हरियाणा में धान की रोपाई की रफ्तार धीमी, कम बारिश और ड्वार्फ वायरस के खतरे से किसान सतर्क

दक्षिणी राइस ब्लैक-स्ट्रीक्ड ड्वार्फ वायरस के डर और जून में कम वर्षा के कारण 10-15 दिन तक टली धान की रोपाई

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हरियाणा में इस बार धान की रोपाई निर्धारित गति से पीछे चल रही है। जून में सामान्य से कम बारिश और ड्वार्फ वायरस (SRBSDV) के संभावित प्रकोप की आशंका के चलते किसान रोपाई में देरी कर रहे हैं, जिससे अब तक केवल 55-60 फीसदी लक्ष्य ही पूरा हो सका है।

कम बारिश और वायरस के खतरे से प्रभावित हुई धान की रोपाई

हरियाणा में इस खरीफ सीजन धान की रोपाई की रफ्तार अपेक्षा से धीमी बनी हुई है। कृषि विभाग के अनुसार, जून महीने में कम बारिश और सदर्न राइस ब्लैक-स्ट्रीक्ड ड्वार्फ वायरस (SRBSDV), जिसे स्थानीय स्तर पर फिजी या ड्वार्फ वायरस कहा जाता है, के संभावित खतरे के कारण किसान रोपाई को टाल रहे हैं।

किसानों ने वायरस के संक्रमण का जोखिम कम करने के लिए धान की रोपाई 10 से 15 दिन तक देर से शुरू की है। वहीं, पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों की तैयारी भी प्रभावित हुई है।

अब तक केवल 55-60 प्रतिशत लक्ष्य ही पूरा

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, अब तक राज्य में धान की निर्धारित खेती के केवल 55 से 60 प्रतिशत क्षेत्र में ही रोपाई पूरी हो सकी है।

पिछले वर्षों में इसी अवधि तक लगभग 70 प्रतिशत रोपाई का कार्य पूरा हो जाता था, जिससे इस बार की धीमी प्रगति साफ दिखाई दे रही है।

15.60 लाख हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य

हरियाणा सरकार ने वर्ष 2026 के लिए 15.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया है।

इन जिलों में सबसे अधिक लक्ष्य

धान की खेती के लिए प्रमुख जिलों को निम्नलिखित लक्ष्य दिए गए हैं—

  • करनाल – 1.85 लाख हेक्टेयर
  • कैथल – 1.65 लाख हेक्टेयर
  • जींद – 1.50 लाख हेक्टेयर
  • सिरसा – 1.45 लाख हेक्टेयर
  • फतेहाबाद – 1.35 लाख हेक्टेयर
  • कुरुक्षेत्र – 1.20 लाख हेक्टेयर
  • हिसार – 1.05 लाख हेक्टेयर
  • यमुनानगर, अंबाला और सोनीपत – प्रत्येक 90,000 हेक्टेयर

पिछले साल वायरस से हुआ था नुकसान

किसानों का कहना है कि पिछले वर्ष जल्दी रोपी गई धान की फसल ड्वार्फ वायरस से गंभीर रूप से प्रभावित हुई थी। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार कई किसानों ने 15 जून से शुरू होने वाली आधिकारिक रोपाई अवधि के बावजूद 25 जून के बाद रोपाई शुरू करना उचित समझा।

एक किसान राजिंदर कुमार ने बताया कि वायरस के संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने के लिए जानबूझकर रोपाई में 10 से 15 दिन की देरी की गई है।

कम बारिश ने भी बढ़ाई मुश्किलें

कैथल के किसान केवल ने बताया कि जून में पर्याप्त बारिश नहीं होने से कई खेतों में पानी की कमी बनी रही। इसके कारण समय पर रोपाई संभव नहीं हो सकी और किसानों को मौसम में सुधार का इंतजार करना पड़ा।

कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी

उप कृषि निदेशक (DDA) डॉ. वजीर सिंह ने स्वीकार किया कि कम बारिश और ड्वार्फ वायरस का खतरा दोनों ही इस बार रोपाई में देरी के प्रमुख कारण हैं।

उन्होंने बताया कि कृषि विभाग किसानों को वायरस से बचाव और समय पर फसल प्रबंधन के संबंध में जागरूक करने के लिए पहले ही जागरूकता अभियान और सलाह जारी कर चुका है।


Key Highlights:

  • हरियाणा में धान की रोपाई की गति पिछले वर्षों की तुलना में धीमी।
  • जून में कम बारिश और ड्वार्फ वायरस का खतरा प्रमुख कारण।
  • किसान 10-15 दिन देरी से कर रहे हैं रोपाई।
  • अब तक केवल 55-60% लक्ष्य पूरा, जबकि पिछले वर्षों में 70% कार्य हो चुका था।
  • राज्य में 15.60 लाख हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य।
  • करनाल, कैथल और जींद प्रमुख धान उत्पादक जिले।
  • कृषि विभाग ने किसानों के लिए जागरूकता अभियान चलाया।

FAQ Section

Q1. हरियाणा में धान की रोपाई में देरी क्यों हो रही है?

जून में कम बारिश और सदर्न राइस ब्लैक-स्ट्रीक्ड ड्वार्फ वायरस (SRBSDV) के खतरे के कारण किसान रोपाई में देरी कर रहे हैं।

Q2. अब तक कितनी धान की रोपाई हो चुकी है?

कृषि विभाग के अनुसार, अब तक केवल 55-60 प्रतिशत लक्ष्य क्षेत्र में रोपाई पूरी हुई है।

Q3. इस वर्ष धान की खेती का लक्ष्य कितना है?

हरियाणा सरकार ने 2026 में 15.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य रखा है।

Q4. कृषि विभाग किसानों के लिए क्या कदम उठा रहा है?

विभाग किसानों को ड्वार्फ वायरस से बचाव और वैज्ञानिक खेती के लिए जागरूकता अभियान और सलाह जारी कर रहा है।


Conclusion:

हरियाणा में इस वर्ष धान की रोपाई मौसम और फसल रोगों की आशंका के कारण प्रभावित हुई है। किसान पिछले साल के अनुभव से सबक लेते हुए सतर्कता बरत रहे हैं, जबकि कृषि विभाग भी जागरूकता और तकनीकी सलाह के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है। आने वाले दिनों में मानसून की स्थिति और मौसम का रुख धान की खेती की गति तय करेगा।Screenshot_2990

Edited By: Karan Singh

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