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कपूरथला मेयर चुनाव में देरी पर राणा गुरजीत सिंह ने उठाए सवाल, जल्द चुनाव कराने की मांग
कांग्रेस विधायक ने मंडल आयुक्त को लिखा पत्र, कहा- देरी से लोकतांत्रिक प्रक्रिया और शहरी विकास दोनों प्रभावित
कपूरथला नगर निगम के मेयर चुनाव में हो रही देरी को लेकर कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह ने पंजाब सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने जालंधर मंडल आयुक्त को पत्र लिखकर जल्द से जल्द मेयर चुनाव कराने के निर्देश जारी करने की मांग की है।
मेयर चुनाव में देरी पर कांग्रेस विधायक की आपत्ति
कपूरथला के विधायक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राणा गुरजीत सिंह ने नगर निगम के मेयर चुनाव में हो रही देरी पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने जालंधर मंडल आयुक्त को पत्र लिखकर कपूरथला नगर निगम आयुक्त को जल्द मेयर चुनाव कराने के निर्देश देने की मांग की है।
राणा गुरजीत सिंह का कहना है कि चुनाव परिणाम घोषित होने के काफी समय बाद भी मेयर का चुनाव न होना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को मिली थी स्पष्ट बढ़त
29 मई 2026 को घोषित नगर निगम चुनाव परिणामों में कांग्रेस ने कपूरथला नगर निगम की 50 में से 31 सीटों पर जीत दर्ज की थी।नगर निगम चुनाव परिणाम
- कांग्रेस – 31 सीटें
- आम आदमी पार्टी (AAP) – 11 सीटें
- भारतीय जनता पार्टी (BJP) – 3 सीटें
- शिरोमणि अकाली दल (SAD) – 3 सीटें
- निर्दलीय – 2 सीटें
बाद में निर्दलीय विजेता और पूर्व कांग्रेस नेता अमन रानी भी कांग्रेस में शामिल हो गईं, जिससे पार्टी की संख्या बढ़कर 32 हो गई।
'देरी से बढ़ेगी राजनीतिक खरीद-फरोख्त की आशंका'
राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि मेयर चुनाव में अनावश्यक देरी लोकतांत्रिक जनादेश की भावना को कमजोर करती है और इससे राजनीतिक खरीद-फरोख्त जैसी आशंकाओं को बढ़ावा मिल सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है, हालांकि उन्हें विश्वास है कि कांग्रेस के निर्वाचित प्रतिनिधि एकजुट रहेंगे।
'शहरी विकास कार्य भी हो रहे प्रभावित'
राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि चुनाव परिणाम आधिकारिक रूप से घोषित और अधिसूचित किए जा चुके हैं। इसके बावजूद मेयर चुनाव में देरी न केवल निर्धारित कानूनी समयसीमा की भावना के विपरीत है, बल्कि इससे नगर निगम के प्रशासनिक कार्य और विकास परियोजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि फिलहाल कपूरथला के नागरिकों को उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय नगर निगम नेतृत्व नहीं मिल पा रहा है।
सुल्तानपुर लोधी नगर परिषद चुनाव पर भी उठे सवाल
इस बीच, राणा गुरजीत सिंह के पुत्र और सुल्तानपुर लोधी से निर्दलीय विधायक राणा इंदरप्रताप सिंह ने भी नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव में देरी पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने दावा किया कि कानून के अनुसार चुनाव परिणामों की अधिसूचना जारी होने के 15 दिनों के भीतर अध्यक्ष का चुनाव कराया जाना चाहिए।
राणा इंदरप्रताप सिंह के अनुसार, उनके समूह ने 13 सदस्यीय नगर परिषद में 7 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि आम आदमी पार्टी को 5 और शिरोमणि अकाली दल को 1 सीट मिली।
उन्होंने आरोप लगाया कि तय समय पर चुनाव नहीं कराए गए और प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया गया।
Key Highlights:
- राणा गुरजीत सिंह ने मेयर चुनाव में देरी पर सवाल उठाए।
- जालंधर मंडल आयुक्त को जल्द चुनाव कराने के लिए पत्र लिखा।
- कांग्रेस ने कपूरथला नगर निगम की 50 में से 31 सीटें जीती थीं।
- अमन रानी के कांग्रेस में शामिल होने के बाद पार्टी के पास 32 पार्षद।
- विधायक ने देरी से लोकतांत्रिक प्रक्रिया और विकास कार्य प्रभावित होने की बात कही।
- सुल्तानपुर लोधी नगर परिषद अध्यक्ष चुनाव में देरी पर भी सवाल उठाए गए।
FAQ Section
Q1. राणा गुरजीत सिंह ने क्या मांग की है?
उन्होंने जालंधर मंडल आयुक्त को पत्र लिखकर कपूरथला नगर निगम का मेयर चुनाव जल्द कराने की मांग की है।
Q2. कपूरथला नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को कितनी सीटें मिली थीं?
कांग्रेस ने 50 में से 31 सीटें जीती थीं। बाद में एक निर्दलीय पार्षद के शामिल होने से उसकी संख्या 32 हो गई।
Q3. विधायक ने देरी पर क्या चिंता जताई?
उन्होंने कहा कि इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होती है, राजनीतिक खरीद-फरोख्त की आशंका बढ़ती है और शहरी विकास कार्यों में बाधा आती है।
Q4. सुल्तानपुर लोधी नगर परिषद को लेकर क्या मुद्दा उठाया गया?
निर्दलीय विधायक राणा इंदरप्रताप सिंह ने नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव में देरी पर सवाल उठाते हुए समय पर चुनाव कराने की मांग की है।
Conclusion:
कपूरथला नगर निगम के मेयर चुनाव में देरी को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना चाहिए, जबकि प्रशासन की ओर से अभी तक देरी के कारणों पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रशासन और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।

