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दिल्ली में 10 करोड़ की रंगदारी मांगने वाले गिरोह का भंडाफोड़, पंजाब पुलिस का बर्खास्त ASI समेत 3 गिरफ्तार
रक्षा उपकरण निर्माता को गैंगस्टर और खालिस्तानी तत्वों के नाम पर दी जा रही थीं जान से मारने की धमकियां, दिल्ली क्राइम ब्रांच ने किया बड़ा खुलासा।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकियां देने के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में पंजाब पुलिस का बर्खास्त ASI भी शामिल है। जांच में पंजाब में हुई फायरिंग और रंगदारी के एक अन्य मामले से भी कनेक्शन सामने आया है।
दिल्ली में रक्षा कंपनी के मालिक से 10 करोड़ की रंगदारी मांगने का मामला, तीन आरोपी गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े रंगदारी और धमकी मामले का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन लोगों ने एक रक्षा उपकरण निर्माता से 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के लिए गैंगस्टर और खालिस्तानी तत्वों के नाम का इस्तेमाल किया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में पंजाब पुलिस का एक बर्खास्त सहायक उपनिरीक्षक (ASI) भी शामिल है।
किन आरोपियों को किया गया गिरफ्तार?
पुलिस ने इस मामले में गुरपिंदर सिंह उर्फ प्रिंस (32), शमशेर सिंह उर्फ सैम (35) और जसवंत सिंह (59) को गिरफ्तार किया है। गुरपिंदर और शमशेर पंजाब के तरनतारन जिले के निवासी हैं, जबकि जसवंत सिंह अमृतसर का रहने वाला है।
रक्षा कंपनी के मालिक को मिल रही थीं धमकियां
यह मामला दिल्ली के चाणक्यपुरी थाने में 17 अक्टूबर 2025 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता साहिल लूथरा, विजयन त्रिशूल डिफेंस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और प्रबंध निदेशक हैं।शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उन्हें गैंगस्टर गोल्डी बराड़ और कथित खालिस्तानी तत्वों के नाम पर लगातार धमकी भरे फोन कॉल और संदेश मिल रहे थे। उनसे 10 करोड़ रुपये की मांग की गई थी और रकम नहीं देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई थी।
व्हाट्सएप वॉयस नोट से बढ़ा मामला
पुलिस के अनुसार अगस्त और सितंबर 2025 के दौरान कई धमकी भरे कॉल और संदेश भेजे गए। इसके बाद 4 जून 2026 को एक अंतरराष्ट्रीय नंबर से व्हाट्सएप वॉयस नोट भेजकर दोबारा रंगदारी की मांग की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए 10 जून 2026 को जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई।
पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा
स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम) एचजीएस ढालीवाल के अनुसार, पूछताछ के दौरान गुरपिंदर सिंह और शमशेर सिंह ने खुलासा किया कि उन्होंने जसवंत सिंह के कहने पर धमकी भरा व्हाट्सएप वॉयस नोट भेजा था।
जांच में यह भी सामने आया कि शिकायतकर्ता की कंपनी के पंजाब स्थित कार्यों की निगरानी कर रहे जसवंत सिंह की कथित भूमिका इस पूरे षड्यंत्र में महत्वपूर्ण थी।
स्पेन से संचालित हो रहा था धमकी का नेटवर्क
क्राइम ब्रांच की जांच में पता चला कि शुरुआती धमकी भरे कॉल और संदेश कथित तौर पर "मन्नी" नामक व्यक्ति के जरिए भेजे गए थे, जो स्पेन से एक व्हाट्सएप नंबर संचालित कर रहा था। पुलिस का आरोप है कि यह गतिविधि जसवंत सिंह की मिलीभगत से की जा रही थी।
फर्जी गैंगस्टर और खालिस्तानी खतरे का बनाया गया माहौल
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने व्हाट्सएप के जरिए धमकी भरे संदेश और वॉयस नोट भेजकर गैंगस्टर और खालिस्तानी संगठनों के नाम पर डर का माहौल बनाने की कोशिश की। इसका उद्देश्य शिकायतकर्ता से बड़ी रकम वसूलना था।
जांच एजेंसियां आरोपियों के बयानों की तकनीकी साक्ष्यों और अन्य स्वतंत्र स्रोतों के माध्यम से पुष्टि कर रही हैं।
पंजाब में फायरिंग मामले से भी जुड़ा कनेक्शन
क्राइम ब्रांच की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों का संबंध पंजाब में शिकायतकर्ता को निशाना बनाकर की गई फायरिंग की घटना से भी हो सकता है। पुलिस ने वर्तमान साजिश को पंजाब में दर्ज एक अलग फायरिंग-फॉर-एक्सटॉर्शन मामले से जोड़ा है।
अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच जारी है।
Key Highlights:
- दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
- गिरफ्तार आरोपियों में पंजाब पुलिस का बर्खास्त ASI भी शामिल।
- रक्षा उपकरण निर्माता से 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई थी।
- गोल्डी बराड़ और खालिस्तानी तत्वों के नाम पर दी गई थीं धमकियां।
- स्पेन से संचालित व्हाट्सएप नंबर के जरिए भेजे गए थे संदेश।
- पंजाब के फायरिंग-फॉर-एक्सटॉर्शन केस से भी जुड़ा मामला।
FAQ Section
Q1. इस मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है?
दिल्ली पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें पंजाब पुलिस का एक बर्खास्त ASI भी शामिल है।
Q2. रंगदारी की कितनी रकम मांगी गई थी?
आरोपियों ने रक्षा उपकरण निर्माता से 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी।
Q3. शिकायतकर्ता कौन हैं?
शिकायतकर्ता साहिल लूथरा हैं, जो विजयन त्रिशूल डिफेंस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और प्रबंध निदेशक हैं।
Q4. पुलिस जांच में क्या खुलासा हुआ?
जांच में धमकी भरे कॉल, व्हाट्सएप वॉयस नोट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित नेटवर्क का पता चला है।
Q5. क्या मामला किसी अन्य अपराध से भी जुड़ा है?
हां, जांच में पंजाब में हुई एक फायरिंग-फॉर-एक्सटॉर्शन घटना से भी इस साजिश का संबंध सामने आया है।
Conclusion:
दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई ने एक ऐसे कथित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है जो गैंगस्टर और खालिस्तानी संगठनों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को डराकर रंगदारी वसूलने की कोशिश कर रहा था। मामले में अभी जांच जारी है और पुलिस अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है।

