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गेहूं खरीद नियमों पर सरकार घिरी, दीपेंद्र हुड्डा ने किसानों को परेशान करने का लगाया आरोप
नमी के नियमों में ढील देने की मांग, मंडियों में सुविधाओं की कमी पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने हरियाणा सरकार पर गेहूं खरीद के नए नियमों के जरिए किसानों को परेशान करने का आरोप लगाया। उन्होंने नमी की सीमा में ढील देने और खरीद प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की।
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने रविवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली हरियाणा सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि गेहूं खरीद के लिए बनाए गए नए नियम किसानों को राहत देने के बजाय उन्हें परेशान करने के लिए लागू किए गए हैं।
उन्होंने हाल ही में हुई बारिश के कारण गेहूं में बढ़ी नमी (मॉइस्चर कंटेंट) का मुद्दा उठाया, जिससे खरीद प्रक्रिया में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने सरकार से इन नियमों में ढील देने की मांग की, जैसा कि राजस्थान सरकार ने किया है।
करनाल जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पराग गाबा द्वारा आयोजित “अन्नदाता बैसाखी मिलन समारोह” में बोलते हुए दीपेंद्र हुड्डा ने कहा, “सरकार ने इतने सख्त नियम बना दिए हैं कि किसानों के लिए अपनी फसल बेचना बेहद मुश्किल हो गया है। सरकार किसानों की मदद करने के बजाय उन्हें परेशान कर रही है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार न तो न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल खरीद रही है और न ही बारिश से हुए नुकसान की भरपाई कर रही है।
उन्होंने कहा कि खरीद नीति को सरल बनाया जाना चाहिए ताकि किसान बिना किसी परेशानी के अपनी फसल बेच सकें। “सरकार को व्यवस्था को आसान बनाना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसानों को तुरंत भुगतान मिले। मंडियों में पड़ी गेहूं को बिना देरी उठाया जाए,” उन्होंने कहा।
उन्होंने आगे कहा, “गेहूं को नमी के आधार पर नहीं खरीदा जा रहा है। बारिश किसानों या सरकार के नियंत्रण में नहीं होती, इसलिए किसानों को इसके लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए। नमी की सीमा में ढील दी जानी चाहिए, जैसा कि भाजपा शासित राजस्थान में किया गया है। असमय बारिश से खराब हुई गेहूं की तुरंत खरीद की जानी चाहिए।”
दीपेंद्र हुड्डा ने बायोमेट्रिक सत्यापन और ट्रैक्टर पंजीकरण जैसे नियमों को भी खत्म करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मंडियों में बुनियादी सुविधाओं जैसे बोरियां, तिरपाल और मजदूरों की भी कमी है।
