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पंजाब में मक्के की जगह वसंतकालीन मूंगफली की खेती पर जोर, PAU ने किसानों को बताए कम लागत और ज्यादा फायदे
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने जागरूकता अभियान चलाकर किसानों को जल संरक्षण और बेहतर आय के लिए स्प्रिंग ग्राउंडनट अपनाने की सलाह दी।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के वैज्ञानिक किसानों को वसंतकालीन मूंगफली की खेती अपनाने के लिए जागरूक कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फसल कम पानी, कम लागत और बेहतर मिट्टी की उर्वरता के साथ किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है।
PAU का किसानों को संदेश: वसंतकालीन मूंगफली से होगी पानी की बचत, लागत भी घटेगी
पंजाब में गिरते भूजल स्तर और खेती की बढ़ती लागत के बीच पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) किसानों को वसंतकालीन मूंगफली (Spring Groundnut) की खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक इसे वसंत और गर्मी के मौसम में बोई जाने वाली मक्के की फसल का बेहतर विकल्प बता रहे हैं।
इसी उद्देश्य से पीएयू के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), संगरूर और प्लांट ब्रीडिंग एवं जेनेटिक्स विभाग के तिलहन अनुभाग ने किसानों के लिए जागरूकता शिविर और खेत भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किए।
प्रगतिशील किसानों के खेत पर आयोजित किया गया फील्ड डे
संगरूर जिले के सुनाम ब्लॉक के मेहलान गांव में प्रगतिशील किसान बेअंत सिंह और केवल सिंह के खेत पर फील्ड डे का आयोजन किया गया। यहां किसानों को वसंतकालीन मूंगफली की J-87 किस्म का सफल प्रदर्शन दिखाया गया।कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को इस फसल के पर्यावरणीय और आर्थिक लाभों से अवगत कराना था।
कम पानी और कम लागत वाली फसल
पीएयू-केवीके संगरूर के प्रभारी डॉ. मनदीप सिंह ने बताया कि वसंतकालीन मूंगफली की खेती में पानी की खपत काफी कम होती है। इसके अलावा इसमें खेती की लागत भी कम आती है।
उन्होंने कहा कि मूंगफली एक दलहनी फसल होने के कारण मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) करती है, जिससे भूमि की उर्वरता बढ़ती है और अगली फसल को भी लाभ मिलता है।
किसानों ने साझा किया अपना अनुभव
कार्यक्रम के दौरान मेजबान किसानों ने बताया कि वर्ष 2025 में उन्होंने एक एकड़ में वसंतकालीन मूंगफली की खेती का सफल परीक्षण किया था। अच्छे परिणाम मिलने के बाद इस वर्ष उन्होंने इसका रकबा बढ़ाकर चार एकड़ कर दिया।
किसानों के अनुसार, वसंतकालीन मक्के की तुलना में मूंगफली की खेती की लागत करीब 40 से 50 प्रतिशत कम आती है, जिससे यह किसानों के लिए अधिक लाभकारी विकल्प बन रही है।
J-87 किस्म की अधिक उत्पादन क्षमता
तकनीकी सत्र में पीएयू के तिलहन विस्तार विशेषज्ञ डॉ. गुरप्रीत सिंह ने किसानों को मूंगफली की उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक खेती के तरीकों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि J-87 किस्म वसंतकालीन मौसम में 15.8 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन देने की क्षमता रखती है, जबकि खरीफ मौसम में इसका औसत उत्पादन लगभग 12.8 क्विंटल प्रति एकड़ रहता है।
रोग प्रबंधन पर भी दी गई जानकारी
पीएयू के ऑयलसीड पैथोलॉजिस्ट डॉ. के.के. शर्मा ने किसानों को मूंगफली की फसल में रोगों की रोकथाम और प्रभावी प्रबंधन के उपाय बताए, ताकि बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
भूजल संरक्षण पर दिया गया विशेष जोर
सुनाम के ब्लॉक कृषि अधिकारी डॉ. इंदरजीत सिंह भट्टी ने किसानों से भूजल संरक्षण को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि कम पानी वाली फसलों को अपनाकर किसान न केवल प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा कर सकते हैं, बल्कि अपनी खेती को भी अधिक लाभदायक बना सकते हैं।
Key Highlights:
- PAU ने किसानों के लिए जागरूकता शिविर और फील्ड डे आयोजित किया।
- वसंतकालीन मूंगफली को मक्के का बेहतर विकल्प बताया गया।
- J-87 किस्म की उत्पादन क्षमता 15.8 क्विंटल प्रति एकड़।
- मूंगफली की खेती में 40-50% तक कम लागत आती है।
- कम पानी की जरूरत और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक।
- वैज्ञानिकों ने रोग प्रबंधन और आधुनिक खेती तकनीकों की जानकारी दी।
FAQ Section
Q1. PAU किसानों को कौन-सी फसल अपनाने की सलाह दे रहा है?
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय किसानों को वसंतकालीन मूंगफली (Spring Groundnut) की खेती अपनाने की सलाह दे रहा है।
Q2. वसंतकालीन मूंगफली की खेती के क्या फायदे हैं?
इसमें कम पानी की आवश्यकता होती है, लागत कम आती है और मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है।
Q3. J-87 किस्म की उत्पादन क्षमता कितनी है?
वसंतकालीन मौसम में J-87 किस्म लगभग 15.8 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन देने में सक्षम है।
Q4. किसानों को कितना आर्थिक लाभ मिल सकता है?
किसानों के अनुसार, मक्के की तुलना में मूंगफली की खेती की लागत 40-50 प्रतिशत तक कम आती है।
Q5. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
जल संरक्षण को बढ़ावा देना, खेती की लागत कम करना और किसानों की आय बढ़ाने के लिए वैकल्पिक फसल प्रणाली को प्रोत्साहित करना।
Conclusion:
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय का यह अभियान किसानों को ऐसी फसलों की ओर प्रेरित कर रहा है जो कम पानी में बेहतर उत्पादन दें और खेती की लागत घटाएं। वसंतकालीन मूंगफली न केवल किसानों की आय बढ़ाने का विकल्प बन सकती है, बल्कि भूजल संरक्षण और टिकाऊ कृषि को भी मजबूती दे सकती है।

