार खन्ना ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गुरुग्राम निवासी करम चंद गोगिया से संबंधित बिजली बकाया की अंतिम और विधिवत सत्यापित राशि 15 दिनों के भीतर निर्धारित की जाए।
यह निर्देश उपभोक्ता द्वारा दायर अपील की सुनवाई के दौरान जारी किए गए।
रिकॉर्ड उपलब्ध न कराने पर जताई नाराजगी
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई सुनवाई के दौरान लोकपाल ने पाया कि कई अवसर दिए जाने के बावजूद DHBVN के अधिकारी पुराने बिजली कनेक्शन से जुड़े आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सके।इन दस्तावेजों में शामिल थे:
- M&P जांच रिपोर्ट
- लेजर रिकॉर्ड
- पुराने बिलिंग दस्तावेज
- अन्य संबंधित अभिलेख
लोकपाल ने कहा कि आवश्यक रिकॉर्ड प्रस्तुत न किए जाने के कारण मामले के निस्तारण में अनावश्यक देरी हुई।
रिकॉर्ड बदलने या बिलिंग एजेंसी बदलने का बहाना स्वीकार नहीं
अपने अंतरिम आदेश में लोकपाल ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड स्थानांतरित होने या बिलिंग एजेंसी बदलने का तर्क बिजली निगम की कानूनी जिम्मेदारी को समाप्त नहीं करता।
उन्होंने कहा कि बिजली अधिनियम, 2003 और हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) के नियमों के तहत बिजली वितरण कंपनी की जिम्मेदारी है कि उपभोक्ताओं के रिकॉर्ड सुरक्षित, पूर्ण और आवश्यकता पड़ने पर आसानी से उपलब्ध रहें।
वरिष्ठ अधिकारियों की विशेष बैठक बुलाने के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिजली लोकपाल ने DHBVN हिसार के डायरेक्टर (ऑपरेशंस) को विशेष समन्वय बैठक या कैंप आयोजित करने का निर्देश दिया।
इस बैठक की अध्यक्षता उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) के कॉर्पोरेट कंज्यूमर ग्रीवेंस रिड्रेसल फोरम (CGRF) के चेयरमैन करेंगे।
कई विभागों के अधिकारी होंगे शामिल
लोकपाल ने निर्देश दिया कि इस विशेष बैठक में निम्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हों—
- आईटी विभाग
- कमर्शियल बैक ऑफिस
- M&P विंग
- विजिलेंस विभाग
- ऑपरेशंस विंग
- ऑडिट विभाग
इन अधिकारियों को उपलब्ध रिकॉर्ड का मिलान करने, जहां संभव हो वहां कानूनी प्रक्रिया के तहत गुम डेटा का पुनर्निर्माण करने और DHBVN सेल्स मैनुअल-2013 के अनुसार अंतिम बकाया राशि तय करने के निर्देश दिए गए हैं।
15 दिन में पूरी करनी होगी प्रक्रिया
लोकपाल ने स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी तब तक यह प्रक्रिया जारी रखेंगे, जब तक उपलब्ध दस्तावेजों और तार्किक आधार पर अंतिम एवं ऑडिट की गई बकाया राशि निर्धारित नहीं हो जाती।
उन्होंने पूरी प्रक्रिया 15 दिनों के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
Key Highlights:
- बिजली लोकपाल ने DHBVN की कार्यप्रणाली पर जताई गंभीर चिंता।
- 15 दिन में उपभोक्ता के बकाया की अंतिम सत्यापित राशि तय करने के आदेश।
- पुराने बिजली रिकॉर्ड उपलब्ध न कराने पर अधिकारियों को फटकार।
- हिसार में वरिष्ठ अधिकारियों की विशेष समन्वय बैठक होगी।
- IT, विजिलेंस, ऑडिट और अन्य विभागों के अधिकारी जांच में शामिल होंगे।
- रिकॉर्ड के आधार पर अंतिम बकाया राशि तय की जाएगी।
FAQ Section
Q1. बिजली लोकपाल ने DHBVN को क्या निर्देश दिए हैं?
लोकपाल ने 15 दिनों के भीतर उपभोक्ता के बकाया की अंतिम और सत्यापित राशि निर्धारित करने के निर्देश दिए हैं।
Q2. मामला किस उपभोक्ता से जुड़ा है?
यह मामला गुरुग्राम निवासी करम चंद गोगिया द्वारा दायर अपील से संबंधित है।
Q3. लोकपाल ने DHBVN पर क्या टिप्पणी की?
उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड सुरक्षित और उपलब्ध रखना बिजली निगम की कानूनी जिम्मेदारी है तथा रिकॉर्ड न होने का बहाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
Q4. विशेष बैठक में कौन-कौन शामिल होगा?
आईटी, कमर्शियल, M&P, विजिलेंस, ऑपरेशंस और ऑडिट विभाग के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल होंगे।
Q5. इस कार्रवाई का उद्देश्य क्या है?
उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सही और ऑडिट की गई बकाया राशि तय करना तथा उपभोक्ता शिकायत का निष्पक्ष समाधान करना।
Conclusion:
हरियाणा बिजली लोकपाल की यह कार्रवाई बिजली वितरण कंपनियों में रिकॉर्ड प्रबंधन और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। 15 दिनों में अंतिम सत्यापित बकाया राशि तय करने के निर्देश से उपभोक्ता शिकायतों के समयबद्ध और पारदर्शी समाधान की उम्मीद बढ़ी है।

